नई दिल्ली। भारत की स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास योजनाओं को बड़ा समर्थन मिलने वाला है। एशियाई विकास बैंक (ADB) ने संकेत दिया है कि वह वर्ष 2026 में भारत के निजी क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए करीब 1 अरब डॉलर (लगभग ₹9,433 करोड़) की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा। ADB का कहना है कि भारत उसके निजी क्षेत्र के परिचालन (Private Sector Operations) के लिए लगातार सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है।
भारत पर ADB का बढ़ता भरोसा
ADB के वाइस प्रेसिडेंट (मार्केट सॉल्यूशंस) भार्गव दासगुप्ता ने बताया कि पिछले वर्ष बैंक ने भारत में सरकारी क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए अपनी पूंजी से 4 अरब डॉलर (करीब ₹37,732 करोड़) से अधिक और निजी क्षेत्र के लिए 1 अरब डॉलर से ज्यादा की फाइनेंसिंग उपलब्ध कराई थी।
उन्होंने कहा कि ADB ने अन्य स्रोतों से भी लगभग इतनी ही राशि जुटाई थी, जिसके चलते वर्ष 2025 में भारत के निजी क्षेत्र तक कुल करीब 2 अरब डॉलर का वित्तीय प्रवाह हुआ। बैंक अब इसी गति को 2026 में भी बनाए रखने की योजना बना रहा है।
किन सेक्टरों पर रहेगा फोकस?
ADB ने स्पष्ट किया है कि आने वाले वर्षों में उसका निवेश मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में केंद्रित रहेगा जो भारत के ऊर्जा परिवर्तन और सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हैं।
इन प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy)
- स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं
- ग्रीन हाइड्रोजन
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
- ग्रीन डेटा सेंटर
- शहरी अवसंरचना विकास
- टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture)
- वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion)
विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों और हरित अर्थव्यवस्था के विस्तार को मजबूती मिलेगी।
सप्लाई चेन फाइनेंसिंग में 40% उछाल
दासगुप्ता ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के कारण 2026 के शुरुआती चार महीनों में ADB की ट्रेड और सप्लाई चेन फाइनेंसिंग गतिविधियों में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि इस वित्तपोषण के माध्यम से उर्वरक, ऊर्जा उत्पादों और खाद्य वस्तुओं के आयात को समर्थन मिल रहा है, जो कई देशों की आर्थिक और खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत की ग्रीन इकोनॉमी को मिलेगा फायदा
विश्लेषकों के अनुसार ADB का यह निवेश ऐसे समय में आ रहा है जब भारत ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विस्तार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की भागीदारी से निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा और बड़े प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी।
ADB का भारत पर बढ़ता भरोसा यह संकेत देता है कि वैश्विक निवेशक देश की दीर्घकालिक विकास क्षमता और हरित अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक हैं।


