जानें वह फोन कॉल जिसने US‑Israel ऑपरेशन को गति दी। Netanyahu और Trump की रणनीति, Ali Khamenei टारगेट और Middle East पर असर।
📌 क्या हुआ था?
लगभग 48 घंटे पहले कि संयुक्त US‑Israel मिलिट्री स्ट्राइक ईरान पर हुई, Israeli प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फ़ोन पर मनाया। इस कॉल ने उस ऑपरेशन का रास्ता साफ़ किया जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर आयातोल्लाह अली खमनेई को टारगेट किया गया।
☎️ फोन कॉल की खासियत
- नेतन्याहू ने ट्रम्प को बताया कि यह rare opportunity है — खमनेई और उनके वरिष्ठ अधिकारी एक साथ मौजूद थे।
- इस कॉल ने ट्रम्प को साझा मिलिट्री ऑपरेशन के लिए राज़ी किया।
- अमेरिकी और इज़राइली बलों ने इसके बाद ऑपरेशन को अंजाम दिया।
🚀 रणनीति और वैश्विक असर
- ट्रम्प शुरू में युद्ध समर्थक नहीं थे, लेकिन नेतन्याहू के साथ बातचीत ने उन्हें ऑपरेशन को मंज़ूरी देने के लिए राज़ी किया।
- संयुक्त कार्रवाई ने ईरान के टॉप नेताओं को निशाना बनाया और क्षेत्रीय तनाव बढ़ा।
- इस रणनीति ने geopolitical landscape को प्रभावित किया और तेल की कीमतों, सुरक्षा और Middle East dynamics पर असर डाला।
🔎 विश्लेषक दृष्टिकोण
विश्लेषकों के अनुसार, नेतन्याहू की कॉल ने ट्रम्प को यह विश्वास दिलाया कि संयुक्त ऑपरेशन न सिर्फ लक्ष्य पर असर डालेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और अमेरिका‑Israel गठबंधन को भी मजबूत करेगा।
📌 निष्कर्ष
48 घंटे पहले हुई वह फोन कॉल वैश्विक राजनीति और सुरक्षा रणनीति के लिए निर्णायक साबित हुई। इसने US‑Israel के बीच सहयोग और ईरान के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन को संभव बनाया।
➡️ निवेशक और विश्लेषक इसे geopolitical turning point मानते हैं।
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Author: Namam Sharma
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Namam Sharma NewsJagran में बिज़नेस और फाइनेंस खबरों को कवर करते हैं।
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