Varanasi FIR News: संसद के मानसून सत्र के दौरान अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान के कथित दुरुपयोग को लेकर विपक्ष द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन का मामला अब कानूनी मोड़ ले चुका है। वाराणसी में संत समाज की शिकायत के आधार पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सांसद पप्पू यादव और समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संसद परिसर में किए गए प्रदर्शन और उससे जुड़ी टिप्पणियों से सनातन धर्म की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
शुक्रवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। विपक्ष का आरोप था कि अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान के उपयोग में कथित अनियमितताएं हुई हैं। विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगते हुए सरकार को घेरा।
प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “चंदा चोर, गद्दी छोड़”, “जवाब देना होगा” और “अमित शाह, सदन में आओ” जैसे नारे लगाए। विपक्ष ने हाल ही में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया।
पप्पू यादव के प्रदर्शन पर सबसे ज्यादा विवाद
प्रदर्शन के दौरान पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर संसद पहुंचे। उनके हाथ में भगवान राम की तस्वीर थी और उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से मंदिर के पुजारी का रूप धारण करते हुए चढ़ावा इकट्ठा करने का प्रदर्शन किया। इस दृश्य के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए।
संत समाज का आरोप है कि इस तरह का प्रदर्शन धार्मिक परंपराओं और साधु-संतों की गरिमा का अपमान है। शिकायत में वायरल वीडियो को भी साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है।
वाराणसी में क्यों दर्ज हुई FIR?
काशी जोन के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव बंसवाल के अनुसार, कोतवाली थाने में प्राप्त शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने और सनातन धर्म के अपमान का आरोप लगाया गया है।
डीसीपी ने कहा कि पुलिस सभी तथ्यों और उपलब्ध वीडियो की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संत समाज ने क्या आरोप लगाए?
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच के बाहर धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रदर्शन के लिए किया गया। उनके अनुसार इससे करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की भावनाएं आहत हुई हैं। संत समाज ने मांग की है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
विपक्ष का आरोप क्या है?
विपक्ष का कहना है कि उसका प्रदर्शन राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान के कथित उपयोग से जुड़े सवाल उठाने के लिए था। विपक्षी सांसदों ने सरकार से इस पूरे मामले पर पारदर्शिता बरतने और संसद में जवाब देने की मांग की है।
फिलहाल सरकार की ओर से इस विरोध प्रदर्शन और दर्ज एफआईआर पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पुलिस की जांच जारी
वाराणसी पुलिस का कहना है कि शिकायत, वायरल वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और पुलिस ने किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पुष्टि करने की बात कही है।


