नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज National Stock Exchange (NSE) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ आखिरकार हकीकत बनने की ओर बढ़ता दिख रहा है। करीब एक दशक से अधिक समय से अटका हुआ NSE IPO अगले सप्ताह बड़ा पड़ाव हासिल कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एनएसई 15 या 16 जून को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास आईपीओ के लिए शुरुआती दस्तावेज दाखिल कर सकता है।
अगर ऐसा होता है तो यह भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे चर्चित आईपीओ में से एक होगा। निवेशकों के साथ-साथ एलआईसी, एसबीआई और अन्य बड़े शेयरधारकों की भी नजर इस प्रक्रिया पर टिकी हुई है क्योंकि प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह बिक्री पेशकश (Offer For Sale – OFS) आधारित होने की संभावना है।
10 साल बाद क्यों खुला NSE IPO का रास्ता?
एनएसई ने पहली बार वर्ष 2016 में आईपीओ लाने की योजना बनाई थी। उस समय एक्सचेंज करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में था। हालांकि, को-लोकेशन विवाद और कुछ नियामकीय मुद्दों के कारण सेबी ने मंजूरी रोक दी थी।
को-लोकेशन मामला एनएसई के लिए सबसे बड़ी बाधा बन गया था। आरोप था कि कुछ ब्रोकरों को एक्सचेंज की ट्रेडिंग प्रणाली तक विशेष पहुंच मिली, जिससे उन्हें अनुचित लाभ प्राप्त हुआ। इस मामले को लेकर वर्षों तक जांच और कानूनी प्रक्रिया चलती रही।
स्थिति में बड़ा बदलाव तब आया जब एनएसई ने 2025 में सेबी के समक्ष समझौता आवेदन दाखिल किया और मामले के निपटारे के लिए 1,388 करोड़ रुपये का भुगतान करने की पेशकश की। इसके बाद जनवरी 2026 में सेबी की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिलने का रास्ता साफ हुआ और फरवरी में एनएसई बोर्ड ने आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
पूरी तरह OFS होगा IPO
सूत्रों के अनुसार यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) मॉडल पर आधारित होगा। इसका मतलब है कि एनएसई कोई नए शेयर जारी नहीं करेगा।
इसके बजाय मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। इससे कंपनी के पास नई पूंजी नहीं आएगी, बल्कि शेयर बेचने वाले निवेशकों को सीधे लाभ मिलेगा।
यही वजह है कि इस आईपीओ को लेकर एलआईसी, एसबीआई और अन्य संस्थागत निवेशकों के लिए इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
LIC और SBI को कैसे हो सकता है फायदा?
एनएसई के शेयरधारकों में कई बड़े संस्थागत निवेशक शामिल हैं। इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास है।
प्रमुख शेयरधारक
- LIC : 10.72%
- SBI और SBI Capital Markets : लगभग 7.5%
- Aranda Investments (Temasek Group)
- Canada Pension Plan Investment Board (CPPIB)
- अन्य घरेलू और विदेशी निवेशक
यदि आईपीओ में इन संस्थानों द्वारा हिस्सेदारी बेची जाती है तो उन्हें भारी पूंजीगत लाभ (Capital Gain) मिल सकता है। चूंकि अनलिस्टेड बाजार में NSE का मूल्यांकन 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है, इसलिए छोटी हिस्सेदारी की बिक्री से भी हजारों करोड़ रुपये की वैल्यू अनलॉक हो सकती है।
5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का वैल्यूएशन
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एनएसई का मूल्यांकन वर्तमान में 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो NSE IPO भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है।
तुलना करें तो कई सूचीबद्ध एक्सचेंजों की तुलना में एनएसई का कारोबार, लाभ और बाजार हिस्सेदारी कहीं अधिक है।
भारत के इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में एनएसई का दबदबा है और यह दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंजों में गिना जाता है।
1.8 लाख शेयरधारकों की नजर IPO पर
एनएसई के करीब 1.8 लाख शेयरधारक हैं। इनमें संस्थागत निवेशकों के अलावा बड़ी संख्या में व्यक्तिगत निवेशक भी शामिल हैं जिन्होंने वर्षों पहले अनलिस्टेड मार्केट में शेयर खरीदे थे।
इन निवेशकों को लंबे समय से कंपनी की लिस्टिंग का इंतजार था। आईपीओ की प्रक्रिया आगे बढ़ने से इन शेयरधारकों को अपने निवेश का वास्तविक बाजार मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
IPO की तैयारी लगभग पूरी
आईपीओ को सफल बनाने के लिए एनएसई ने व्यापक तैयारी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक्सचेंज ने लगभग 20 मर्चेंट बैंकर्स की नियुक्ति की है। इसके अलावा कानूनी सलाहकारों और अन्य मध्यस्थों को भी जोड़ा गया है।
इतने बड़े पैमाने पर की गई तैयारी यह संकेत देती है कि कंपनी आईपीओ प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है।
निवेशकों के लिए क्या है महत्व?
एनएसई भारत के वित्तीय बाजार की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। कंपनी का कारोबार सीधे शेयर बाजार गतिविधियों, ट्रेडिंग वॉल्यूम, डेरिवेटिव्स कारोबार और निवेशक भागीदारी से जुड़ा है।
विश्लेषकों का मानना है कि दस्तावेज दाखिल होने के बाद आईपीओ का आकार, मूल्यांकन, ऑफर संरचना और समयसीमा को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।
हालांकि अभी निवेशकों को डीआरएचपी (Draft Red Herring Prospectus) में दिए जाने वाले वित्तीय आंकड़ों और जोखिम कारकों का इंतजार करना होगा।
आगे क्या?
यदि एनएसई अगले सप्ताह सेबी के पास दस्तावेज दाखिल करता है तो इसके बाद नियामकीय समीक्षा की प्रक्रिया शुरू होगी। मंजूरी मिलने के बाद आईपीओ लॉन्च की तारीख घोषित की जाएगी।
करीब 10 वर्षों से लंबित इस आईपीओ को भारतीय पूंजी बाजार के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। इससे न केवल लाखों निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ेगी बल्कि एलआईसी, एसबीआई और अन्य बड़े शेयरधारकों के लिए भी वैल्यू अनलॉक होने का रास्ता खुलेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


