Rajasthan Cancer Medicine Black Market: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए खरीदी गई महंगी दवाओं का एक बैच दिल्ली में संदिग्ध ड्रग नेटवर्क के पास मिलने से हड़कंप मच गया है। दिल्ली पुलिस की इंटर-स्टेट सेल ने कार्रवाई के दौरान कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 22 दवाओं की शीशियां बरामद की हैं। इनमें कुछ बेहद महंगी और जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं। बरामद दवाओं में से चार शीशियों का कनेक्शन राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) की सरकारी सप्लाई से सामने आया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान सरकार ने दवाओं की खरीद से लेकर अस्पतालों तक पहुंचने और मरीजों को दिए जाने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच के निर्देश दिए हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने RMSCL को सरकारी दवाओं की सप्लाई और स्टॉक पर कड़ी निगरानी रखने को कहा है। सरकार यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी गई दवाएं आखिर दिल्ली के संदिग्ध नेटवर्क तक कैसे पहुंचीं।
दिल्ली में कैंसर की 22 महंगी दवाएं बरामद
दिल्ली पुलिस की इंटर-स्टेट सेल ने मंगलवार को एक संदिग्ध ड्रग सिंडिकेट के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 22 दवाओं की शीशियां बरामद कीं। इनमें डार्जलेक्स, इम्फिंजी, एर्बिटक्स, बावेंसियो, एडसेट्रिस और कीट्रुडा जैसी महंगी दवाएं शामिल हैं।
पुलिस ने इस कार्रवाई में करीब 27.19 लाख रुपये नकद भी जब्त किए हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन दवाओं की खरीद और सप्लाई का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके तार किन-किन शहरों तक जुड़े हुए हैं।
इस मामले में सबसे गंभीर सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि बरामद दवाओं में से कुछ का बैच रिकॉर्ड सरकारी खरीद से जुड़ता दिखाई दे रहा है।
चार शीशियों का राजस्थान से मिला कनेक्शन
जांच के दौरान दिल्ली में बरामद Bavencio 200mg/10ml की चार शीशियां जांच के केंद्र में हैं। इन दवाओं में Avelumab नाम का सक्रिय घटक होता है, जिसका इस्तेमाल कुछ प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है।
इन चारों शीशियों का बैच नंबर AU052510 बताया गया है। रिकॉर्ड के अनुसार यह बैच फरवरी 2025 में तैयार किया गया था और इसकी एक्सपायरी जनवरी 2028 की है।
दवा निर्माता कंपनी से जानकारी लेने के बाद पता चला कि इसी बैच की दवाएं राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी RMSCL को सप्लाई की गई थीं। इसके बाद राजस्थान सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।
राजस्थान के किन अस्पतालों में भेजी गई थीं दवाएं?
RMSCL के रिकॉर्ड के मुताबिक, इसी बैच की दवाओं की सप्लाई राजस्थान के कई बड़े सरकारी अस्पतालों तक की गई थी। इनमें जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर के अस्पताल शामिल बताए जा रहे हैं।
इनमें आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर ट्रीटमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसे संस्थान भी शामिल हैं। अब जांच का सबसे अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि सरकारी खरीद के बाद इन दवाओं की हर शीशी किस अस्पताल तक पहुंची।
जांच टीम यह भी देखेगी कि अस्पतालों ने कितनी दवाएं प्राप्त कीं, कितनी मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हुईं और कितनी दवाएं स्टॉक में बची थीं।
₹1 लाख तक कीमत वाली दवा का सवाल
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई दवाएं बेहद महंगी होती हैं और उनकी कीमत सामान्य मरीज की पहुंच से बाहर हो सकती है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाने वाली दवाएं जरूरतमंद मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।
इसी वजह से अगर सरकारी सप्लाई की कोई दवा अवैध तरीके से बाजार में पहुंचती है तो मामला सिर्फ आर्थिक नुकसान का नहीं रहता, बल्कि मरीजों के इलाज और सार्वजनिक स्वास्थ्य से भी जुड़ जाता है।
हालांकि, इस मामले में बरामद दवाओं की वास्तविक बाजार कीमत, उनकी स्थिति और वे किस तरह संदिग्ध नेटवर्क तक पहुंचीं, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
अब खरीदी से मरीज तक का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जाएगा
राजस्थान सरकार की जांच में दवाओं की सप्लाई चेन के हर स्तर की पड़ताल की जाएगी। इसमें मुख्य रूप से ये रिकॉर्ड देखे जाने की संभावना है:
- दवाओं की सरकारी खरीद से जुड़े दस्तावेज
- RMSCL के स्टॉक और डिस्पैच रिकॉर्ड
- संबंधित अस्पतालों की दवा मांग
