नई दिल्ली। पाकिस्तान का आम उद्योग इस साल गंभीर संकट का सामना कर रहा है। दक्षिण एशिया में ‘फलों का राजा’ कहे जाने वाले आम की भरपूर पैदावार होने के बावजूद किसानों और निर्यातकों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, सीमाई बाधाओं और महंगी शिपिंग लागत ने पाकिस्तान के आम निर्यात कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है। व्यापार संगठनों का अनुमान है कि इस सीजन में आम का निर्यात करीब 30 प्रतिशत तक घट सकता है।
हाईलाइट्स
- मध्य पूर्व संकट से पाकिस्तान के आम निर्यात पर बड़ा असर।
- खाड़ी देशों को जाने वाला 80% निर्यात प्रभावित।
- शिपिंग लागत 5 गुना तक बढ़ी, व्यापारियों की चिंता बढ़ी।
- घरेलू बाजार में सस्ते दामों पर बिक रहा सिंधरी आम।
- महंगाई बढ़ने से स्थानीय मांग भी कमजोर पड़ी।
खाड़ी देशों पर निर्भर है पाकिस्तान का आम कारोबार
पाकिस्तान फ्रूट एंड वेजिटेबल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुख्य संरक्षक वहीद अहमद के मुताबिक, पाकिस्तान के कुल आम निर्यात का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों, ईरान और अफगानिस्तान जैसे बाजारों में जाता है। लेकिन इन क्षेत्रों में जारी तनाव और अनिश्चितता ने मांग को काफी कमजोर कर दिया है।
व्यापारियों का कहना है कि कई आयातकों ने नए ऑर्डर रोक दिए हैं, जबकि कुछ पुराने ऑर्डर भी स्थगित कर दिए गए हैं। इससे निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सीमा बंद होने से फंसा व्यापार
अफगानिस्तान के साथ सीमा पर व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होने से सैकड़ों ट्रक कई दिनों से फंसे हुए हैं। इससे ताजे फलों की सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। आम जैसे जल्दी खराब होने वाले फल के लिए यह स्थिति और भी नुकसानदायक साबित हो रही है।
इसके अलावा, क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण समुद्री मार्गों पर भी असर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े जोखिम के चलते शिपिंग कंपनियों ने किराया और बीमा शुल्क बढ़ा दिया है।
पांच गुना तक बढ़ गई शिपिंग लागत
निर्यातकों के अनुसार, पिछले साल जहां एक कंटेनर भेजने का खर्च करीब 1,400 डॉलर था, वहीं इस साल यह बढ़कर 6,000 से 7,000 डॉलर तक पहुंच गया है। बढ़ी हुई लागत ने पाकिस्तान के आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम प्रतिस्पर्धी बना दिया है।
हालांकि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की दिशा में कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन निर्यातकों का मानना है कि आम के मौजूदा सीजन के लिए यह राहत बहुत देर से आई है।
घरेलू बाजार में औंधे मुंह गिरे दाम
निर्यात में गिरावट का सीधा असर स्थानीय बाजारों पर दिखाई दे रहा है। बड़ी मात्रा में आम देश के भीतर ही रह जाने से बाजार में सप्लाई बढ़ गई है। कराची समेत कई शहरों में मशहूर ‘सिंधरी’ आम पिछले साल की तुलना में लगभग आधी कीमत पर बिक रहा है।
जहां पिछले वर्ष यह आम कहीं अधिक दाम पर बिक रहा था, वहीं इस बार इसकी कीमत करीब 200 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
सस्ता आम भी नहीं खरीद पा रहे लोग
दिलचस्प बात यह है कि कीमतें घटने के बावजूद आम की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रही। पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है। खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ते खर्च के कारण लोग फलों जैसी चीजों पर कम खर्च कर रहे हैं।
कई परिवारों के लिए प्राथमिकता अब जरूरी खाद्य सामग्री खरीदना है, जिसके चलते आम की घरेलू मांग भी कमजोर बनी हुई है।
किसानों और ठेकेदारों को नुकसान का डर
स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कई ठेकेदारों ने पहले किए गए खरीद समझौते रद्द कर दिए हैं। कुछ व्यापारियों ने आम के बागों के लिए दिए गए एडवांस भुगतान तक छोड़ दिए हैं ताकि बड़े नुकसान से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात बाजार जल्द सामान्य नहीं हुए और घरेलू मांग में सुधार नहीं आया, तो पाकिस्तान के आम उत्पादकों को इस सीजन में भारी आर्थिक झटका लग सकता है। किसानों, व्यापारियों और निर्यातकों की नजर अब क्षेत्रीय हालात सामान्य होने और अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार पर टिकी हुई है।


