नई दिल्ली:
आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Persistent Systems के शेयरों में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। कंपनी का स्टॉक इंट्राडे कारोबार के दौरान करीब 10% तक लुढ़क गया, जिससे यह बीएसई मिडकैप इंडेक्स के सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल हो गया। इस तेज गिरावट की मुख्य वजह जर्मनी की आईटी कंपनी Nagarro SE के अधिग्रहण (Acquisition) का ऐलान माना जा रहा है।
कंपनी ने Nagarro के अधिग्रहण के लिए करीब 1.4 अरब डॉलर (लगभग 1.2-1.3 अरब डॉलर के ऑल-कैश ऑफर) का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, बाजार ने इस डील का शुरुआती स्वागत नहीं किया और निवेशकों ने इसे महंगे वैल्यूएशन पर किया गया सौदा मानते हुए शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी।
हाईलाइट्स
- Persistent Systems के शेयर करीब 10% तक टूटे।
- Nagarro SE के अधिग्रहण का किया गया ऐलान।
- डील में 140% प्रीमियम देने से बाजार चिंतित।
- ब्रोकरेज फर्मों ने जताई मार्जिन पर दबाव की आशंका।
- लॉन्ग टर्म में यूरोप और AI बिजनेस में मिल सकता है फायदा।
क्यों टूटा Persistent Systems का शेयर?
शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि कंपनी ने Nagarro के लिए काफी ऊंची कीमत चुकाने की पेशकश की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 25 जून के बाजार भाव के मुकाबले करीब 140% प्रीमियम देकर यह अधिग्रहण प्रस्ताव रखा गया है।
इतनी बड़ी रकम नकद (All Cash Deal) में खर्च करने से कंपनी की बैलेंस शीट, नकदी और ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने इस खबर के बाद मुनाफावसूली शुरू कर दी।
कितना गिरा शेयर?
सोमवार के कारोबार में Persistent Systems का शेयर करीब 9.8% गिरकर 4,365.50 रुपये तक पहुंच गया। सुबह बाजार खुलते ही इसमें लगातार बिकवाली देखने को मिली।
अगर पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कंपनी का शेयर करीब 27.7% का रिटर्न घटा चुका है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 इंडेक्स में लगभग 5.6% की गिरावट दर्ज हुई है। यानी कंपनी का प्रदर्शन व्यापक बाजार की तुलना में काफी कमजोर रहा है।
Nagarro डील में क्या खास है?
Persistent Systems की सहायक कंपनी Galaxy Germany Holding ने जर्मनी की आईटी कंपनी Nagarro SE के सभी शेयर खरीदने की आधिकारिक पेशकश की है।
इस प्रस्ताव के तहत Nagarro के प्रत्येक शेयर के लिए 81 यूरो नकद देने का ऑफर रखा गया है। इस कीमत के आधार पर Nagarro का कुल वैल्यूएशन करीब 1.4 अरब डॉलर बैठता है।
विश्लेषकों का कहना है कि इतनी ऊंची प्रीमियम कीमत पर अधिग्रहण करने से कंपनी को आने वाले कुछ तिमाहियों में लागत और लाभप्रदता दोनों पर दबाव झेलना पड़ सकता है।
ब्रोकरेज क्यों हैं सतर्क?
कई घरेलू और विदेशी ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि इस अधिग्रहण से शुरुआती वर्षों में:
- ऑपरेटिंग मार्जिन घट सकता है।
- प्रति शेयर आय (EPS) पर दबाव आ सकता है।
- इंटीग्रेशन कॉस्ट बढ़ सकती है।
- नकदी का बड़ा हिस्सा खर्च होगा।
इसी वजह से कुछ ब्रोकरेज ने फिलहाल स्टॉक पर ‘Neutral’ या ‘Sell’ जैसी रेटिंग बरकरार रखी है।
क्या लॉन्ग टर्म में मिल सकता है फायदा?
हालांकि बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया नकारात्मक रही, लेकिन कई एक्सपर्ट्स इसे लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजिक डील भी मान रहे हैं।
अगर Nagarro का सफलतापूर्वक इंटीग्रेशन हो जाता है तो Persistent Systems को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं।
- यूरोप में मजबूत ग्राहक आधार मिलेगा।
- AI और डिजिटल इंजीनियरिंग कारोबार का विस्तार होगा।
- बड़े एंटरप्राइज क्लाइंट्स तक पहुंच बढ़ेगी।
- ग्लोबल रेवेन्यू और मार्केट शेयर में वृद्धि हो सकती है।
यानी अल्पकाल में दबाव जरूर दिखाई दे सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह अधिग्रहण कंपनी की वैश्विक स्थिति को मजबूत बनाने वाला कदम साबित हो सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को केवल शेयर में आई गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए। अगले कुछ तिमाहियों में कंपनी की इंटीग्रेशन प्रोग्रेस, मार्जिन, ऑर्डर बुक और प्रबंधन की रणनीति पर नजर रखना अधिक महत्वपूर्ण होगा। यदि अधिग्रहण सफल रहता है तो यह भविष्य में कंपनी की ग्रोथ को नई दिशा दे सकता है, जबकि असफल इंटीग्रेशन से दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है। इसलिए फिलहाल इस स्टॉक में निवेश से पहले जोखिम और अवसर दोनों का संतुलित आकलन करना जरूरी है.


