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Reading: ऑपरेशन महादेव: 93 दिन की तलाश, 250 किमी पीछा और पहलगाम हमले के आतंकियों का अंत
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ऑपरेशन महादेव: 93 दिन की तलाश, 250 किमी पीछा और पहलगाम हमले के आतंकियों का अंत

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/26 at 9:00 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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7 Min Read
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुआ आतंकी हमला देश को झकझोर देने वाली घटनाओं में शामिल था। बाइसारन (Baisaran) में निर्दोष पर्यटकों की पहचान के आधार पर की गई हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था, खुफिया तंत्र और आतंकवाद के खिलाफ रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। इसी हमले के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन महादेव—एक ऐसा अभियान जो केवल जवाबी कार्रवाई नहीं था, बल्कि न्याय दिलाने की एक लंबी और सटीक रणनीति का हिस्सा था।

Contents
पहलगाम हमला: जिसने ऑपरेशन की नींव रखीशुरुआती 24 घंटे: जब ऑपरेशन की दिशा तय हुईऑपरेशन का विस्तार: घाटी में घेरा कसनाटेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस का संयोजन93 दिन की रणनीति: कैसे सिमटा ऑपरेशननिर्णायक चरण: जुलाई 2025ऑपरेशन से क्या सीख मिलती है?1. धैर्य की रणनीति2. मल्टी-एजेंसी समन्वय3. तकनीक का बढ़ता महत्व4. भूगोल की समझक्या यह ऑपरेशन सुरक्षा रणनीति को बदलता है?निष्कर्ष

करीब तीन महीने तक चले इस ऑपरेशन में भारतीय सुरक्षा बलों ने न केवल आतंकियों को ट्रैक किया, बल्कि बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में उन्हें घेरकर मार गिराया। यह अभियान इस बात का उदाहरण बन गया कि आधुनिक तकनीक, खुफिया समन्वय और सैन्य धैर्य मिलकर किस तरह निर्णायक परिणाम दे सकते हैं।


पहलगाम हमला: जिसने ऑपरेशन की नींव रखी

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बाइसारन इलाके में पर्यटकों पर हमला किया गया। यह हमला सामान्य आतंकी घटनाओं से अलग था क्योंकि इसमें:

  • नागरिकों को पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया
  • गोलीबारी को “execution style” में अंजाम दिया गया
  • आतंकियों ने भय और संदेश दोनों देने की कोशिश की

इस हमले ने पूरे देश में गुस्सा और दुख पैदा किया। सुरक्षा बलों के लिए यह केवल एक घटना नहीं थी, बल्कि एक स्पष्ट संदेश था कि इस हमले के जिम्मेदार लोगों को हर हाल में पकड़ना या खत्म करना होगा।


शुरुआती 24 घंटे: जब ऑपरेशन की दिशा तय हुई

हमले के तुरंत बाद सेना और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। घटनास्थल पर पहुंचकर:

  • प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए गए
  • घटनाक्रम को जोड़ा गया
  • संभावित भागने के रास्तों को चिन्हित किया गया

खुफिया एजेंसियों ने HUMINT (Human Intelligence) और TECHINT (Technical Intelligence) का उपयोग करते हुए तीन आतंकियों की पहचान की:

  • सुलेमान शाह
  • हमजा अफगानी
  • जिब्रान भाई

ये सभी Lashkar-e-Taiba से जुड़े बताए गए।


ऑपरेशन का विस्तार: घाटी में घेरा कसना

शुरुआती चरण में सुरक्षा बलों का फोकस था:

  • आतंकियों के भागने के रास्ते बंद करना
  • घाटी से बाहर निकलने से रोकना

इसके बाद ऑपरेशन धीरे-धीरे दक्षिण कश्मीर के इलाकों—हापटनार, बुगमर और त्राल—तक फैल गया। आतंकियों ने ऊंचाई वाले और घने जंगलों वाले इलाकों का सहारा लिया, खासकर दाचीगाम (Dachhigam) और महादेव रिज क्षेत्र।

यह इलाका:

  • घने जंगलों से भरा हुआ
  • ऊंचाई और कठिन रास्तों वाला
  • निगरानी और मूवमेंट दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण

