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बिजनेस न्यूज़

सरकारी तेल कंपनियों को ईंधन पर भारी घाटा, हर महीने ₹30,000 करोड़ का नुकसान; क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/27 at 8:02 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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12 Min Read
omc-loss-petrol-diesel-price-hike-india-crude-oil-middle-east-crisis-2026
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मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर जबरदस्त दबाव बढ़ता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा गया है। इसका सीधा असर सरकारी Oil Marketing Companies (OMCs) की कमाई पर पड़ रहा है।

Contents
क्यों बढ़ रहा है तेल कंपनियों का घाटा?पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या कहा?क्या होता है Under-Recovery?पेट्रोल और डीजल पर कितना नुकसान?सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कितनी राहत दी?₹14,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।किन कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर?शेयर बाजार में कितना टूटा OMC Stocks?12% से 23% तक की गिरावट दर्ज की गई है।कैसे संभालने की कोशिश कर रही हैं कंपनियां?क्या जल्द बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?मिडिल ईस्ट संकट का भारत पर कितना असर?आम लोगों पर क्या पड़ सकता है असर?LPG पर भी बढ़ रहा दबावक्या वैश्विक बाजार में और बढ़ सकती हैं कीमतें?FAQसरकारी तेल कंपनियों को कितना नुकसान हो रहा है?Under-recovery क्या होती है?किन कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर है?क्या पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं?निष्कर्षसरकार के वित्तीय संतुलन पर कितना बढ़ सकता है दबाव?क्या रुपये पर भी बढ़ सकता है दबाव?महंगाई पर कितना असर पड़ सकता है?OMCs की वित्तीय स्थिति क्यों महत्वपूर्ण है?Middle East संकट क्यों बना भारत के लिए बड़ी चिंता?क्या आगे और बढ़ सकती हैं अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें?शेयर बाजार में क्यों दबाव में हैं OMC Stocks?आने वाले दिनों में किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और LPG की बिक्री पर हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है।


क्यों बढ़ रहा है तेल कंपनियों का घाटा?

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान संकट के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी तेजी आई है।

हालांकि कई देशों ने अपने यहां पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, लेकिन भारत में खुदरा कीमतों में अब तक सीमित बदलाव ही देखने को मिला है।

विशेषज्ञों के अनुसार तेल कंपनियां महंगा crude oil खरीद रही हैं लेकिन ग्राहकों को राहत देने के लिए कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं।


पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या कहा?

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल, डीजल और LPG पर under-recovery का सामना कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि OMCs को घरेलू उड़ानों के लिए Aviation Turbine Fuel (ATF) यानी jet fuel की बिक्री पर भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

हालांकि jet fuel से जुड़े सटीक नुकसान के आंकड़े तुरंत उपलब्ध नहीं बताए गए।


क्या होता है Under-Recovery?

Under-recovery का मतलब है कि कंपनियां जिस कीमत पर ईंधन खरीद रही हैं और जिस कीमत पर उसे घरेलू बाजार में बेच रही हैं, उसके बीच बड़ा अंतर होना।

सरल शब्दों में कहें तो कंपनियां लागत से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं।

हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार under-recovery का मतलब हर बार direct cash loss नहीं होता, क्योंकि इसमें crude procurement cost और pricing structure भी शामिल होता है।


पेट्रोल और डीजल पर कितना नुकसान?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार:

  • पेट्रोल पर लगभग ₹20 प्रति लीटर तक under-recovery
  • डीजल पर लगभग ₹100 प्रति लीटर तक दबाव

बताया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार diesel pricing पर सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दे रहा है क्योंकि इसका इस्तेमाल transport और industrial sectors में बड़े स्तर पर होता है।


सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कितनी राहत दी?

सरकार ने तेल कंपनियों पर दबाव कम करने के लिए excise duty में कटौती की है।

सुजाता शर्मा के अनुसार इस फैसले से भारत सरकार पर लगभग:

₹14,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

इसके बावजूद OMCs को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है।


किन कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर?

सबसे ज्यादा दबाव सरकारी OMCs पर देखा जा रहा है:

  • इंडियन ऑयल (IOC)
  • भारत पेट्रोलियम (BPCL)
  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)

इन कंपनियों के शेयरों में भी युद्ध शुरू होने के बाद भारी गिरावट देखने को मिली है।


शेयर बाजार में कितना टूटा OMC Stocks?

रिपोर्ट्स के अनुसार 28 फरवरी से अब तक सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में लगभग:

12% से 23% तक की गिरावट दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों को डर है कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर रहने से इन कंपनियों की profitability पर बड़ा असर पड़ सकता है।


कैसे संभालने की कोशिश कर रही हैं कंपनियां?

सरकारी तेल कंपनियां retail fuel prices को स्थिर रखने के लिए कुछ दूसरे segments में कीमतें बढ़ा रही हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • Premium Petrol
  • Wholesale Diesel
  • Commercial LPG
  • International Flights के लिए ATF

विशेषज्ञों के अनुसार कंपनियां cross-subsidization के जरिए retail losses को कम करने की कोशिश कर रही हैं।


क्या जल्द बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर crude oil prices लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार और OMCs पर दबाव और बढ़ सकता है।

ऐसी स्थिति में आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


मिडिल ईस्ट संकट का भारत पर कितना असर?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित crude oil से पूरा करता है।

इसी वजह से पश्चिम एशिया में कोई भी बड़ा भू-राजनीतिक तनाव सीधे भारत की fuel economy और inflation पर असर डालता है।

विशेषज्ञों के अनुसार Hormuz Strait जैसे महत्वपूर्ण shipping routes में व्यवधान आने पर oil supply chain और अधिक प्रभावित हो सकती है।


आम लोगों पर क्या पड़ सकता है असर?

