भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। मोबाइल वॉलेट, प्रीपेड कार्ड और UPI आधारित सेवाओं ने लोगों के लेनदेन का तरीका बदल दिया है। लेकिन अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी किए गए नए ड्राफ्ट नियमों ने डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की चिंता बढ़ा दी है।
मोबाइल वॉलेट या प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (PPI) कंपनियों का कहना है कि अगर ये नियम मौजूदा स्वरूप में लागू हो गए, तो उनके कई बिजनेस मॉडल प्रभावित हो सकते हैं। इंडस्ट्री का मानना है कि इससे कमाई के कई बड़े अवसर खत्म हो जाएंगे और छोटे वॉलेट कारोबारियों के लिए बाजार में टिके रहना मुश्किल हो सकता है।
क्यों चर्चा में हैं RBI के नए ड्राफ्ट नियम?
RBI ने 22 अप्रैल को प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) से जुड़े ड्राफ्ट नियम जारी किए थे। इन नियमों का मकसद डिजिटल पेमेंट सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाना, मनी लॉन्ड्रिंग रोकना और फर्जी खातों पर लगाम लगाना बताया जा रहा है।
हालांकि, डिजिटल पेमेंट कंपनियों का कहना है कि नए प्रस्ताव इतने सख्त हैं कि इससे मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल सीमित हो जाएगा। इंडस्ट्री अब RBI से मुलाकात कर इन नियमों पर दोबारा विचार करने की मांग करने की तैयारी कर रही है।
एक प्रमुख डिजिटल पेमेंट कंपनी के अधिकारी ने बताया कि कंपनियां अगले कुछ दिनों में अपने सुझाव RBI को सौंप सकती हैं। इंडस्ट्री की सबसे बड़ी चिंता यह है कि नए नियम लागू होने के बाद मोबाइल वॉलेट्स की उपयोगिता काफी घट सकती है।
क्या हैं RBI के ड्राफ्ट नियम?
RBI के प्रस्तावित नियमों में कई बड़े बदलाव सुझाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा वॉलेट ट्रांजैक्शन लिमिट को लेकर हो रही है।
1. P2P ट्रांसफर की सीमा तय
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को वॉलेट के जरिए भेजी जाने वाली राशि की मासिक सीमा 25,000 रुपये रखने का प्रस्ताव है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई यूजर नियमित रूप से मोबाइल वॉलेट के जरिए पैसे ट्रांसफर करता है, तो उसकी सीमा सीमित हो जाएगी।
2. कैश लोडिंग लिमिट में बड़ी कटौती
अभी तक कई वॉलेट्स में 50,000 रुपये तक कैश जमा किया जा सकता था। RBI ने इसे घटाकर 10,000 रुपये करने का सुझाव दिया है। यह बदलाव उन कारोबारियों और ग्राहकों को प्रभावित कर सकता है जो बड़ी रकम वॉलेट के जरिए इस्तेमाल करते हैं।
3. बैलेंस लिमिट 2 लाख रुपये
ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि किसी वॉलेट में कुल मासिक बैलेंस 2 लाख रुपये तक सीमित रखा जाए। इंडस्ट्री का मानना है कि इससे कॉर्पोरेट और बिजनेस उपयोग में परेशानी बढ़ सकती है।
4. Minimum KYC वॉलेट्स पर रोक
RBI ने सुझाव दिया है कि जिन वॉलेट्स में केवल मिनिमम KYC हुआ है, उनका इस्तेमाल सिर्फ सामान खरीदने या सेवाओं के भुगतान तक सीमित रहे। ऐसे वॉलेट्स से किसी दूसरे व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर करने की अनुमति नहीं होगी।
यही नियम सबसे ज्यादा विवाद में है, क्योंकि कई छोटे शहरों और प्रवासी कामगारों के बीच मिनिमम KYC वाले वॉलेट्स का इस्तेमाल पैसे भेजने के लिए काफी होता है।
इंडस्ट्री क्यों परेशान है?
