AI Jobs in India: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन को लेकर दुनिया भर में यह बहस तेज है कि क्या आने वाले समय में मशीनें इंसानों की नौकरियां छीन लेंगी। इस बीच इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि ने भारत के रोजगार बाजार को लेकर बड़ा दृष्टिकोण पेश किया है। उनका कहना है कि AI का सबसे बड़ा असर बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों पर पड़ेगा, जहां ऑटोमेशन के कारण नौकरियां कम हो सकती हैं। वहीं दूसरी ओर, छोटे व्यवसाय, स्टार्टअप और उद्यमी आने वाले वर्षों में देश में रोजगार सृजन का सबसे बड़ा आधार बनेंगे।
NCAER इंडिया पॉलिसी फोरम 2026 को संबोधित करते हुए नंदन नीलेकणि ने कहा कि AI आधारित अर्थव्यवस्था में भारत को रोजगार पैदा करने के अपने पारंपरिक मॉडल में बदलाव करना होगा। अब केवल कुछ बड़ी कंपनियों से लाखों नौकरियां मिलने की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।
बड़ी कंपनियों में क्यों बढ़ेगा ऑटोमेशन?
नीलेकणि के अनुसार, बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों की कार्यप्रणाली पहले से ही काफी व्यवस्थित और प्रोसेस आधारित होती है। ऐसे संगठनों में अधिकांश जॉब रोल तय प्रक्रियाओं और दोहराए जाने वाले कार्यों पर आधारित होते हैं।
यही कारण है कि AI के लिए इन कार्यों को सीखना और ऑटोमेट करना अपेक्षाकृत आसान है। जैसे-जैसे AI अधिक सक्षम होगा, कंपनियां कई प्रक्रियाओं में मानव श्रम की जगह ऑटोमेशन का इस्तेमाल बढ़ा सकती हैं। इसका असर नई भर्ती पर भी पड़ सकता है और कई क्षेत्रों में कर्मचारियों की संख्या घट सकती है।
छोटे बिजनेस बनेंगे रोजगार का सबसे बड़ा आधार
नंदन नीलेकणि का मानना है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल स्मॉल बिजनेस इकोसिस्टम है। उन्होंने कहा कि भविष्य में रोजगार कुछ बड़ी कंपनियों से नहीं बल्कि लाखों छोटे उद्यमों से आएगा।
उनके मुताबिक,
“देश की प्रगति तब होगी जब 10 लाख छोटी कंपनियां हर एक व्यक्ति को रोजगार देंगी।”
उन्होंने अनुमान जताया कि भारत में स्टार्टअप्स की संख्या मौजूदा लगभग 1.5 लाख से बढ़कर 2035 तक 10 लाख के करीब पहुंच सकती है। छोटे व्यवसायों का काम अक्सर स्थानीय जरूरतों, ग्राहकों और अलग-अलग परिस्थितियों पर आधारित होता है, जिन्हें पूरी तरह AI से बदलना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि भविष्य में सबसे ज्यादा रोजगार इसी सेक्टर से मिलने की संभावना है।
AI के दौर में छोटे कारोबारियों के लिए तीन बड़े सुझाव
नीलेकणि ने छोटे उद्यमियों और स्टार्टअप्स को मजबूत बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
1. अत्यधिक नियमों से राहत
उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारियों पर जरूरत से ज्यादा रेगुलेशन और इंस्पेक्टर राज का बोझ नहीं होना चाहिए। आसान नियम नए व्यवसायों को तेजी से बढ़ने में मदद करेंगे।
2. आसान फंडिंग और बाजार तक पहुंच
उनका मानना है कि RBI के Account Aggregator फ्रेमवर्क और ONDC जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म छोटे कारोबारियों को आसानी से ऋण, पूंजी और नए ग्राहकों तक पहुंच दिला सकते हैं। इससे छोटे व्यवसायों का विस्तार तेज होगा और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
3. पोर्टेबल सोशल सिक्योरिटी
नीलेकणि ने कहा कि भविष्य में लोग एक ही कंपनी में 30-40 साल तक नौकरी नहीं करेंगे। गीग इकोनॉमी और फ्रीलांसिंग बढ़ने के साथ कर्मचारी लगातार नौकरी बदलेंगे। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ व्यक्ति के साथ जुड़े रहने चाहिए, न कि किसी एक कंपनी के साथ।
भारत के रोजगार मॉडल को बदलने की जरूरत
उन्होंने कहा कि AI के दौर में भारत को केवल पारंपरिक नौकरी मॉडल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। रोजगार सृजन का केंद्र छोटे व्यवसाय, स्टार्टअप, डिजिटल उद्यमिता और स्थानीय उद्योग बनने वाले हैं। यदि सरकार छोटे कारोबारियों के लिए नियम सरल बनाए, सस्ती पूंजी उपलब्ध कराए और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करे, तो AI से पैदा होने वाली चुनौतियों के बीच भी भारत बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर सकता है।
AI से खतरा भी, अवसर भी
विशेषज्ञों का मानना है कि AI कुछ पारंपरिक नौकरियों को जरूर प्रभावित करेगा, लेकिन साथ ही नए कौशल, नई तकनीकों और नए व्यवसायों की मांग भी पैदा करेगा। ऐसे में आने वाले वर्षों में सबसे अधिक लाभ उन लोगों और कंपनियों को मिलेगा जो तेजी से नई तकनीक अपनाने और बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को तैयार करने में सफल होंगे।