अगर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर सिर्फ fuel bill तक सीमित नहीं रहेगा।

Transport cost बढ़ने से:

  • खाद्य पदार्थ
  • सब्जियां
  • FMCG products
  • logistics services
  • online delivery

तक महंगी हो सकती हैं।


LPG पर भी बढ़ रहा दबाव

विशेषज्ञों के अनुसार LPG subsidy burden भी लगातार बढ़ रहा है।

सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए भारी सब्सिडी का बोझ उठा रही है, जिससे fiscal pressure और बढ़ सकता है।


क्या वैश्विक बाजार में और बढ़ सकती हैं कीमतें?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट तनाव और बढ़ता है या oil supply प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude oil prices फिर उछाल मार सकती हैं।

इसका असर भारत सहित कई आयातक देशों पर दिखाई दे सकता है।


FAQ

सरकारी तेल कंपनियों को कितना नुकसान हो रहा है?

OMCs को हर महीने लगभग ₹30,000 करोड़ तक का नुकसान बताया जा रहा है।

Under-recovery क्या होती है?

जब कंपनियां लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचती हैं, तो उसे under-recovery कहा जाता है।

किन कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर है?

IOC, BPCL और HPCL जैसी सरकारी कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव है।

क्या पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार crude oil prices ऊंचे रहने पर fuel price hike संभव है।


निष्कर्ष

मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव डाल दिया है। फिलहाल सरकार और OMCs आम लोगों को राहत देने के लिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन लगातार बढ़ती under-recovery लंबे समय तक टिकाऊ नहीं मानी जा रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह crude oil market और घरेलू fuel pricing दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

सरकार के वित्तीय संतुलन पर कितना बढ़ सकता है दबाव?

विशेषज्ञों के अनुसार अगर लंबे समय तक ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखा जाता है, तो इससे सरकार के fiscal deficit पर दबाव बढ़ सकता है।

पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स सरकार की कमाई का बड़ा स्रोत माने जाते हैं। ऐसे में excise duty में कटौती और बढ़ती subsidy burden का असर सरकारी राजस्व पर भी दिखाई दे सकता है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि लगातार बढ़ता fuel subsidy pressure आने वाले समय में आर्थिक संतुलन के लिए चुनौती बन सकता है।


क्या रुपये पर भी बढ़ सकता है दबाव?

विशेषज्ञों के अनुसार crude oil prices बढ़ने से भारत का import bill तेजी से बढ़ सकता है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी का असर सीधे current account deficit और रुपये की स्थिति पर पड़ सकता है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो रुपये पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।


महंगाई पर कितना असर पड़ सकता है?

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ fuel bill तक सीमित नहीं रहता।

Transport और logistics cost बढ़ने से खाने-पीने की चीजें, सब्जियां, FMCG products, ऑनलाइन डिलीवरी और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च भी बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार fuel inflation का असर धीरे-धीरे पूरी economy chain पर दिखाई देता है।


OMCs की वित्तीय स्थिति क्यों महत्वपूर्ण है?

Oil Marketing Companies देश की fuel supply chain की सबसे अहम कड़ी मानी जाती हैं।

अगर लंबे समय तक ये कंपनियां भारी under-recovery का सामना करती हैं, तो इसका असर उनके profitability, future investments और expansion plans पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि OMCs की वित्तीय स्थिरता भारत की energy security के लिए बेहद जरूरी है।


Middle East संकट क्यों बना भारत के लिए बड़ी चिंता?

भारत दुनिया के सबसे बड़े crude oil importing देशों में शामिल है।

इसी वजह से पश्चिम एशिया में कोई भी बड़ा geopolitical तनाव सीधे भारत की energy economy को प्रभावित करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार Hormuz Strait जैसे महत्वपूर्ण shipping routes में बाधा आने पर global oil supply chain पर और ज्यादा दबाव बढ़ सकता है।


क्या आगे और बढ़ सकती हैं अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर Middle East tensions और बढ़ते हैं या oil supply प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude oil prices फिर तेज उछाल मार सकती हैं।

इसका असर भारत सहित दुनिया के कई fuel importing देशों पर दिखाई दे सकता है।


शेयर बाजार में क्यों दबाव में हैं OMC Stocks?

विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों को डर है कि अगर लंबे समय तक retail fuel prices स्थिर रखी जाती हैं, तो सरकारी तेल कंपनियों की profitability पर बड़ा असर पड़ सकता है।

इसी वजह से IOC, BPCL और HPCL जैसे OMC stocks में लगातार volatility और दबाव देखने को मिल रहा है।


आने वाले दिनों में किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?

मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार आने वाले समय में बाजार की नजर इन बड़े फैक्टर्स पर बनी रहेगी:

  • Middle East tensions
  • Crude oil prices
  • डॉलर-रुपया विनिमय दर
  • भारत की fuel pricing strategy
  • OMCs की quarterly earnings
  • सरकार की tax और subsidy policy

इन्हीं फैक्टर्स के आधार पर आने वाले दिनों में fuel market और OMC stocks की दिशा तय हो सकती है।

लेटेस्ट रेट्स और मार्केट अपडेट्स के लिए NewsJagran पर आज का सोने का भाव, आज का चांदी का भाव, आज का पेट्रोल-डीजल भाव, आज का LPG रेट, CNG रेट, PNG रेट, कच्चे तेल का भाव, डॉलर-रुपया रेट और IPO GMP Today देखें।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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