Stock to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अगर आप किसी बड़े और मजबूत कारोबारी समूह के शेयर पर नजर रख रहे हैं, तो रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) चर्चा में है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कंपनी के शेयर पर अपनी Buy रेटिंग बरकरार रखी है और इसके लिए ₹1,710 का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज के टारगेट के मुताबिक शेयर में मौजूदा स्तर से करीब 53 फीसदी की तेजी की संभावना बनती है।
शेयर में दिखी तेजी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 1 सितंबर को कारोबार के दौरान तेजी देखने को मिली। दोपहर करीब 1:45 बजे कंपनी का शेयर 2.04 फीसदी की बढ़त के साथ ₹1,303 के आसपास कारोबार कर रहा था। हालांकि, बाजार में उस दिन काफी उतार-चढ़ाव रहा और बाद में प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला।
जेफरीज की रिपोर्ट में रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल (O2C) कारोबार को लेकर सकारात्मक रुख देखने को मिला है। ब्रोकरेज के मुताबिक मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण दुनिया भर में रिफाइनरी वॉल्यूम प्रभावित हुआ है। इसका असर पेट्रोल और डीजल की इनवेंट्री पर भी पड़ा है।
पांच साल के निचले स्तर पर पेट्रोल-डीजल की इनवेंट्री
जेफरीज के अनुसार, ग्लोबल रिफाइनिंग वॉल्यूम में कमी आने से पेट्रोल और डीजल की इनवेंट्री पांच साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। सप्लाई से जुड़ी इस स्थिति का असर रिफाइनिंग मार्जिन पर दिखाई दे रहा है।
ब्रोकरेज का कहना है कि सिंगापुर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों के करीब बना हुआ है। अगर रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत रहता है, तो इससे रिलायंस इंडस्ट्रीज के O2C बिजनेस को फायदा मिल सकता है।
पूरे साल सप्लाई पर दबाव की उम्मीद
जेफरीज का अनुमान है कि पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पर दबाव पूरे साल बना रह सकता है। ऐसी स्थिति में रिफाइनिंग कंपनियों के मार्जिन को सपोर्ट मिल सकता है।
रिलायंस के लिए सिर्फ रिफाइनिंग मार्जिन ही सकारात्मक कारक नहीं है। ब्रोकरेज के मुताबिक मजबूत पेट्रोकेमिकल स्प्रेड्स भी कंपनी के O2C कारोबार की कमाई को सहारा दे सकते हैं। इससे वित्त वर्ष 2027 में रिलायंस के O2C बिजनेस की अर्निंग्स ग्रोथ बेहतर रहने की संभावना है।
वैल्यूएशन को लेकर भी जेफरीज का भरोसा
जेफरीज के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर अपनी लंबी अवधि की औसत वैल्यूएशन से करीब एक स्टैंडर्ड डेविएशन नीचे कारोबार कर रहा है। ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा वैल्यूएशन कंपनी के लिए बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल पेश करता है।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2029 के बीच कंपनी के EBITDA में करीब 10 फीसदी CAGR रहने का अनुमान लगाया गया है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो कंपनी की कमाई में लगातार वृद्धि शेयर के लिए लंबी अवधि में सकारात्मक संकेत हो सकती है।
34 में से 33 एनालिस्ट्स ने दी Buy रेटिंग
रिलायंस इंडस्ट्रीज को कवर करने वाले 34 एनालिस्ट्स में से 33 ने शेयर को Buy रेटिंग दी है। वहीं सिर्फ एक एनालिस्ट ने शेयर पर Sell रेटिंग दी है। यानी एनालिस्ट्स के बीच कंपनी के शेयर को लेकर काफी हद तक सकारात्मक राय बनी हुई है।
हालांकि, मजबूत ब्रोकरेज राय के बावजूद शेयर का पिछला प्रदर्शन बहुत शानदार नहीं रहा है। पिछले एक साल में रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में करीब 3.81 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं 2026 में अब तक शेयर लगभग 17 फीसदी नीचे है।
बाजार में भी जारी रहा उतार-चढ़ाव
1 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में भी काफी volatility देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत के बाद बाजार में रिकवरी आई, लेकिन दोपहर के कारोबार में एक बार फिर बिकवाली हावी हो गई।
दोपहर करीब 2 बजे निफ्टी 0.49 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा था, जबकि सेंसेक्स करीब 272 अंक यानी 0.35 फीसदी की गिरावट में था। ऐसे माहौल में रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयरों में होने वाली तेजी बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या ₹1,710 तक पहुंच सकता है रिलायंस का शेयर?
जेफरीज का ₹1,710 का टारगेट मौजूदा ₹1,303 के आसपास के स्तर से करीब 31 फीसदी ऊपर बैठता है, इसलिए दिए गए आंकड़ों के आधार पर 53 फीसदी का अपसाइड दावा मेल नहीं खाता। निवेशकों को किसी भी ब्रोकरेज टारगेट को मौजूदा शेयर भाव के साथ दोबारा मिलाकर देखना चाहिए।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए रिफाइनिंग मार्जिन, पेट्रोकेमिकल स्प्रेड्स, कच्चे तेल की कीमत, ग्लोबल सप्लाई और भू-राजनीतिक घटनाक्रम प्रमुख कारक बने रहेंगे। इसलिए केवल किसी एक ब्रोकरेज की Buy रेटिंग के आधार पर निवेश का फैसला लेने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपने जोखिम प्रोफाइल को ध्यान में रखना जरूरी है।
नोट: यह लेख उपलब्ध ब्रोकरेज राय और बाजार आंकड़ों की जानकारी पर आधारित है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है।


