भारत का वस्त्र उद्योग सदियों से देश की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक विकास का मजबूत आधार रहा है। कश्मीर के पश्मीना शॉल, असम के मूंगा सिल्क, तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ियां, मध्य प्रदेश की चंदेरी और गुजरात के सूरत का टेक्सटाइल उद्योग दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखते हैं। अब केंद्र सरकार इसी विरासत को आधुनिक औद्योगिक ढांचे से जोड़ते हुए भारत को वर्ष 2030 तक 350 अरब डॉलर के वैश्विक टेक्सटाइल उद्योग के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई PM MITRA (Pradhan Mantri Mega Integrated Textile Region and Apparel) योजना इसी लक्ष्य का सबसे महत्वपूर्ण आधार मानी जा रही है। इस योजना के तहत देशभर में सात अत्याधुनिक टेक्सटाइल पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जहां उत्पादन से लेकर निर्यात तक की पूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर होगी।
भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ है टेक्सटाइल सेक्टर
भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में शामिल है। वर्तमान में यह क्षेत्र—
- भारत के GDP में लगभग 2.3% योगदान देता है।
- औद्योगिक उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 13% है।
- कुल निर्यात में लगभग 12% योगदान देता है।
- करीब 4.5 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है।
- जबकि 10 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर है।
कपास, जूट, रेशम, ऊन और हस्तकरघा जैसे क्षेत्रों में भारत दुनिया के प्रमुख उत्पादकों में शामिल है। लेकिन इतनी क्षमता होने के बावजूद भारत लंबे समय तक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी पूरी ताकत नहीं दिखा पाया।
बिखरे हुए उद्योग ढांचे से बढ़ रही थीं चुनौतियां
भारत में टेक्सटाइल वैल्यू चेन कई दशकों से अलग-अलग राज्यों में फैली हुई थी।
उदाहरण के लिए—
- कपास उत्पादन एक राज्य में,
- धागा निर्माण दूसरे राज्य में,
- फैब्रिक प्रोसेसिंग तीसरे राज्य में,
- गारमेंट निर्माण चौथे राज्य में,
- जबकि निर्यात किसी अन्य बंदरगाह से किया जाता था।
इस वजह से एक कपड़ा तैयार होने में कई राज्यों से होकर गुजरना पड़ता था। इससे परिवहन लागत बढ़ती थी, उत्पादन में देरी होती थी और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक समय पर सामान पहुंचाना चुनौती बन जाता था।
इसके अलावा छोटी-छोटी फैक्ट्रियों में पर्यावरणीय मानकों का पालन कराना भी बेहद कठिन था। वस्त्र उद्योग वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जल प्रदूषण में भी उल्लेखनीय हिस्सेदारी रखता है, इसलिए टिकाऊ उत्पादन प्रणाली विकसित करना समय की जरूरत बन चुका था।
PM MITRA योजना क्या है?
इन चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2021 में 4,445 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ PM MITRA योजना शुरू की।
इस योजना का उद्देश्य देश में ऐसे विशाल टेक्सटाइल पार्क विकसित करना है, जहां उत्पादन से लेकर निर्यात तक की पूरी श्रृंखला एक ही परिसर में उपलब्ध हो।
इस मॉडल में केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, निजी कंपनियां और उद्योग जगत मिलकर आधुनिक टेक्सटाइल इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का 5F विजन
PM MITRA योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5F Vision पर आधारित है।
यह विजन है—
- Farm to Fiber (खेती से फाइबर तक)
- Fiber to Factory (फाइबर से फैक्ट्री तक)
- Factory to Fashion (फैक्ट्री से फैशन तक)
- Fashion to Foreign (फैशन से विदेशी बाजार तक)
इसका उद्देश्य केवल उद्योग का विस्तार करना नहीं बल्कि किसानों, बुनकरों, कपड़ा निर्माताओं, डिजाइनरों और निर्यातकों को एक ही आर्थिक श्रृंखला में जोड़ना है।
एक ही परिसर में होगा पूरा उत्पादन
PM MITRA पार्कों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां—
- स्पिनिंग (कताई)
- वीविंग (बुनाई)
- प्रोसेसिंग
- डाइंग
- गारमेंट निर्माण
- पैकेजिंग
- लॉजिस्टिक्स
- निर्यात
जैसी सभी गतिविधियां एक ही परिसर में संचालित होंगी।
प्रत्येक पार्क लगभग 1,000 एकड़ या उससे अधिक क्षेत्रफल में विकसित किया जा रहा है।
इससे उत्पादन लागत कम होगी, समय की बचत होगी और कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से मिलेगा बड़ा फायदा
PM MITRA पार्कों में निवेशकों और उद्योगों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इनमें शामिल हैं—
- Plug-and-Play औद्योगिक ढांचा
- तैयार फैक्ट्री शेड
- समर्पित बिजली सब-स्टेशन
- निरंतर जलापूर्ति
- आधुनिक सड़क एवं रेल संपर्क
- एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से कनेक्टिविटी
- Common Effluent Treatment Plant (CETP)
- Zero Liquid Discharge (ZLD) तकनीक आधारित अपशिष्ट प्रबंधन
इन सुविधाओं के कारण उद्योगों को अलग-अलग बुनियादी ढांचा तैयार करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे निवेश की लागत भी घटेगी।
परिवहन लागत और कार्बन उत्सर्जन दोनों होंगे कम
PM MITRA पार्कों को रणनीतिक रूप से कच्चे माल के उत्पादन क्षेत्रों के पास विकसित किया जा रहा है।
इसके कई फायदे होंगे—
- परिवहन खर्च कम होगा।
- उत्पादन समय घटेगा।
- सप्लाई चेन मजबूत बनेगी।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
- उत्पादों की एंड-टू-एंड ट्रेसबिलिटी आसान होगी।
इससे भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों के आधार पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
देश के किन राज्यों में बन रहे हैं PM MITRA पार्क?
