RBI Interest Rate Hike: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दिसंबर 2026 से रेपो रेट में बढ़ोतरी शुरू कर सकता है। ICICI Bank का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो केंद्रीय बैंक दिसंबर में ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला ले सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद भले ही रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर बाजार की नजरें टिकी हुई हैं। निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक ICICI Bank ने अनुमान लगाया है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो RBI दिसंबर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू कर सकता है।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, ICICI Bank का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है। ऐसे में केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट (0.50%) तक की बढ़ोतरी कर सकता है।
RBI ने 5 अगस्त की MPC बैठक में नहीं बदली रेपो रेट
RBI ने 5 अगस्त को तीन दिनों तक चली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखने का फैसला किया था। केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति का रुख भी ‘न्यूट्रल’ (Neutral) बनाए रखा।
इस बैठक में RBI ने आर्थिक विकास को लेकर अपना अनुमान थोड़ा बढ़ाया, जबकि महंगाई के अनुमान में मामूली कमी की। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया कि भविष्य में महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर ब्याज दरों को लेकर फैसला लिया जाएगा।
क्रूड ऑयल की कीमतें तय करेंगी ब्याज दरों की दिशा
ICICI Bank के मुताबिक, ब्याज दरों में बढ़ोतरी का समय काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा। अगर वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी आती है तो RBI तुरंत कदम उठाने के बजाय अप्रैल 2027 तक इंतजार कर सकता है।
बैंक का अनुमान है कि सामान्य परिस्थितियों में RBI अप्रैल से ब्याज दरें बढ़ाना शुरू कर सकता है। हालांकि, अगर मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो दिसंबर में ही रेपो रेट बढ़ाने की संभावना बन सकती है।
मध्य पूर्व तनाव से बढ़ा महंगाई का खतरा
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति पर पड़ रहा है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल सहित कई कमोडिटी की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में तेजी आई है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और परिवहन लागत पर पड़ता है। इससे महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
भारत में भी खुदरा महंगाई दर पर RBI की नजर बनी हुई है। वहीं अमेरिका समेत कई देशों में भी महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकते हैं।
महंगे हो सकते हैं होम लोन और कार लोन
अगर RBI आने वाले समय में रेपो रेट बढ़ाता है तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। बैंक रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों में इजाफा कर सकते हैं।
ब्याज दरें बढ़ने से नई EMI महंगी हो सकती है और मौजूदा फ्लोटिंग रेट लोन लेने वाले ग्राहकों की मासिक किस्त भी बढ़ सकती है।
RBI के अनुमान से ज्यादा रह सकती है GDP ग्रोथ: ICICI Bank
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को 6.6 फीसदी से बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। हालांकि, ICICI Bank का अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इससे बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
ICICI Bank के अनुसार, FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.9 फीसदी और FY28 में 7.2 फीसदी तक पहुंच सकती है। बैंक का मानना है कि घरेलू मांग, निवेश और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती से विकास दर को समर्थन मिलेगा।
आगे RBI की नीति पर रहेगी बाजार की नजर
फिलहाल RBI ने रेपो रेट को स्थिर रखकर आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। लेकिन कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और महंगाई के आंकड़े आने वाले महीनों में केंद्रीय बैंक के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
अगर महंगाई पर दबाव बढ़ता है तो RBI दिसंबर से ही सख्त मौद्रिक नीति अपना सकता है, जबकि तेल कीमतों में गिरावट आने पर ब्याज दरों में बदलाव अगले साल अप्रैल तक टल सकता है।


