Nifty Trade Setup: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 16 सितंबर को भी दबाव का माहौल बना रह सकता है। 15 सितंबर को गैप-अप शुरुआत के बावजूद निफ्टी में तेज गिरावट देखने को मिली और इंडेक्स करीब 1.2 फीसदी टूटकर 23,119 के स्तर पर बंद हुआ। तकनीकी संकेतकों में कमजोरी और विदेशी बाजारों से मिले दबाव के बीच बाजार में सतर्कता बढ़ी है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की FOMC बैठक के नतीजों से पहले निवेशकों की सावधानी ने भी सेंटीमेंट पर असर डाला है। ऐसे माहौल में निफ्टी के सीमित दायरे में नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करने की संभावना पर नजर बनी हुई है।
निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर क्यों अहम?
ट्रेडिंग के लिहाज से निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन बना हुआ है। अगर इंडेक्स इस स्तर के नीचे टिकता है, तो तकनीकी कमजोरी और बढ़ सकती है तथा बिकवाली का दबाव तेज हो सकता है। दूसरी तरफ 23,400 से 23,500 का जोन निफ्टी के लिए प्रमुख रेजिस्टेंस क्षेत्र माना जा रहा है।
ऐसे में बाजार में किसी भी तेजी को देखते हुए ट्रेडर्स को ऊपरी स्तरों पर बिकवाली के दबाव और सपोर्ट के टूटने के बाद आने वाली कमजोरी, दोनों पर नजर रखनी होगी। हालांकि, किसी भी ट्रेडिंग रणनीति में जोखिम प्रबंधन जरूरी है और केवल एक तकनीकी संकेत के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए।
Nifty 50 के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
15 सितंबर के बंद स्तर 23,119 के आधार पर निफ्टी के लिए पिवट पॉइंट्स से जुड़े प्रमुख स्तर इस प्रकार हैं:
| स्तर | निफ्टी |
|---|---|
| रेजिस्टेंस 1 | 23,458 |
| रेजिस्टेंस 2 | 23,570 |
| रेजिस्टेंस 3 | 23,751 |
| सपोर्ट 1 | 23,096 |
| सपोर्ट 2 | 22,984 |
| सपोर्ट 3 | 22,802 |
इन स्तरों में 23,096 शुरुआती सपोर्ट के तौर पर देखा जा सकता है, जबकि 22,984 और 22,802 अगले महत्वपूर्ण सपोर्ट हैं। वहीं 23,458 के ऊपर मजबूती आने पर 23,570 और 23,751 की तरफ नजर जा सकती है।
निफ्टी के तकनीकी संकेत क्या बता रहे हैं?
डेली चार्ट पर निफ्टी ने एक लंबी बेयरिश कैंडल बनाई है। इसके साथ इंडेक्स में लोअर हाई और लोअर लो का स्ट्रक्चर बना हुआ है, जो मौजूदा कमजोरी को दर्शाता है।
निफ्टी अपने कई प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रहा है और अहम तकनीकी स्तरों से नीचे फिसल चुका है। इंडेक्स 22,183 से 24,774 तक की पिछली तेजी के 61.8 फीसदी फिबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर से भी नीचे आ गया है।
मोमेंटम इंडिकेटर RSI गिरकर 22.23 पर पहुंच गया है। उपलब्ध तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक यह मार्च 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं MACD में भी कमजोरी जारी है और रेड हिस्टोग्राम लगातार छठे सत्र में बढ़ा है। इन संकेतकों को मिलाकर देखें तो फिलहाल निफ्टी में कमजोर मोमेंटम बना हुआ है।
बैंक निफ्टी के लिए भी दबाव
बैंक निफ्टी भी 15 सितंबर के कारोबार में 1.43 फीसदी गिरकर 55,795 पर बंद हुआ। डेली टाइमफ्रेम पर इंडेक्स ने बड़ी रेड कैंडल बनाई, जबकि यह प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रहा था।
शॉर्ट और मीडियम टर्म मूविंग एवरेज भी नीचे की दिशा में बने हुए हैं। हालांकि बैंक निफ्टी मई के निचले स्तर से जून के ऊपरी स्तर तक आई तेजी के 50 फीसदी फिबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर को बचाने में सफल रहा।