यही कारण था कि ऑपरेशन को तेजी से खत्म करने के बजाय रणनीतिक रूप से लंबा खींचा गया।


टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस का संयोजन

ऑपरेशन महादेव की सबसे बड़ी खासियत थी इसका multi-agency coordination। इसमें:

  • सेना
  • जम्मू-कश्मीर पुलिस
  • केंद्रीय सशस्त्र बल
  • खुफिया एजेंसियां

सभी ने मिलकर काम किया।

इस दौरान इस्तेमाल की गई तकनीक में शामिल थे:

  • ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट
  • इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर
  • रियल-टाइम सर्विलांस सिस्टम

इन साधनों की मदद से आतंकियों की हर गतिविधि पर नजर रखी गई और उन्हें लगातार दबाव में रखा गया।


93 दिन की रणनीति: कैसे सिमटा ऑपरेशन

ऑपरेशन की शुरुआत में जो क्षेत्र 300 वर्ग किलोमीटर से अधिक था, उसे धीरे-धीरे कम किया गया।

रणनीति में शामिल थे:

  • लगातार पीछा करना
  • सटीक तैनाती
  • इलाके को चरणबद्ध तरीके से घेरना

करीब 93 दिनों में:

  • ऑपरेशन का क्षेत्र घटकर 25 वर्ग किलोमीटर रह गया
  • आतंकियों के पास छिपने के विकल्प लगभग खत्म हो गए

यह एक “slow squeeze strategy” थी, जिसमें जल्दबाजी नहीं बल्कि धैर्य और सटीकता पर जोर दिया गया।


निर्णायक चरण: जुलाई 2025

10 जुलाई 2025 को मिले नए इनपुट्स के बाद ऑपरेशन अपने अंतिम चरण में पहुंचा। लिडवास, हरवान और दाचीगाम क्षेत्रों में बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई।

28 जुलाई 2025 को:

  • PARA (Special Forces) की टीम ने 10 घंटे में 3 किमी का कठिन रास्ता तय किया
  • घने जंगलों और ऊंचाई वाले इलाके में stealth approach अपनाई गई
  • सटीक और तेज कार्रवाई में तीनों आतंकियों को मार गिराया गया

इस तरह पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकियों को खत्म कर दिया गया।


ऑपरेशन से क्या सीख मिलती है?

ऑपरेशन महादेव केवल एक सैन्य सफलता नहीं है, बल्कि यह कई महत्वपूर्ण सीख देता है:

1. धैर्य की रणनीति

जल्दबाजी के बजाय लंबे समय तक दबाव बनाए रखना अधिक प्रभावी साबित हुआ।

2. मल्टी-एजेंसी समन्वय

जब अलग-अलग एजेंसियां एक साथ काम करती हैं, तो परिणाम बेहतर होते हैं।

3. तकनीक का बढ़ता महत्व

ड्रोन और सेंसर जैसी तकनीक ने ऑपरेशन को निर्णायक बनाया।

4. भूगोल की समझ

कठिन इलाकों में ऑपरेशन के लिए स्थानीय भूगोल की गहरी समझ जरूरी है।


क्या यह ऑपरेशन सुरक्षा रणनीति को बदलता है?

ऑपरेशन महादेव यह संकेत देता है कि भारत की काउंटर-टेरर रणनीति अब:

  • अधिक टेक्नोलॉजी आधारित
  • इंटेलिजेंस-ड्रिवन
  • लंबी अवधि की

हो रही है।

यह बदलाव भविष्य के ऑपरेशनों में भी देखने को मिल सकता है।


निष्कर्ष

ऑपरेशन महादेव केवल तीन आतंकियों को खत्म करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्थित और धैर्यपूर्ण रणनीति का उदाहरण है जिसमें न्याय सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया गया।

यह ऑपरेशन दिखाता है कि:

  • आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल त्वरित प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीति की मांग करती है
  • आधुनिक तकनीक और मानवीय खुफिया का संयोजन निर्णायक हो सकता है
  • और सबसे महत्वपूर्ण, ऐसे हमलों के दोषियों को अंततः जवाबदेह ठहराया जा सकता है

यह घटना न केवल सुरक्षा बलों की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में निरंतरता और सटीकता दोनों जरूरी हैं।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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