नई दिल्ली। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने साफ कर दिया है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद उसकी नजर सिर्फ बाजार में नंबर-1 बने रहने पर नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धियों से बड़ी बढ़त बनाए रखने पर है। कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) एवं प्रबंध निदेशक आर. दुरईस्वामी ने कहा कि LIC भविष्य में भी देश की आर्थिक प्रगति के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ेगी और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।
वर्तमान में एलआईसी जीवन बीमा क्षेत्र में करीब 60 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है। कंपनी 57 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्तियों (Assets Under Management) का प्रबंधन करती है, जबकि उसकी रियल एस्टेट संपत्तियों का मूल्य लगभग 60,000 करोड़ रुपये बताया जाता है।
देश की तरक्की से जुड़ी है LIC की विकास यात्रा
दुरईस्वामी ने कहा कि 1956 में स्थापना के बाद से एलआईसी की विकास यात्रा भारत की आर्थिक प्रगति से गहराई से जुड़ी रही है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था बढ़ती है, वैसे-वैसे एलआईसी भी मजबूत होती है और उसकी वृद्धि देश के विकास को भी गति देती है।
उन्होंने कहा कि एलआईसी ने दशकों तक राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अब ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में भी बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
CEO के मुताबिक, कंपनी का लक्ष्य सिर्फ 75वें वर्ष तक मजबूत बने रहना नहीं है, बल्कि 100वें वर्ष और उसके बाद भी देश की सबसे भरोसेमंद और मजबूत वित्तीय संस्थाओं में शामिल रहना है।
1956 में हुआ था LIC का गठन
एलआईसी की स्थापना 1 सितंबर 1956 को की गई थी। उस समय 245 भारतीय और विदेशी बीमा कंपनियों तथा भविष्य निधि संस्थाओं का राष्ट्रीयकरण करके LIC का गठन हुआ था। केंद्र सरकार ने शुरुआती पूंजी के रूप में 5 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए थे।
कंपनी का उद्देश्य जीवन बीमा को देश के दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना था। आज LIC न केवल भारत की बल्कि एशिया की सबसे बड़ी वित्तीय संस्थाओं में गिनी जाती है।
फिनटेक सेक्टर में भी उतर सकती है LIC
डिजिटल युग की जरूरतों को देखते हुए एलआईसी अब तकनीक और नवाचार पर भी बड़ा दांव लगाने की तैयारी कर रही है। दुरईस्वामी ने बताया कि कंपनी अपनी बढ़ती तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक अलग फिनटेक यूनिट स्थापित करने की संभावना पर विचार कर रही है।
यह यूनिट निवेश के जरिए किसी मौजूदा फिनटेक कंपनी में हिस्सेदारी लेकर बनाई जा सकती है या फिर एलआईसी खुद अपने स्तर पर इसे विकसित कर सकती है। इससे ग्राहकों को डिजिटल सेवाएं बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भी मजबूत है LIC
पिछले कुछ वर्षों में निजी बीमा कंपनियों की संख्या बढ़ी है और प्रतिस्पर्धा भी तेज हुई है। इसके बावजूद एलआईसी की पकड़ बाजार पर बनी हुई है। कंपनी का विशाल ग्राहक आधार, मजबूत ब्रांड वैल्यू और देशभर में फैला नेटवर्क इसे अन्य कंपनियों से अलग बनाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एलआईसी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और फिनटेक विस्तार की दिशा में सफल रहती है, तो आने वाले दशकों में भी इसकी बाजार में मजबूत स्थिति बरकरार रह सकती है।
(स्रोत: PTI)


