Nifty Trade Setup: घरेलू शेयर बाजार में हालिया कमजोरी के बीच निफ्टी के लिए 23,200–23,000 का जोन बेहद अहम सपोर्ट माना जा रहा है। अगर इंडेक्स 23,000 के नीचे फिसलता है तो बाजार में बिकवाली और तेज हो सकती है। वहीं, ऊपर की तरफ 23,500–23,600 का क्षेत्र तत्काल रेजिस्टेंस है। जब तक निफ्टी 23,600 के ऊपर टिककर बंद नहीं होता, तब तक किसी भी रिकवरी में बिकवाली का दबाव बने रहने की आशंका है।
11 सितंबर को निफ्टी 0.34 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। हालांकि, निचले स्तरों पर खरीदारी आने से इंडेक्स दिन के निचले स्तर से ऊपर बंद होने में सफल रहा। इसके बावजूद बाजार का व्यापक ट्रेंड कमजोर बना हुआ है और प्रमुख मूविंग एवरेज नीचे की दिशा में बने हुए हैं।
बाजार की धारणा पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भी दबाव रहा। क्रूड ऑयल की कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने और FOMC बैठक से पहले अमेरिकी 10-ईयर बॉन्ड यील्ड के 5 फीसदी के करीब जाने से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस
निफ्टी 50 ने 11 सितंबर को 23,398 के स्तर के आसपास कारोबार किया। तकनीकी स्तरों के लिहाज से आने वाले सत्र में कुछ प्रमुख स्तरों पर नजर रखना जरूरी होगा।
पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस:
- 23,442
- 23,493
- 23,576
पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट:
- 23,276
- 23,225
- 23,143
इसके अलावा 23,200–23,000 का क्षेत्र निफ्टी के लिए व्यापक और महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। अगर इंडेक्स इस जोन को भी निर्णायक रूप से तोड़ देता है तो कमजोरी बढ़ने की संभावना रहेगी। दूसरी ओर 23,500–23,600 के ऊपर टिकाऊ बंद बाजार में रिकवरी की बेहतर पुष्टि दे सकता है।
निफ्टी का टेक्निकल सेटअप क्या संकेत दे रहा है?
गैप-डाउन ओपनिंग के बाद निचले स्तरों से खरीदारी आने पर निफ्टी ने एक बुलिश कैंडल बनाई। हालांकि, इंडेक्स के चार्ट पर अभी भी लोअर-हाई और लोअर-लो का स्ट्रक्चर बना हुआ है। इसका मतलब है कि सिर्फ एक दिन की रिकवरी को ट्रेंड में बदलाव नहीं माना जा सकता।
अच्छी रिकवरी के लिए लगातार खरीदारी और अहम रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर टिकाव जरूरी होगा। निफ्टी अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है और ये एवरेज भी नीचे की ओर झुक रहे हैं। यह मौजूदा कमजोर ट्रेंड की ओर संकेत करता है।
टेक्निकल चार्ट पर इंडेक्स 22,182 से 24,774 तक की पिछली तेजी के 61.8 फीसदी फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल के करीब पहुंच चुका है। ऐसे में यह जोन बाजार के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट क्षेत्र बन जाता है।
डेली RSI 30 के नीचे 27.22 पर बना हुआ है। RSI का इस स्तर पर रहना बाजार में मजबूत कमजोरी को दर्शाता है, हालांकि बहुत निचला RSI कभी-कभी शॉर्ट-टर्म बाउंस की संभावना भी पैदा कर सकता है। दूसरी तरफ MACD का डाउनट्रेंड जारी रहा और रेड हिस्टोग्राम बार लगातार पांचवें सत्र में भी चौड़े हुए।
इसलिए तकनीकी संकेतकों को एक साथ देखें तो हालिया रिकवरी के बावजूद निफ्टी का व्यापक बेयरिश ट्रेंड अभी खत्म नहीं हुआ है।
बैंक निफ्टी के अहम स्तर
बैंक निफ्टी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। 11 सितंबर को बैंक निफ्टी करीब 56,607 के स्तर पर रहा।
पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस:
- 56,679
- 56,902
- 57,264
पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट:
- 55,956
- 55,732
- 55,371
फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस:
- 57,285
- 59,261
फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट:
- 55,749
- 55,050
बैंक निफ्टी का चार्ट क्या बता रहा है?