- अस्पतालों द्वारा दवा प्राप्त करने की जानकारी
- स्टोर और फार्मेसी के स्टॉक रजिस्टर
- अस्पतालों से मरीजों को दवा जारी किए जाने का रिकॉर्ड
- दवा के इस्तेमाल से जुड़े उपचार रिकॉर्ड
- बची हुई दवाओं और स्टॉक की मौजूदा स्थिति
- दवाओं के परिवहन और भंडारण से संबंधित रिकॉर्ड
इस पूरी प्रक्रिया से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि किसी स्तर पर स्टॉक में कमी हुई थी या नहीं।
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने RMSCL से मांगी जानकारी
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर पुखराज सेन से संबंधित रिकॉर्ड मांगे हैं। पुलिस यह जानना चाहती है कि AU052510 बैच की दवाएं राजस्थान में किन-किन अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को भेजी गई थीं।
इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि संबंधित दवाओं को प्राप्त करने, स्टोर करने और मरीजों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किन अधिकारियों और कर्मचारियों की थी।
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं पहले किसी अस्पताल या सरकारी गोदाम में इस बैच की दवाओं के चोरी होने, स्टॉक कम मिलने या गलत तरीके से इस्तेमाल होने की शिकायत तो नहीं मिली थी।
अगर पहले ऐसी कोई शिकायत सामने आई थी, तो उससे संबंधित विभागीय जांच या पुलिस केस का रिकॉर्ड भी खंगाला जाएगा।
क्या राजस्थान से दिल्ली और मुंबई तक फैला है नेटवर्क?
इस मामले की जांच सिर्फ राजस्थान और दिल्ली तक सीमित नहीं है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संदिग्ध नेटवर्क के तार मुंबई के वाशी जैसे दूसरे इलाकों तक भी जुड़े हैं या नहीं।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि सरकारी सप्लाई से जुड़ी दवाएं सीधे ब्लैक मार्केट में पहुंचीं या किसी बिचौलिए, अस्पताल कर्मचारी, सप्लायर या अन्य व्यक्ति के जरिए आगे भेजी गईं।
फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
खाली शीशियों से नकली दवा का भी एंगल
मामले में एक और गंभीर आशंका की जांच की जा रही है। दिल्ली में बरामद कुछ सामान इलाज के बाद बची हुई खाली दवाओं की शीशियां हो सकती हैं।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि अगर खाली शीशियों का इस्तेमाल किया गया हो तो उन्हें किसी दूसरे स्थान पर भेजकर उनमें नकली या घटिया दवा भरने की कोशिश की जा सकती थी। इसके बाद इन्हें असली कैंसर इंजेक्शन बताकर बाजार में बेचने का खतरा रहता है।
हालांकि, यह फिलहाल जांच का एक संभावित एंगल है और इसे लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
सरकार ने दिए सख्त जांच के निर्देश
मामला सामने आने के बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सरकारी दवाओं की सप्लाई व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मरीजों के लिए खरीदी गई सरकारी दवाओं को बिना अनुमति बाहर बेचने के लिए नहीं भेजा जा सकता।
उन्होंने RMSCL को दवाओं की सप्लाई प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और हर स्तर पर रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का कहना है कि अगर जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, गड़बड़ी या मिलीभगत सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल: सरकारी दवा ब्लैक मार्केट तक पहुंची कैसे?
इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजस्थान के सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी गई दवा दिल्ली के संदिग्ध ड्रग नेटवर्क तक आखिर पहुंची कैसे।
क्या अस्पताल के स्टॉक से दवा गायब हुई? क्या सप्लाई चेन में किसी स्तर पर हेरफेर हुई? क्या किसी बिचौलिए ने सरकारी दवा को अवैध तरीके से बाहर निकाला? या फिर बरामद शीशियां किसी दूसरे स्रोत से आई थीं और उनका सिर्फ बैच नंबर सरकारी सप्लाई से मेल खाता है?
इन सभी सवालों का जवाब स्टॉक रजिस्टर, डिस्पैच रिकॉर्ड, अस्पतालों के उपयोग संबंधी दस्तावेज और मरीजों के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल राजस्थान सरकार और दिल्ली पुलिस दोनों स्तरों पर जांच जारी है। अगर सरकारी सप्लाई से दवाओं के अवैध डायवर्जन की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में दवा वितरण और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। वहीं, अगर नकली दवा तैयार करने के लिए खाली शीशियों के इस्तेमाल का एंगल सही साबित होता है, तो मामला मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से और भी गंभीर हो सकता है।
नोट: इस मामले में जांच जारी है। सरकारी दवाओं की चोरी, अवैध बिक्री या किसी व्यक्ति की मिलीभगत के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही माना जाना चाहिए।


