Reliance Retail Online Expansion: मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) ऑनलाइन कॉमर्स बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रही है। कंपनी अब जियोमार्ट (JioMart) को तेजी से बढ़ाने, डार्क स्टोर्स का नेटवर्क विस्तार करने और ओमनी-चैनल मॉडल को मजबूत बनाने पर बड़ा निवेश करेगी। कंपनी का लक्ष्य अगले तीन साल में अपनी ऑपरेटिंग प्री-टैक्स कमाई (Operating Pre-Tax Earnings) को दोगुना करना है।
भारत के तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन ग्रॉसरी बाजार में रिलायंस रिटेल अब ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स को कड़ी चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
जियोमार्ट को मिलेगी नई रफ्तार, डार्क स्टोर्स पर बड़ा निवेश
रिलायंस रिटेल ने अपने डिजिटल कारोबार के विस्तार के लिए डार्क स्टोर्स की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है। डार्क स्टोर्स ऐसे छोटे वेयरहाउस होते हैं, जहां से ग्राहकों को तेजी से डिलीवरी उपलब्ध कराई जाती है। क्विक कॉमर्स कंपनियां जैसे ब्लिंकिट और इंस्टामार्ट इसी मॉडल के जरिए कुछ मिनटों में सामान पहुंचाने का दावा करती हैं।
कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) दिनेश तलुजा ने बताया कि रिलायंस रिटेल आने वाले समय में जियोमार्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी। इसके साथ ही टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और डिलीवरी नेटवर्क को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कंपनी इस साल अपने ऑनलाइन बिजनेस को तेजी से बढ़ाने की योजना बना रही है। इसके तहत डार्क स्टोर्स का विस्तार, ओमनी-चैनल प्लेटफॉर्म को मजबूत करना और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाना प्रमुख लक्ष्य हैं।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों पर पकड़ बनाने की रणनीति
रिलायंस रिटेल की रणनीति सिर्फ ऑनलाइन ऑर्डर बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कंपनी अपने ओमनी-चैनल मॉडल पर भी जोर दे रही है, जिसमें ग्राहक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से खरीदारी कर सकते हैं।
कंपनी के मुताबिक, जो ग्राहक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चैनलों का इस्तेमाल करते हैं, वे केवल ऑफलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों की तुलना में औसतन 2.7 गुना ज्यादा खर्च करते हैं।
इसके अलावा ऐसे ग्राहकों के खर्च में हर साल करीब 20 से 25 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली है। कंपनी इसी मॉडल के जरिए ग्राहकों की संख्या और खरीदारी दोनों बढ़ाने की योजना बना रही है।
मुनाफा बढ़ाने के लिए यूनिट इकोनॉमिक्स पर फोकस
रिलायंस रिटेल का कहना है कि उसका लक्ष्य सिर्फ ज्यादा ऑर्डर हासिल करना नहीं है, बल्कि हर ऑर्डर से बेहतर कमाई करना है। इसके लिए कंपनी यूनिट इकोनॉमिक्स पर ध्यान दे रही है।
यूनिट इकोनॉमिक्स से यह पता चलता है कि किसी एक प्रोडक्ट या ऑर्डर की बिक्री पर कंपनी को कितना फायदा या नुकसान हो रहा है।
दिनेश तलुजा के अनुसार, कंपनी हर बाजार में निवेश करने से पहले उसकी क्षमता और लाभ की संभावना का मूल्यांकन कर रही है। इससे कंपनी को लंबे समय में ज्यादा टिकाऊ बिजनेस मॉडल बनाने में मदद मिलेगी।
2027-28 तक बड़े बदलाव की तैयारी
कंपनी ने संकेत दिया है कि अगले दो से तीन वर्षों में किए जाने वाले निवेश का फायदा वित्त वर्ष 2027-28 और 2028-29 तक दिखने लगेगा।
रिलायंस रिटेल का लक्ष्य है कि:
- जियोमार्ट की पहुंच बढ़ाई जाए
- डिलीवरी नेटवर्क को तेज बनाया जाए
- ग्राहकों की दोबारा खरीदारी बढ़ाई जाए
- औसत ट्रांजैक्शन वैल्यू बढ़ाई जाए
- प्राइवेट ब्रांड्स की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए
इन कदमों से कंपनी को ज्यादा मार्जिन और मजबूत कैश फ्लो मिलने की उम्मीद है।
प्राइवेट ब्रांड्स और मार्केटप्लेस से बढ़ेगा रेवेन्यू
रिलायंस रिटेल अपने मुनाफे को बढ़ाने के लिए प्राइवेट ब्रांड्स पर भी जोर दे रही है। कंपनी का मानना है कि खुद के ब्रांड्स की बिक्री बढ़ने से मार्जिन बेहतर होगा।
इसके अलावा कंपनी अपने मार्केटप्लेस बिजनेस से भी ज्यादा कमाई करने की योजना बना रही है। ऑपरेशनल क्षमता में सुधार और सप्लाई चेन को मजबूत करके लागत कम करने की कोशिश की जाएगी।
क्विक कॉमर्स बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
भारत में क्विक कॉमर्स सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट और अन्य प्लेटफॉर्म्स पहले से ही इस बाजार में मजबूत स्थिति बना चुके हैं। अब रिलायंस रिटेल का आक्रामक विस्तार इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा सकता है।
जियोमार्ट के पास रिलायंस के बड़े रिटेल नेटवर्क, लाखों ग्राहकों और मजबूत सप्लाई चेन का फायदा है। कंपनी इसी ताकत के आधार पर ऑनलाइन कॉमर्स बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।
निष्कर्ष
रिलायंस रिटेल का नया प्लान भारत के ऑनलाइन शॉपिंग और क्विक कॉमर्स बाजार में बड़ा बदलाव ला सकता है। डार्क स्टोर्स, जियोमार्ट विस्तार और ओमनी-चैनल रणनीति के जरिए कंपनी अगले तीन साल में अपने मुनाफे को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। अगर कंपनी अपनी योजना को सफलतापूर्वक लागू करती है, तो ब्लिंकिट और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े खिलाड़ियों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो सकती है।


