Kotak Mahindra Bank Fraud Case: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंचकूला नगर निगम फंड गबन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹131.33 करोड़ की संपत्ति अटैच (कुर्क) कर ली है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह कार्रवाई कथित गबन की पूरी रकम के बराबर है और एफआईआर दर्ज होने के महज चार महीने के भीतर इसे अंजाम दिया गया। इस मामले में कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व अधिकारी समेत कई लोगों की भूमिका सामने आने का दावा किया गया है।
₹131.33 करोड़ की संपत्ति कुर्क
ईडी के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियों में कुल ₹131.33 करोड़ की परिसंपत्तियां शामिल हैं। इनमें:
- ₹12.85 करोड़ बैंक खातों में जमा राशि
- ₹118.48 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां
इसके अलावा एजेंसी ने इस मामले में 9 आरोपियों के खिलाफ प्रॉसीक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की है।
चार महीने में गबन की पूरी रकम के बराबर कार्रवाई
ईडी ने बताया कि यह कार्रवाई पंचकूला एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई। एजेंसी का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के केवल चार महीने के भीतर कथित गबन की 100% राशि के बराबर संपत्तियां कुर्क कर ली गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
ईडी की जांच के मुताबिक, कोटक महिंद्रा बैंक के तत्कालीन वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह ने पंचकूला नगर निगम के अधिकारी विकास कौशिक और बैंक कर्मचारी दिलीप राघव के साथ मिलकर कथित साजिश रची।
जांच एजेंसी का आरोप है कि:
- नगर निगम के नाम पर दो अनधिकृत बैंक खाते खोले गए।
- इन खातों को खोलने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और जाली प्राधिकरण पत्र इस्तेमाल किए गए।
- नगर निगम के असली खातों से फर्जी ऑथराइजेशन लेटर के जरिए धनराशि इन खातों में ट्रांसफर की गई।
- बाद में यह रकम कई व्यक्तियों और संस्थाओं के खातों में भेजी गई।
- जांच में यह भी आरोप है कि रकम का एक हिस्सा पुष्पिंदर सिंह, विकास कौशिक और उनकी पत्नियों के व्यक्तिगत खातों में भी पहुंचा।
- ईडी के मुताबिक बैंक के एक अन्य अधिकारी सतीश कुमार की भी कथित भूमिका सामने आई है।
लग्जरी कारें और संपत्तियां खरीदने का आरोप
ईडी का आरोप है कि कथित गबन की रकम से पुष्पिंदर सिंह ने कई महंगी गाड़ियां खरीदीं, जिनमें शामिल हैं:
- Porsche Cayenne
- BMW की कई कारें
- दो Jeep Wrangler
- Toyota Land Cruiser
- Harley-Davidson मोटरसाइकिल
इसके अलावा महंगी घड़ियां, फर्नीचर और अचल संपत्तियां भी खरीदी गईं। जांच एजेंसी का दावा है कि धोखाधड़ी उजागर होने के बाद कुछ लग्जरी वाहनों को तीसरे पक्ष को बेच दिया गया।
संपत्ति छिपाने की भी कोशिश का आरोप
ईडी का आरोप है कि पंचकूला के सेक्टर-2 स्थित कुछ संपत्तियों को पुष्पिंदर सिंह ने अपनी बहन गुनीता सेठी के नाम ट्रांसफर किया, ताकि वास्तविक स्वामित्व छिपाया जा सके और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत होने वाली कुर्की से बचा जा सके।
क्या कहा है ED ने?
ईडी का कहना है कि जांच अभी जारी है और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला की पड़ताल की जा रही है। एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ अदालत में प्रॉसीक्यूशन कंप्लेंट दाखिल कर दी है। मामले में अंतिम दोष या निर्दोष होने का फैसला अदालत की सुनवाई के बाद होगा।