सरकार देशभर में कुल 7 PM MITRA पार्क विकसित कर रही है।
ग्रीनफील्ड परियोजनाएं
- तमिलनाडु – विरुधुनगर
- गुजरात – नवसारी
- कर्नाटक – कलबुर्गी
- मध्य प्रदेश – धार
- उत्तर प्रदेश – लखनऊ
ब्राउनफील्ड परियोजनाएं
- तेलंगाना – वारंगल
- महाराष्ट्र – अमरावती
इन पार्कों का चयन कच्चे माल की उपलब्धता, परिवहन सुविधा और औद्योगिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
निवेशकों का बढ़ा भरोसा
PM MITRA योजना को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार—
- लगभग 69,899 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताएं प्राप्त हो चुकी हैं।
- इनमें से 27,658 करोड़ रुपये का निवेश विभिन्न परियोजनाओं में किया जा चुका है।
यह दर्शाता है कि घरेलू और विदेशी निवेशक भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर की भविष्य की संभावनाओं पर भरोसा जता रहे हैं।
21 लाख से अधिक रोजगार सृजन का लक्ष्य
PM MITRA पार्क केवल उद्योगों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का माध्यम भी बनेंगे।
सरकार का अनुमान है कि—
- प्रत्येक पार्क से लगभग 3 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
- सभी सात पार्कों को मिलाकर 21 लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित किए जाएंगे।
इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों और महिलाओं को मिलने की संभावना है, क्योंकि रेडीमेड गारमेंट उद्योग में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक होती है।
महिलाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
टेक्सटाइल उद्योग भारत के उन क्षेत्रों में शामिल है जहां महिलाओं की बड़ी संख्या कार्यरत है।
PM MITRA पार्कों के माध्यम से—
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा।
- महिला श्रमिकों को संगठित क्षेत्र में अवसर मिलेंगे।
- स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को आधुनिक बाजार उपलब्ध होगा।
- छोटे एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को नई संभावनाएं मिलेंगी।
इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत का विजन 2030
सरकार का लक्ष्य केवल कपड़ा उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि भारत को वैश्विक टेक्सटाइल सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बनाना है।
Vision 2030 के तहत सरकार का उद्देश्य है—
- भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का आकार 350 अरब डॉलर तक पहुंचाना।
- निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि करना।
- वैश्विक ब्रांडों के लिए भारत को प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना।
- टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रणाली विकसित करना।
- “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” को नई गति देना।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को मिलेगा लाभ
वर्तमान समय में चीन, बांग्लादेश और वियतनाम वैश्विक वस्त्र निर्यात के प्रमुख केंद्र हैं। लेकिन वैश्विक कंपनियां अब अपनी सप्लाई चेन को विविध बनाने की रणनीति अपना रही हैं। ऐसे में भारत के पास बड़ा अवसर है।
यदि PM MITRA पार्क समय पर पूरी क्षमता के साथ विकसित होते हैं, तो भारत कम लागत, बेहतर गुणवत्ता, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और टिकाऊ उत्पादन के आधार पर वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष
PM MITRA योजना भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए एक परिवर्तनकारी पहल मानी जा रही है। एकीकृत टेक्सटाइल पार्क, आधुनिक बुनियादी ढांचा, पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रणाली, बड़े पैमाने पर निवेश और लाखों रोजगार अवसर इस योजना को भारत के औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बनाते हैं।
यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी सात पार्क पूरी तरह विकसित हो जाते हैं, तो भारत न केवल अपने वस्त्र उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा बल्कि वर्ष 2030 तक 350 अरब डॉलर की वैश्विक टेक्सटाइल महाशक्ति बनने के लक्ष्य की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाएगा।