शुक्रवार को बैंक निफ्टी में गैप-डाउन ओपनिंग के बाद निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिली और इंडेक्स 0.24 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ। मई के निचले स्तर से जून के ऊंचे स्तर तक की रैली के 50 फीसदी फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आसपास इसे सपोर्ट मिला।
बैंक निफ्टी पिछले दिन के उच्चतम स्तर से ऊपर बंद हुआ, जो शॉर्ट-टर्म में सकारात्मक संकेत है। हालांकि, आगे की रिकवरी को मजबूत मानने के लिए लगातार और टिकाऊ खरीदारी जरूरी होगी।
इंडेक्स अभी भी प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है। शॉर्ट-टर्म और मीडियम-टर्म दोनों एवरेज नीचे की ओर जा रहे हैं। इससे पता चलता है कि बड़ी तस्वीर में कमजोरी अभी बरकरार है।
RSI मामूली सुधार के साथ 41.05 पर पहुंचा, लेकिन अभी भी अपनी सिग्नल लाइन के नीचे रहा। वहीं MACD जीरो लाइन से काफी नीचे बना हुआ है। लगातार आठ सत्रों तक रेड बार बढ़ने के बाद हिस्टोग्राम की कमजोरी कुछ कम हुई है।
इसलिए बैंक निफ्टी में सपोर्ट जोन से आई रिकवरी को फिलहाल ट्रेंड रिवर्सल की बजाय राहत वाली तेजी के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा।
FII और DII फंड फ्लो
विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII लगातार चौथे सत्र में नेट सेलर रहे। 11 सितंबर को उन्होंने करीब ₹930 करोड़ के शेयर बेचे।
इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने बाजार में खरीदारी जारी रखी और करीब ₹1,968 करोड़ के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों की यह खरीदारी बाजार को कुछ हद तक सपोर्ट देती दिखाई दी।
हालांकि, अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली लगातार जारी रहती है तो बाजार की रिकवरी पर दबाव बना रह सकता है।
India VIX में बढ़ी हलचल
बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला India VIX 4.15 फीसदी बढ़कर 12.285 पर पहुंच गया। यह अपने 50-दिन के EMA के ऊपर चला गया, जो बाजार में बढ़ती सावधानी का संकेत है।
अगर India VIX आगे बढ़कर 13–14 के जोन के ऊपर टिकता है तो बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है और तेजड़ियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे माहौल में अचानक तेज गिरावट और तेजी दोनों देखने को मिल सकती हैं।
निफ्टी PCR में सुधार
निफ्टी का पुट-कॉल रेशियो यानी PCR 11 सितंबर को बढ़कर 1.01 हो गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 0.77 था।
PCR में यह सुधार बाजार की धारणा में बदलाव का संकेत दे सकता है। आम तौर पर 0.7 से ऊपर और 1 के आसपास या उससे ऊपर PCR को अपेक्षाकृत सकारात्मक भावना से जोड़ा जाता है, जबकि 0.7 से नीचे जाने वाला अनुपात कमजोर सेंटीमेंट का संकेत माना जाता है।
हालांकि, किसी ट्रेडिंग निर्णय के लिए केवल PCR पर निर्भर रहना उचित नहीं है। इसे कीमत, वॉल्यूम, ओपन इंटरेस्ट और अन्य तकनीकी संकेतकों के साथ देखना जरूरी है।
F&O बैन में शामिल शेयर
F&O सेगमेंट में उन शेयरों पर प्रतिबंध लगाया जाता है जिनके डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में मार्केट-वाइड पोजीशन लिमिट का इस्तेमाल 95 फीसदी से ज्यादा हो जाता है।
F&O प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं
F&O प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:
- बंधन बैंक
- आईनॉक्स विंड
- कायन्स टेक्नोलॉजी इंडिया
- मणप्पुरम फाइनेंस
- सेल
F&O प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
मौजूदा तकनीकी सेटअप को देखते हुए निफ्टी में 23,200–23,000 का सपोर्ट जोन सबसे महत्वपूर्ण स्तरों में शामिल है। इसके ऊपर बने रहने पर इंडेक्स में राहत की तेजी देखने को मिल सकती है, लेकिन 23,000 के नीचे जाने पर बिकवाली तेज होने का जोखिम रहेगा।
ऊपर की तरफ 23,500–23,600 का क्षेत्र महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस है। निफ्टी अगर इस जोन के ऊपर टिककर बंद होता है तो बाजार में सकारात्मक धारणा मजबूत हो सकती है। इसके विपरीत, इस क्षेत्र से बार-बार बिकवाली आने पर कमजोरी बरकरार रहने की संभावना है।
कुल मिलाकर, अभी बाजार में सावधानी बरतने की जरूरत है। निफ्टी के RSI जैसे संकेतक ओवरसोल्ड स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं, इसलिए शॉर्ट-टर्म बाउंस संभव है, लेकिन जब तक अहम रेजिस्टेंस के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट नहीं मिलता, इसे मजबूत ट्रेंड रिवर्सल मानना जल्दबाजी होगी।
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