भारतीय शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के शेयरों ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी के शेयर में एक ही कारोबारी दिन में करीब 12 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, जो पिछले छह वर्षों की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त बताई जा रही है। इस शानदार तेजी का असर अब मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस मामले में देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC बैंक को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया है।
शेयरों में आई इस तेजी से कंपनी के निवेशकों को फायदा हुआ है। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी की संपत्ति में भी करीब 8.5 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही वह एक बार फिर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का MTF बुक में दबदबा
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, 2 नवंबर को बाजार बंद होने तक रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) के तहत एक्सपोजर बढ़कर 4,711 करोड़ रुपये पहुंच गया। 30 अक्टूबर को बाजार बंद होने के समय यह आंकड़ा 2,937 करोड़ रुपये था।
इस तरह महज एक कारोबारी सत्र में रिलायंस का MTF एक्सपोजर करीब 60 फीसदी बढ़ गया। शेयर की कीमत में आई तेज उछाल और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने कंपनी को इस सूची में सबसे ऊपर पहुंचा दिया है।
क्या होती है मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF)?
मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी यानी MTF शेयर बाजार में निवेश करने की एक ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए निवेशक कम शुरुआती पूंजी लगाकर शेयर खरीद सकते हैं। इस व्यवस्था में निवेशक को शेयर की कुल कीमत का एक हिस्सा यानी मार्जिन देना होता है, जबकि बाकी रकम स्टॉकब्रोकर की ओर से उपलब्ध कराई जाती है।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई निवेशक 1 लाख रुपये के शेयर खरीदना चाहता है और उसके लिए निर्धारित मार्जिन 25 हजार रुपये है, तो उसे शुरुआत में 25 हजार रुपये लगाने होंगे। बाकी 75 हजार रुपये ब्रोकर की ओर से फंड किए जा सकते हैं। हालांकि, वास्तविक मार्जिन शेयर और ब्रोकर के नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
इस सुविधा को आमतौर पर ‘बाय नाउ, पे लेटर’ की तरह समझा जाता है। इसमें निवेशक को फंडिंग के बदले ब्याज या अन्य निर्धारित शुल्क देना पड़ सकता है। साथ ही शेयरों की कीमत गिरने पर नुकसान भी बढ़ सकता है। मार्जिन की कमी होने पर ब्रोकर अतिरिक्त रकम जमा करने के लिए कह सकता है या नियमों के तहत शेयर बेच सकता है।
HDFC बैंक को पछाड़कर पहले नंबर पर पहुंची रिलायंस
MTF एक्सपोजर की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने HDFC बैंक को पीछे छोड़ दिया है। HDFC बैंक पिछले कई महीनों से इस सूची में शीर्ष स्थान पर बना हुआ था, लेकिन रिलायंस के शेयरों में आई तेजी के बाद तस्वीर बदल गई।
2 नवंबर तक HDFC बैंक का MTF एक्सपोजर घटकर 2,991 करोड़ रुपये रह गया। इससे पहले यह करीब 3,000 करोड़ रुपये था। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज का एक्सपोजर बढ़कर 4,711 करोड़ रुपये हो गया।
इस बदलाव से पता चलता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में निवेशकों की गतिविधियां कितनी तेजी से बढ़ी हैं। हालांकि, MTF एक्सपोजर को सीधे तौर पर निवेशकों की कुल हिस्सेदारी या कंपनी में उनके दीर्घकालिक भरोसे का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
कुल MTF बुक में रिलायंस की हिस्सेदारी कितनी?
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार में कुल MTF बुक का आकार करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये है। इसमें टॉप 10 शेयरों का कुल एक्सपोजर 19,442 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का एक्सपोजर बढ़कर 4,711 करोड़ रुपये होने के बाद टॉप 10 शेयरों के कुल एक्सपोजर में इसकी हिस्सेदारी करीब 24 फीसदी हो गई है। यह आंकड़ा बताता है कि MTF के जरिए शेयर खरीदने वाले निवेशकों के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज की कितनी मजबूत मौजूदगी बन गई है।
सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद शेयरों में आई तेजी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में करीब 12 फीसदी की तेजी के पीछे कंपनी के सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों को भी एक अहम वजह माना जा रहा है। कंपनी के नतीजे बाजार के अनुमानों से बेहतर रहे और निवेशकों ने इसे सकारात्मक रूप से लिया।
तिमाही नतीजों के बाद शेयर में खरीदारी बढ़ी और स्टॉक ने जोरदार उछाल दर्ज किया। इस तेजी ने न केवल कंपनी के बाजार पूंजीकरण को प्रभावित किया, बल्कि MTF एक्सपोजर के आंकड़ों में भी बड़ा बदलाव ला दिया।
20, 50 और 100 DMA के ऊपर बंद हुआ शेयर
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में आई तेजी तकनीकी नजरिए से भी महत्वपूर्ण रही। सोमवार के कारोबारी सत्र में स्टॉक 20, 50 और 100-दिवसीय मूविंग एवरेज (DMA) के ऊपर बंद हुआ।
शेयर बाजार में मूविंग एवरेज का इस्तेमाल किसी स्टॉक के ट्रेंड और संभावित सपोर्ट या रेजिस्टेंस स्तर को समझने के लिए किया जाता है। जब कोई शेयर अपने प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर कारोबार करता है, तो इसे तकनीकी रूप से सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर के लिए अगला महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर 200-DMA था, जो करीब 1,327 रुपये के आसपास बताया गया। हालांकि, किसी भी तकनीकी स्तर को शेयर की कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं माना जा सकता।
मुकेश अंबानी की संपत्ति में $8.5 अरब की बढ़ोतरी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में आई रिकॉर्ड तेजी का असर कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी की संपत्ति पर भी पड़ा। शेयर की कीमत बढ़ने के बाद उनकी कुल संपत्ति में करीब 8.5 अरब डॉलर का इजाफा हुआ।
इस बढ़ोतरी के साथ मुकेश अंबानी एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए। रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनकी हिस्सेदारी के कारण कंपनी के शेयरों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव का असर उनकी अनुमानित नेटवर्थ पर भी पड़ता है।
कुल मिलाकर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में आई तेजी ने कंपनी को MTF बुक में नंबर-1 बना दिया है। हालांकि, निवेशकों को शेयर में निवेश का फैसला केवल हालिया तेजी या MTF एक्सपोजर के आधार पर नहीं करना चाहिए। कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन और बाजार की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी दी गई है, इसे निवेश की सलाह न समझें। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता का आकलन करें तथा सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह लें।


