भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और सुरक्षा से जुड़ा निवेश माना जाता है। यही वजह है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार दो दिनों तक लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की, तो बाजार में इसका असर ठीक उल्टा दिखाई दिया। लोगों ने इसे आने वाले बड़े बदलावों का संकेत मान लिया और देशभर में सोने की खरीदारी अचानक तेज हो गई। कई शहरों में ज्वेलरी शोरूम्स पर भीड़ बढ़ गई और ब्राइडल ज्वेलरी की बिक्री में 15% से 20% तक की उछाल दर्ज की गई।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 13 मई से सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ा दिया है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और उसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित असर को देखते हुए लोगों से अपील की थी कि वे फिलहाल सोने की खरीदारी टालें। लेकिन बाजार में इसका बिल्कुल अलग असर देखने को मिला। लोगों को डर सताने लगा कि आने वाले दिनों में सोना और महंगा हो सकता है या सरकार टैक्स नियमों में और सख्ती कर सकती है। इसी आशंका ने पूरे देश में पैनिक बाइंग का माहौल बना दिया।
2 दिनों में बढ़ी भारी खरीदारी
ज्वेलरी कारोबारियों के मुताबिक पिछले दो दिनों में शादी-ब्याह से जुड़ी खरीदारी में अचानक तेज उछाल आया। खासकर जून से अगस्त के वेडिंग सीजन और साल के अंत में होने वाली शादियों को ध्यान में रखते हुए लोगों ने पहले ही बड़ी खरीदारी कर ली।
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कई बड़े शहरों में ब्राइडल ज्वेलरी की बिक्री में 15% से 20% तक की तेजी दर्ज की गई। कई ज्वेलर्स का कहना है कि ग्राहकों की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि सरकार जल्द ही आयात शुल्क और बढ़ा सकती है या फिर जीएसटी की मौजूदा 3% दर में बदलाव हो सकता है।
सरकार द्वारा 13 मई से इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद यह डर सही साबित होता दिखा और बाजार में सोना और महंगा हो गया।
MCX पर रिकॉर्ड तेजी
सोने की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला। बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना प्रति 10 ग्राम 10,000 रुपये से ज्यादा उछलकर 1.64 लाख रुपये के ऊपर पहुंच गया। इतनी बड़ी तेजी ने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों को चौंका दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता, डॉलर में उतार-चढ़ाव, खाड़ी युद्ध का असर और भारत में बढ़ती मांग ने मिलकर कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है।
क्यों डर गए ग्राहक?
बाजार में पिछले कुछ दिनों से कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कुछ लोगों को लग रहा था कि सरकार सोने पर और टैक्स बढ़ा सकती है, जबकि कुछ ग्राहकों को नकद खरीदारी पर सख्ती या नए नियम लागू होने की आशंका थी। इसी डर ने खरीदारी को और तेज कर दिया।
सेंको गोल्ड के एमडी और सीईओ सुवांकर सेन ने कहा कि बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। लोगों को लग रहा है कि अभी खरीद लेना ज्यादा सुरक्षित है, क्योंकि आने वाले महीनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं या नियम सख्त हो सकते हैं।
बड़े शोरूम्स में बढ़ी बिक्री
ज्वेलर्स के मुताबिक कई बड़े शोरूम्स में रोजाना बिक्री का आंकड़ा 25 लाख रुपये तक पहुंच गया। वहीं मध्यम आकार के स्टोर्स में भी प्रतिदिन 15 लाख से 18 लाख रुपये तक की बिक्री दर्ज की गई।
मुंबई के प्रसिद्ध जवेरी बाजार में भी कारोबार करीब 20% तक बढ़ गया। व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय बाद इतनी तेज खरीदारी देखने को मिली है। कई जगहों पर लोकप्रिय डिजाइन वाले गहनों का स्टॉक तेजी से खत्म हो गया।
दक्षिण भारत में भी बढ़ी मांग
दक्षिण भारत, जहां सोने की खरीदारी सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, वहां भी भारी मांग देखने को मिली। खासकर ब्राइडल ज्वेलरी की बिक्री में तेज उछाल दर्ज किया गया।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता का कहना है कि भारतीय परिवार सोने को सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं। लोगों को डर है कि भविष्य में सरकार और सख्त कदम उठा सकती है, इसलिए वे अभी खरीदारी को बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
क्या आगे और महंगा होगा सोना?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो सोने में सुरक्षित निवेश की मांग और बढ़ सकती है। इसके अलावा रुपये में कमजोरी और इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बनेगा।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इतनी तेज तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली आ सकती है और कीमतों में अस्थायी गिरावट देखने को मिल सकती है। लेकिन लंबी अवधि में सोने का ट्रेंड अभी भी मजबूत माना जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पूरा मामला?
यह सिर्फ सोने की खरीदारी की खबर नहीं है। यह दिखाता है कि भारत में आर्थिक अनिश्चितता और सरकारी संकेतों का उपभोक्ता व्यवहार पर कितना बड़ा असर पड़ता है। प्रधानमंत्री की अपील का उद्देश्य संभवतः आयात बिल और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करना था, लेकिन लोगों ने इसे आने वाले बड़े टैक्स बदलाव या महंगाई के संकेत के रूप में लिया।
यही वजह है कि अपील के तुरंत बाद बाजार में घबराहट वाली खरीदारी शुरू हो गई। इससे यह भी साफ होता है कि भारतीय परिवार अब भी आर्थिक संकट या अनिश्चितता के दौर में सोने को सबसे भरोसेमंद निवेश मानते हैं।
आगे क्या देखना होगा?
अब बाजार की नजर सरकार की अगली नीतियों, वैश्विक तनाव और डॉलर-रुपये की चाल पर रहेगी। अगर सोने पर और टैक्स बढ़ता है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी जारी रहती है, तो घरेलू कीमतें नए रिकॉर्ड बना सकती हैं। वहीं अगर हालात सामान्य होते हैं, तो खरीदारी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है।
लेकिन फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री की अपील ने लोगों को खरीदारी से रोकने के बजाय सोना खरीदने के लिए और ज्यादा प्रेरित कर दिया।