RSI 33.23 तक गिर गया, जबकि MACD जीरो लाइन से नीचे बना हुआ है। रेड हिस्टोग्राम बार के गहराने से भी कमजोरी का संकेत मिल रहा है।
बैंक निफ्टी के अहम लेवल
| स्तर | बैंक निफ्टी |
|---|---|
| रेजिस्टेंस 1 | 56,654 |
| रेजिस्टेंस 2 | 56,938 |
| रेजिस्टेंस 3 | 57,397 |
| सपोर्ट 1 | 55,736 |
| सपोर्ट 2 | 55,453 |
| सपोर्ट 3 | 54,994 |
| फिबोनैचि रेजिस्टेंस | 57,285 और 59,261 |
| फिबोनैचि सपोर्ट | 55,749 और 55,050 |
FII की लगातार बिकवाली से बढ़ी चिंता
बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की बिकवाली भी दबाव बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। 15 सितंबर को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में ₹2,977 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की। यह लगातार पांचवां सत्र था, जब विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की।
इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने 15 सितंबर को ₹2,686 करोड़ की खरीदारी की। इससे घरेलू निवेशकों की ओर से बाजार को कुछ सहारा मिला, हालांकि FII आउटफ्लो अभी भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बना हुआ है।
India VIX में तेज उछाल
बाजार में अपेक्षित उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला India VIX भी बढ़ा है। 15 सितंबर को इसमें 9.34 फीसदी की तेजी आई और यह 13.43 के स्तर पर बंद हुआ। यह 24 जुलाई के बाद इसका सबसे ऊंचा क्लोजिंग स्तर बताया गया है।
VIX में तेजी का मतलब है कि बाजार में अनिश्चितता और संभावित उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्कता बढ़ी है। अगर India VIX 14 के ऊपर जाता है, तो बाजार में वोलैटिलिटी और बढ़ने की संभावना पर नजर रखनी होगी।
Nifty Put-Call Ratio में गिरावट
निफ्टी का Put-Call Ratio यानी PCR भी पिछले सत्र की तुलना में कमजोर हुआ। 15 सितंबर को PCR गिरकर 0.83 पर आ गया, जबकि पिछले सत्र में यह 1.01 था।
आम तौर पर PCR का 0.7 से ऊपर रहना या 1 के आसपास/ऊपर जाना बाजार में अपेक्षाकृत सकारात्मक sentiment से जोड़ा जाता है। वहीं 0.7 से नीचे जाने वाला PCR कमजोर sentiment का संकेत माना जाता है। हालांकि PCR को अकेले बाजार की दिशा तय करने वाला संकेतक नहीं माना जाना चाहिए।
F&O बैन में शामिल स्टॉक्स
F&O सेगमेंट में उन प्रतिभूतियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, जिनमें डेरिवेटिव पोजीशन मार्केट-वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से अधिक हो जाती है।
नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं
पहले से F&O बैन में शामिल स्टॉक:
बंधन बैंक, आईनॉक्स विंड, कायन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, मणप्पुरम फाइनेंस और सेल।
F&O बैन से बाहर हुए स्टॉक: कोई नहीं
आज ट्रेडर्स की नजर किन स्तरों पर रहेगी?
16 सितंबर के कारोबार में निफ्टी के लिए 23,000 के आसपास का सपोर्ट और 23,400–23,500 का रेजिस्टेंस जोन खास महत्व रखेगा। 23,000 के नीचे कमजोरी कायम रहने पर 22,984 और उसके बाद 22,802 के स्तरों पर नजर रहेगी। वहीं ऊपर की तरफ 23,458 के बाद 23,570 और 23,751 अगले स्तर हो सकते हैं।
बैंक निफ्टी में 55,736 और 55,453 अहम सपोर्ट हैं, जबकि 56,654 और 56,938 शुरुआती रेजिस्टेंस के तौर पर देखे जा सकते हैं। इसके साथ FII-DII फ्लो, India VIX, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेड के फैसले से जुड़े संकेत भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
Source: Moneycontrol की रिपोर्ट में दिए गए बाजार और तकनीकी आंकड़ों पर आधारित।
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