नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर वर्ष 2021 से 2025 के बीच केंद्र सरकार ने 482.92 करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं इसी अवधि में भारत को 381.8 अरब डॉलर (करीब 31.69 लाख करोड़ रुपये) का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ। यह जानकारी केंद्र सरकार ने राज्यसभा में साझा की है।
सरकारी आंकड़ों के आधार पर यदि केवल गणितीय तुलना की जाए तो प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर खर्च किए गए हर 1 रुपये के मुकाबले भारत में लगभग 65,620 रुपये (करीब ₹66,000) का एफडीआई आया। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेश यात्राओं और एफडीआई के बीच कोई प्रत्यक्ष कारण-परिणाम संबंध स्थापित नहीं किया गया है। एफडीआई कई घरेलू और वैश्विक आर्थिक कारकों से प्रभावित होता है।
2021 से 2025 तक विदेश यात्राओं पर कितना खर्च हुआ?
कोरोना महामारी के बाद भारत की वैश्विक कूटनीतिक गतिविधियां तेज हुईं, जिसके साथ प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं की संख्या और उन पर होने वाला खर्च भी बढ़ा।
| वर्ष | विदेश यात्राएं | खर्च (करोड़ रुपये) |
|---|---|---|
| 2021 | 3 | 36.12 |
| 2022 | 7 | 55.83 |
| 2023 | 6 | 93.63 |
| 2024 | 11 | 109.51 |
| 2025 | 11 | 187.83 |
| कुल (2021-25) | 38 | 482.92 |
साल 2025 में विदेश यात्राओं पर सबसे अधिक 187.83 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो पिछले वर्षों की तुलना में सबसे ज्यादा है।
2026 में अब तक कितना खर्च हुआ?
सरकार के मुताबिक, 2026 में अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर 74.59 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। हालांकि यह अंतिम आंकड़ा नहीं है। फ्रांस यात्रा समेत कुछ दौरों के बिलों का अंतिम निपटारा अभी बाकी है, इसलिए कुल खर्च में आगे बदलाव संभव है।
2021-25 के दौरान भारत में कितना FDI आया?
केंद्र सरकार के अनुसार, अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में 381.8 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया।
यदि इस अवधि में 1 डॉलर की औसत विनिमय दर 83 रुपये मानी जाए तो यह निवेश लगभग 31.69 लाख करोड़ रुपये के बराबर बैठता है।
प्रमुख आंकड़े
- कुल FDI: 381.8 अरब डॉलर
- भारतीय मुद्रा में अनुमानित मूल्य: 31.69 लाख करोड़ रुपये
- विदेश यात्राओं पर कुल खर्च: 482.92 करोड़ रुपये
- गणितीय अनुपात: हर ₹1 खर्च पर लगभग ₹65,620 (करीब ₹66,000) का FDI
क्या विदेश यात्राओं की वजह से आया इतना FDI?
इस तुलना को सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का परिणाम मानना सही नहीं होगा। सरकार ने ऐसा कोई दावा नहीं किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एफडीआई कई कारकों से प्रभावित होता है, जिनमें शामिल हैं:
- भारत की आर्थिक नीतियां
- वैश्विक निवेश माहौल
- व्यापारिक सुधार
- राजनीतिक स्थिरता
- विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्र में अवसर
- कर एवं निवेश संबंधी नियम
इसलिए विदेश यात्राएं निवेश आकर्षित करने में एक सहायक भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन एफडीआई केवल इन्हीं पर निर्भर नहीं होता।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, प्रधानमंत्री की उच्चस्तरीय विदेश यात्राएं भारत के द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन दौरों के दौरान विभिन्न देशों के साथ समझौते और साझेदारियां होती हैं, जिनका उद्देश्य निम्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है:
- टेक्नोलॉजी और इनोवेशन
- व्यापार एवं निवेश
- रक्षा सहयोग
- ऊर्जा सुरक्षा
- सप्लाई चेन
- रणनीतिक साझेदारी
सरकार का मानना है कि ऐसे कूटनीतिक प्रयास भारत को वैश्विक निवेश और व्यापार के लिए अधिक आकर्षक बनाने में मदद करते हैं।
निष्कर्ष
वर्ष 2021 से 2025 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर 482.92 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि इसी अवधि में भारत को 31.69 लाख करोड़ रुपये का एफडीआई प्राप्त हुआ। दोनों आंकड़ों की तुलना में हर 1 रुपये के खर्च पर लगभग 66 हजार रुपये का एफडीआई दिखाई देता है, लेकिन इसे विदेश यात्राओं का प्रत्यक्ष परिणाम नहीं माना जा सकता। एफडीआई कई आर्थिक, नीतिगत और वैश्विक परिस्थितियों के संयुक्त प्रभाव से आता है।


