नई दिल्ली। देश में नया चीनी सत्र शुरू होने से पहले चीनी उद्योग के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। एक तरफ मौजूदा सत्र में चीनी उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कम रहने का अनुमान है, वहीं दूसरी तरफ गन्ने की बुवाई में कमी और मौसम से जुड़ी चुनौतियों ने अगले साल की चीनी उपलब्धता को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। इसका असर आगे चलकर चीनी की कीमतों पर पड़ सकता है।
चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए मिलों पर समय से पेराई शुरू करने का दबाव है। हालांकि, उद्योग की नजर अगले पेराई सत्र पर भी है, क्योंकि अक्टूबर के पहले सप्ताह तक देश में शरदकालीन गन्ने का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में करीब 43 हजार हेक्टेयर कम बताया गया है।
कई राज्यों में गन्ने का रकबा घटा
गन्ने की बुवाई में सबसे बड़ी कमी कुछ प्रमुख राज्यों में देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बिहार में करीब 30 हजार हेक्टेयर, उत्तराखंड में 20 हजार हेक्टेयर और महाराष्ट्र में करीब 14 हजार हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।
हालांकि उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में गन्ने का रकबा लगभग स्थिर रहने की बात सामने आई है। चूंकि गन्ने की बुवाई अभी जारी है, इसलिए आने वाले समय में इन आंकड़ों में बदलाव संभव है। फिर भी उद्योग स्तर पर पूरे सीजन में गन्ने के रकबे में करीब 2 फीसदी की कमी की आशंका जताई जा रही है।
कमजोर मानसून, बारिश के असमान वितरण और कई इलाकों में पानी की कमी को इसके प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।
अलनीनो से अगले साल बढ़ सकती है मुश्किल
गन्ना लंबी अवधि की फसल है। ऐसे में बुवाई के समय पानी की उपलब्धता और मौसम की स्थिति का असर अगले पेराई सत्र में दिखाई दे सकता है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे के मुताबिक अलनीनो का प्रभाव महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में गन्ने की नई बुवाई पर पड़ सकता है।
यदि इन राज्यों में पानी की कमी और प्रतिकूल मौसम की स्थिति बनी रहती है, तो अगले साल गन्ने की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर चीनी उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।
इस सीजन में भी कम चीनी उत्पादन का अनुमान
मौजूदा चीनी सत्र को लेकर भी उद्योग का अनुमान पिछले साल की तुलना में कम उत्पादन का है। संस्था के अनुमान के अनुसार इस सीजन में करीब 290 लाख टन चीनी का उत्पादन हो सकता है, जबकि पिछले सत्र में उत्पादन लगभग 309 लाख टन रहा था।
हालांकि, एथनॉल उत्पादन में चीनी के इस्तेमाल में कमी आने से घरेलू बाजार में चीनी की तत्काल उपलब्धता पर दबाव कुछ कम हो सकता है। इससे मौजूदा सत्र में आपूर्ति को संभालने में मदद मिल सकती है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक पर सबसे ज्यादा नजर
अगले साल चीनी की उपलब्धता के लिए महाराष्ट्र और कर्नाटक की स्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन राज्यों में सूखे और पानी की कमी की स्थिति गन्ने की फसल के लिए चुनौती बन सकती है।
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को देखते हुए चीनी मिलों को सामान्य समय से पहले पेराई शुरू करने की अनुमति दी गई है। इसका उद्देश्य पानी की कमी और मौसम की चुनौती बढ़ने से पहले खेतों में खड़े गन्ने की कटाई करना है।
अगर पानी की कमी के कारण गन्ने की पैदावार प्रभावित होती है, तो अगले पेराई सत्र में मिलों को पर्याप्त गन्ना मिलने में दिक्कत हो सकती है। इससे चीनी उत्पादन घटने और बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना बन सकती है।
क्या अगले साल भी महंगी रह सकती है चीनी?
चीनी की कीमत कई कारकों पर निर्भर करती है। इसमें गन्ने का उत्पादन, चीनी मिलों की पेराई, घरेलू खपत, निर्यात नीति और एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल जैसे पहलू शामिल हैं।
फिलहाल गन्ने की बुवाई पूरी नहीं हुई है, इसलिए अगले साल चीनी की कीमतों को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन मौजूदा रकबे में कमी, पानी की उपलब्धता और अलनीनो से जुड़ी मौसम संबंधी चिंताएं चीनी बाजार के लिए जोखिम जरूर बढ़ा रही हैं।
अगर अगले महीनों में मौसम सामान्य नहीं रहता और गन्ने की पैदावार अनुमान से कम होती है, तो अगले चीनी सत्र में आपूर्ति सीमित हो सकती है। ऐसी स्थिति में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं बेहतर बारिश और फसल की स्थिति इस जोखिम को कम कर सकती है।
Source: उपलब्ध उद्योग अनुमानों और रिपोर्टों पर आधारित
डिस्क्लेमर: चीनी की कीमतों से जुड़े अनुमान मौसम, उत्पादन, सरकारी नीतियों और बाजार की स्थिति के आधार पर बदल सकते हैं। इसे निवेश या खरीद-बिक्री की सलाह न माना जाए।


