तकनीक और स्मार्टफोन ने बीमा खरीदने से लेकर क्लेम सेटलमेंट तक की पूरी प्रक्रिया को तेज, आसान और पारदर्शी बना दिया है। अब कागजी कार्रवाई, एजेंटों के लंबे चक्कर और क्लेम में देरी जैसी परेशानियां तेजी से कम हो रही हैं। डिजिटल बदलावों की बदौलत ‘2047 तक सबके लिए बीमा’ का लक्ष्य भी पहले से अधिक व्यावहारिक नजर आने लगा है।
Highlights
- घर बैठे स्मार्टफोन से कुछ ही मिनटों में बीमा पॉलिसी खरीदना संभव।
- AI और डेटा एनालिटिक्स से जरूरत के मुताबिक व्यक्तिगत बीमा सुझाव।
- डिजिटल क्लेम प्रक्रिया से तेज निपटान और रियल-टाइम ट्रैकिंग।
- ई-केवाईसी और ऑनलाइन वेरिफिकेशन से कागजी कार्रवाई लगभग खत्म।
- डिजिटल इनोवेशन से ‘इंश्योरेंस फॉर ऑल 2047’ लक्ष्य को मिल रही गति।
नई दिल्ली
एक समय था जब बीमा खरीदने का मतलब एजेंट से कई बार मिलना, ढेर सारे दस्तावेज भरना और क्लेम के समय लंबी प्रक्रिया से गुजरना होता था। लेकिन अब डिजिटल तकनीक और स्मार्टफोन ने इस पूरी व्यवस्था को बदल दिया है। आज बीमा खरीदने, प्रीमियम जमा करने, पॉलिसी मैनेज करने और क्लेम करने तक का लगभग हर काम मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए कुछ ही मिनटों में पूरा किया जा सकता है।
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ने न केवल बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाया है, बल्कि ग्राहकों का अनुभव भी पहले से कहीं अधिक आसान, पारदर्शी और भरोसेमंद बना दिया है। यही बदलाव भारत के ‘2047 तक सबके लिए बीमा’ के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अब एजेंट नहीं, स्मार्टफोन बनेगा आपका बीमा सलाहकार
आज अधिकांश बीमा कंपनियां अपने मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों को पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध करा रही हैं। ग्राहक घर बैठे अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसियों की तुलना कर सकते हैं, प्रीमियम कैलकुलेट कर सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार सही योजना चुन सकते हैं।
पहले जहां पॉलिसी जारी होने में कई दिन लग जाते थे, वहीं अब डिजिटल अंडरराइटिंग और ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग के कारण कुछ ही मिनटों में पॉलिसी जारी हो जाती है।
कागजी कार्रवाई लगभग खत्म
डिजिटल ऑनबोर्डिंग ने बीमा उद्योग की सबसे बड़ी समस्या—भारी कागजी प्रक्रिया—को काफी हद तक समाप्त कर दिया है।
अब ग्राहकों को केवल ई-केवाईसी, आधार आधारित सत्यापन, डिजिटल दस्तावेज अपलोड और ऑनलाइन हस्ताक्षर के जरिए पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इससे समय की बचत होती है और दस्तावेज खोने या गलतियां होने की संभावना भी कम हो जाती है।
दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भी यह बदलाव बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है क्योंकि उन्हें बीमा लेने के लिए किसी शाखा में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
AI बताएगा कौन-सी पॉलिसी आपके लिए सही
बीमा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
अब कंपनियां ग्राहक की आय, खर्च, परिवार, उम्र और वित्तीय जरूरतों का विश्लेषण कर उसी के अनुसार उपयुक्त बीमा योजनाओं की सिफारिश करती हैं। इससे ग्राहकों के गलत पॉलिसी खरीदने की संभावना कम होती है और उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक बेहतर सुरक्षा मिलती है।
अब मिलेगा पूरी तरह व्यक्तिगत बीमा समाधान
