Parle Biscuits CEO: करीब 100 साल पुरानी पारले बिस्किट्स ने पहली बार चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया है। कंपनी ने जॉर्ज कोवूर को नया CEO बनाया है। यह नियुक्ति 1 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गई है। पेप्सिको में तीन दशक से ज्यादा समय बिताने वाले कोवूर अब पारले के कारोबार को नई दिशा देने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
नई दिल्ली। पारले-जी बिस्कुट और मेलोडी टॉफी बनाने वाली कंपनी पारले बिस्किट्स ने अपने इतिहास में पहली बार CEO नियुक्त किया है। कंपनी ने जॉर्ज कोवूर (George Kovoor) को चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर बनाया है। उनकी नियुक्ति 1 सितंबर 2026 से प्रभावी है।
पारले की यह नियुक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि कंपनी करीब एक सदी से अपने पारंपरिक बिजनेस मॉडल और मजबूत ब्रांड पहचान के साथ आगे बढ़ रही है। अब बदलते कंज्यूमर ट्रेंड, पैकेज्ड फूड सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और नए बाजारों में विस्तार के बीच कंपनी ने प्रोफेशनल लीडरशिप को मजबूत करने का फैसला किया है।
1929 में हुई थी पारले की शुरुआत
पारले बिस्किट्स की कहानी करीब 100 साल पुरानी है। कंपनी की स्थापना 1929 में मुंबई के विले पार्ले इलाके में हुई थी। इसी जगह के नाम से कंपनी का नाम ‘पारले’ पड़ा।
समय के साथ पारले ने भारतीय बाजार में कई लोकप्रिय ब्रांड खड़े किए। इनमें Parle-G, Monaco, KrackJack, Hide & Seek और Melody जैसे नाम शामिल हैं। खासतौर पर पारले-जी भारत के सबसे पहचाने जाने वाले बिस्किट ब्रांडों में से एक है।
वॉल्यूम के लिहाज से पारले-जी दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले बिस्किट ब्रांडों में गिना जाता है। भारत में इसकी पहुंच छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों तक भी काफी मजबूत है।
पहली बार CEO बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
पारले का कारोबार लंबे समय से मजबूत रहा है, लेकिन पैकेज्ड फूड और FMCG सेक्टर में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। उपभोक्ताओं की पसंद भी तेजी से बदल रही है। लोग अब पारंपरिक बिस्किट के साथ-साथ प्रीमियम, हेल्थ-केंद्रित और अलग-अलग फ्लेवर वाले उत्पादों की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं।
ऐसे माहौल में कंपनी को ऐसी लीडरशिप की जरूरत महसूस हुई जो रणनीति, मार्केटिंग, कंज्यूमर बिहेवियर और बिजनेस विस्तार को एक साथ संभाल सके।
CEO की नियुक्ति से पारले को अपने अलग-अलग कारोबारों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और भविष्य की ग्रोथ रणनीति को तेजी से लागू करने में मदद मिल सकती है।
पेप्सिको में तीन दशक से ज्यादा का अनुभव
जॉर्ज कोवूर पारले से पहले PepsiCo में तीन दशक से ज्यादा समय तक काम कर चुके हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने कंज्यूमर बिजनेस और मार्केटिंग से जुड़ी कई जिम्मेदारियां संभालीं।
पेप्सिको जैसी वैश्विक FMCG कंपनी में लंबे अनुभव के कारण उन्हें बड़े ब्रांड्स को मैनेज करने, उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को समझने और प्रतिस्पर्धी बाजार में ग्रोथ हासिल करने का अच्छा अनुभव माना जाता है।
अब यही अनुभव वह पारले बिस्किट्स के कारोबार में इस्तेमाल करेंगे।
मैनेजिंग डायरेक्टर अजय चौहान ने क्या कहा?
पारले बिस्किट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय चौहान ने जॉर्ज कोवूर की नियुक्ति पर कहा कि कंपनी उनके साथ काम करने को लेकर उत्साहित है।
उन्होंने कहा कि जॉर्ज कंपनी की मजबूत नींव को आगे बढ़ाने, क्षमताओं को मजबूत करने और टिकाऊ विकास के नए अवसर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अजय चौहान के मुताबिक, भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों के साथ कंपनी का कारोबार भी लगातार बदल रहा है। ऐसे में नतीजे देने, प्रतिभाओं को विकसित करने और जटिल बाजारों को समझने की जॉर्ज की क्षमता कंपनी के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पारले का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क कितना बड़ा है?
पारले की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क माना जाता है। कंपनी का नेटवर्क भारत में 75 लाख से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स तक फैला हुआ है।
यही व्यापक पहुंच पारले-जी जैसे बड़े मास-मार्केट ब्रांड को देश के अलग-अलग हिस्सों में मजबूत बनाए रखने में मदद करती है।
कंपनी ने भारत के बाहर भी अपना कारोबार बढ़ाया है। एशिया और अफ्रीका समेत कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पारले के उत्पाद उपलब्ध हैं।
आगे कंपनी के सामने क्या चुनौती होगी?
जॉर्ज कोवूर के सामने सबसे बड़ी चुनौती पारले की मौजूदा मजबूत ब्रांड पहचान को बनाए रखते हुए कंपनी को बदलते कंज्यूमर मार्केट के लिए तैयार करना होगी।
FMCG बाजार में कंपनियां लगातार नए प्रोडक्ट, प्रीमियम पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और अलग-अलग कीमत वाले उत्पाद पेश कर रही हैं। ऐसे में पारले को भी अपने पुराने लोकप्रिय ब्रांड्स के साथ नई कैटेगरी और नए उपभोक्ता वर्गों पर ध्यान देना होगा।
इसके अलावा ग्रामीण और शहरी बाजारों में बदलती मांग, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रीमियम बिस्किट सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी कंपनी के लिए अहम मुद्दे रहेंगे।
पारले के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति?
करीब एक सदी पुराने पारले ब्रांड के लिए CEO की नियुक्ति सिर्फ एक नया पद जोड़ने का फैसला नहीं है। यह संकेत देता है कि कंपनी बदलते FMCG बाजार में अपनी अगली ग्रोथ के लिए प्रोफेशनल लीडरशिप और नई रणनीति पर जोर दे रही है।
जॉर्ज कोवूर का पेप्सिको में लंबा अनुभव पारले को कंज्यूमर इनसाइट, मार्केटिंग और बिजनेस विस्तार के मोर्चे पर नई दिशा देने में मदद कर सकता है। अब देखना होगा कि भारत के सबसे पुराने और लोकप्रिय बिस्किट ब्रांड्स में से एक पारले इस नई लीडरशिप के साथ अपनी अगली विकास यात्रा कैसे आगे बढ़ाता है।