डिजिटल पेमेंट कंपनियों का कहना है कि नए नियमों से उनका बिजनेस मॉडल प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से वे कंपनियां ज्यादा चिंतित हैं जो प्रीपेड कार्ड्स, गिफ्ट कार्ड्स और मोबाइल वॉलेट आधारित सेवाओं पर निर्भर हैं।
मुंबई स्थित एक फिनटेक कंपनी के सीईओ ने कहा कि अगर मिनिमम KYC वॉलेट्स से पैसे भेजने पर रोक लग गई, तो लाखों यूजर्स प्रभावित होंगे। इससे छोटे लेनदेन वाले बिजनेस लगभग खत्म हो सकते हैं।
कंपनियों का यह भी कहना है कि इतनी कम लिमिट होने से ग्राहक सीधे बैंकिंग या UPI प्लेटफॉर्म पर चले जाएंगे, जिससे वॉलेट इंडस्ट्री का महत्व घट सकता है।
RBI ऐसा क्यों करना चाहता है?
RBI की नजर में डिजिटल पेमेंट सेक्टर में तेजी से बढ़ रहे फ्रॉड, फर्जी अकाउंट्स और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियां चिंता का विषय हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें बिना पूरी KYC वाले वॉलेट्स का इस्तेमाल गलत लेनदेन के लिए किया गया।
इसी वजह से केंद्रीय बैंक अब KYC नियमों को और सख्त करना चाहता है। RBI का मानना है कि: ग्राहकों की पहचान मजबूत हो, फर्जी खातों पर रोक लगे, डिजिटल ट्रांजैक्शन ज्यादा सुरक्षित बने, संदिग्ध लेनदेन पर निगरानी आसान हो
छोटे कारोबारियों और यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?
अगर ये नियम लागू होते हैं, तो सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों, डिलीवरी पार्टनर्स, गिग वर्कर्स और प्रवासी मजदूरों पर पड़ सकता है। कई लोग आज भी बैंक खाते की बजाय मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल आसान विकल्प के रूप में करते हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में वॉलेट आधारित भुगतान काफी लोकप्रिय हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि: छोटे लेनदेन में परेशानी बढ़ सकती है, वॉलेट कंपनियों की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है, ग्राहकों का झुकाव UPI की ओर और बढ़ सकता है, छोटी फिनटेक कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा
क्या UPI को फायदा होगा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर वॉलेट्स पर सख्ती बढ़ती है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा UPI प्लेटफॉर्म को मिल सकता है। भारत में पहले ही UPI तेजी से बढ़ रहा है। PhonePe, Google Pay, Paytm और BHIM जैसे प्लेटफॉर्म करोड़ों ट्रांजैक्शन संभाल रहे हैं।
यदि मोबाइल वॉलेट्स की लिमिट कम होती है, तो यूजर्स सीधे बैंक-टू-बैंक ट्रांसफर को प्राथमिकता दे सकते हैं।
कंपनियों की क्या मांग है?
डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री चाहती है कि RBI इन नियमों को लागू करने से पहले कंपनियों से विस्तृत चर्चा करे। कंपनियों की प्रमुख मांगें: नियम लागू करने के लिए 6-12 महीने का समय मिले, लिमिट्स को थोड़ा व्यावहारिक बनाया जाए, छोटे यूजर्स के लिए राहत दी जाए, मिनिमम KYC वॉलेट्स पर पूरी तरह रोक न लगे. इंडस्ट्री का कहना है कि अचानक सख्ती से डिजिटल पेमेंट सेक्टर की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
भारत के डिजिटल पेमेंट सेक्टर पर बड़ा असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट मार्केट्स में शामिल हो चुका है। RBI के नए नियम आने वाले समय में इस सेक्टर की दिशा तय कर सकते हैं। एक तरफ सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ फिनटेक कंपनियां चाहती हैं कि इनोवेशन और बिजनेस मॉडल पर ज्यादा दबाव न पड़े।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि RBI इंडस्ट्री की मांगों पर कितना विचार करता है और अंतिम नियमों में क्या बदलाव किए जाते हैं।
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