बीमा कंपनियां अब केवल सामान्य पॉलिसियां ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार कस्टमाइज्ड कवरेज भी उपलब्ध करा रही हैं।
कम बजट वाले ग्राहकों के लिए कम प्रीमियम वाले सैशे प्रोडक्ट्स और जरूरत के अनुसार एड-ऑन राइडर्स उपलब्ध हैं। भविष्य में IoT डिवाइस और रियल-टाइम हेल्थ डेटा के आधार पर डायनामिक प्रीमियम तय करने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है।
इसका मतलब है कि भविष्य में ग्राहक की जीवनशैली और जोखिम के आधार पर बीमा प्रीमियम अधिक सटीक तरीके से निर्धारित किया जा सकेगा।
ग्राहक सेवा हुई पहले से कहीं आसान
डिजिटल तकनीक ने ग्राहक सेवा को भी पूरी तरह बदल दिया है।
अब AI आधारित चैटबॉट, वॉयस असिस्टेंट और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध डिजिटल सहायता 24 घंटे ग्राहकों की मदद कर रही है। ग्राहक बिना किसी कॉल सेंटर पर लंबा इंतजार किए अपने सवालों के जवाब तुरंत प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अलावा जटिल बीमा शब्दावली को भी अब आसान भाषा में समझाया जा रहा है, जिससे नए ग्राहकों के लिए बीमा को समझना पहले की तुलना में काफी सरल हो गया है।
प्रीमियम भुगतान और रिन्यूअल भी हुआ आसान
पहले समय पर प्रीमियम जमा न होने के कारण कई लोगों की पॉलिसी लैप्स हो जाती थी।
अब डिजिटल पेमेंट, यूपीआई, नेट बैंकिंग, ऑटो-डेबिट और रिमाइंडर जैसी सुविधाओं के कारण ग्राहक आसानी से समय पर भुगतान कर सकते हैं। इससे पॉलिसी लगातार सक्रिय रहती है और बीमा सुरक्षा बनी रहती है।
क्लेम प्रक्रिया में आई सबसे बड़ी क्रांति
बीमा उद्योग में सबसे बड़ा बदलाव क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया में देखने को मिला है।
अब ग्राहक घर बैठे ऑनलाइन क्लेम दर्ज कर सकते हैं और उसकी स्थिति रियल-टाइम में ट्रैक कर सकते हैं। वीडियो सर्वे, इमेज असेसमेंट, OCR आधारित दस्तावेज सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड की मदद से क्लेम निपटान पहले की तुलना में काफी तेज हो गया है।
हर चरण की जानकारी ग्राहक को ऑनलाइन मिलती रहती है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और अनिश्चितता कम हुई है।
2047 तक ‘सबके लिए बीमा’ का लक्ष्य होगा आसान
सरकार और बीमा उद्योग दोनों का लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश के प्रत्येक नागरिक तक बीमा सुरक्षा पहुंचाना है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्मार्टफोन, इंटरनेट, AI और डेटा आधारित सेवाओं के बढ़ते उपयोग से बीमा अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोग भी आसानी से वित्तीय सुरक्षा से जुड़ रहे हैं।
आने वाले वर्षों में तकनीकी नवाचारों के साथ बीमा सेवाएं और अधिक सस्ती, सरल तथा ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप होने की संभावना है।
निष्कर्ष
डिजिटल तकनीक ने बीमा क्षेत्र की पारंपरिक चुनौतियों को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। स्मार्टफोन आधारित सेवाओं, AI, डिजिटल वेरिफिकेशन, ऑनलाइन भुगतान और तेज क्लेम प्रक्रिया ने बीमा को पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक और भरोसेमंद बना दिया है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो वर्ष 2047 तक हर भारतीय तक बीमा सुरक्षा पहुंचाने का लक्ष्य हासिल करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा।
(नोट: यह लेख इंडिया फर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर अत्रि चक्रवर्ती के विचारों पर आधारित है।)


