नई दिल्ली: भारत और एशिया के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शामिल Mukesh Ambani एक बार फिर चर्चा में हैं। इसकी वजह उनकी संपत्ति में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि यह तथ्य है कि उन्होंने लगातार छह वर्षों से अपनी कंपनी से कोई वेतन नहीं लिया है। वित्त वर्ष 2020-21 से लेकर 2025-26 तक मुकेश अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज से सैलरी, भत्ते, स्टॉक ऑप्शन, रिटायरमेंट बेनिफिट और अन्य किसी भी प्रकार का पारिश्रमिक स्वीकार नहीं किया। दिलचस्प बात यह है कि इसी अवधि में Reliance Industries का कारोबार और मुनाफा लगातार बढ़ता रहा। ऐसे में आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल उठता है कि अगर मुकेश अंबानी वेतन नहीं लेते हैं तो उनकी कमाई कैसे होती है? आखिर उनकी अरबों डॉलर की संपत्ति का स्रोत क्या है? क्या केवल ₹15 करोड़ की सैलरी से कोई दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल हो सकता है? आइए विस्तार से समझते हैं।
छह साल से नहीं लिया कोई वेतन
कोरोना महामारी के दौरान जब देश और दुनिया आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे थे, तब मुकेश अंबानी ने अपनी सैलरी छोड़ने का फैसला किया था। यह कदम उन्होंने कंपनी और कर्मचारियों के हित को ध्यान में रखते हुए उठाया था। रिलायंस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक उन्होंने कंपनी से किसी प्रकार का वेतन या अन्य वित्तीय लाभ स्वीकार नहीं किया। इससे पहले भी उनका वेतन कई वर्षों तक सीमित रखा गया था।
कितनी थी मुकेश अंबानी की सैलरी?
मुकेश अंबानी का वार्षिक वेतन लंबे समय तक ₹15 करोड़ पर सीमित रहा। वित्त वर्ष 2008-09 से उन्होंने अपने वेतन को इसी स्तर पर कैप कर रखा था। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज का कारोबार कई गुना बढ़ गया। कंपनी का बाजार पूंजीकरण, राजस्व और मुनाफा लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंचता रहा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने वेतन में कोई वृद्धि नहीं की। यानी जिस समय कई कॉरपोरेट कंपनियों के शीर्ष अधिकारी वेतन बढ़ा रहे थे, उसी समय मुकेश अंबानी लगभग 12 वर्षों तक एक ही वेतन संरचना पर बने रहे और बाद में उसे पूरी तरह छोड़ दिया।
फिर आखिर कमाई कैसे होती है?
यहीं पर अधिकांश लोग भ्रमित हो जाते हैं। किसी अरबपति की संपत्ति उसकी सैलरी से नहीं, बल्कि उसकी हिस्सेदारी और निवेश से बनती है। मुकेश अंबानी की आय का सबसे बड़ा स्रोत रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनकी हिस्सेदारी है। जब कंपनी का शेयर मूल्य बढ़ता है तो उनकी कुल संपत्ति भी बढ़ जाती है। इसी वजह से शेयर बाजार में तेजी आने पर उनकी नेटवर्थ अरबों रुपये बढ़ जाती है और गिरावट आने पर कम भी हो सकती है। यानी उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा “पेपर वेल्थ” यानी शेयरों के मूल्य पर आधारित होता है।
डिविडेंड से होती है करोड़ों की कमाई
मुकेश अंबानी और उनके परिवार की रिलायंस इंडस्ट्रीज में बड़ी हिस्सेदारी है। जब कंपनी मुनाफा कमाती है तो वह अपने शेयरधारकों को डिविडेंड यानी लाभांश देती है। यही लाभांश उनकी नियमित आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। उदाहरण के तौर पर, यदि कंपनी ₹6 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित करती है और किसी निवेशक के पास करोड़ों शेयर हैं, तो उसे करोड़ों रुपये की आय केवल लाभांश से मिल सकती है। रिलायंस द्वारा घोषित डिविडेंड के आधार पर मुकेश अंबानी को हर वर्ष करोड़ों रुपये का लाभांश प्राप्त होता है। यही कारण है कि वेतन न लेने के बावजूद उनकी आय प्रभावित नहीं होती।
सैलरी और नेटवर्थ में क्या अंतर है?
बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि किसी व्यक्ति की कमाई और उसकी कुल संपत्ति एक ही चीज होती है, जबकि ऐसा नहीं है। सैलरी (Salary) वह राशि है जो किसी व्यक्ति को नौकरी या पद के बदले नियमित रूप से मिलती है। नेटवर्थ (Net Worth) किसी व्यक्ति की कुल संपत्ति का मूल्य होती है, जिसमें शेयर, निवेश, अचल संपत्ति, व्यवसाय और अन्य परिसंपत्तियां शामिल होती हैं। मुकेश अंबानी के मामले में उनकी नेटवर्थ का अधिकांश हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज और अन्य निवेशों में निहित है। इसलिए वेतन न लेने से उनकी कुल संपत्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता।
दुनिया के कई अरबपति भी नहीं लेते बड़ी सैलरी
मुकेश अंबानी अकेले ऐसे उद्योगपति नहीं हैं जिन्होंने कम या सीमित वेतन लेने का रास्ता चुना है। दुनिया के कई बड़े कारोबारी जैसे Elon Musk और Mark Zuckerberg भी प्रतीकात्मक या बेहद सीमित वेतन लेते रहे हैं। इनकी वास्तविक संपत्ति का स्रोत भी उनकी कंपनियों में हिस्सेदारी और शेयरों का मूल्य है। यही मॉडल बड़े उद्योगपतियों को पारंपरिक वेतनभोगी कर्मचारियों से अलग बनाता है।
रिलायंस का बढ़ता कारोबार बना संपत्ति का आधार
रिलायंस इंडस्ट्रीज आज ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, रिटेल, दूरसंचार और डिजिटल सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों में सक्रिय है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने न केवल अपने कारोबार का विस्तार किया है बल्कि नए क्षेत्रों में भी बड़े निवेश किए हैं। विशेष रूप से डिजिटल कारोबार और ग्रीन एनर्जी सेक्टर पर कंपनी का फोकस बढ़ा है। कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का सीधा असर उसके शेयर मूल्य पर पड़ता है, जिससे प्रमोटर परिवार की संपत्ति में भी वृद्धि होती है।
लाखों लोगों को रोजगार देती है रिलायंस
रिलायंस केवल भारत की सबसे बड़ी निजी कंपनियों में से एक नहीं है, बल्कि देश के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में भी शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने एक लाख से अधिक नई भर्तियां कीं। इसके बाद 31 मार्च 2026 तक कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर लगभग 4.20 लाख हो गई। इसके अलावा गुजरात के जामनगर में विकसित हो रहे धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स से आने वाले वर्षों में लगभग दो लाख अतिरिक्त रोजगार अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या है सीख?
मुकेश अंबानी का उदाहरण यह बताता है कि दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण केवल वेतन पर निर्भर नहीं करता। शेयर बाजार, व्यवसाय में हिस्सेदारी और दीर्घकालिक निवेश किसी व्यक्ति की वित्तीय स्थिति को कहीं अधिक मजबूत बना सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया के सबसे अमीर लोगों की संपत्ति का बड़ा हिस्सा उनके व्यवसायों और निवेशों से आता है, न कि मासिक वेतन से।
निष्कर्ष
मुकेश अंबानी ने पिछले छह वर्षों से रिलायंस इंडस्ट्रीज से कोई वेतन नहीं लिया है। इसके बावजूद उनकी संपत्ति में लगातार वृद्धि होती रही है क्योंकि उनकी आय का मुख्य स्रोत कंपनी में हिस्सेदारी, शेयरों का मूल्य और लाभांश है। यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि बड़े उद्योगपतियों की संपत्ति का आधार वेतन नहीं बल्कि व्यवसायिक स्वामित्व और दीर्घकालिक निवेश होते हैं। रिलायंस के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और विस्तार योजनाओं को देखते हुए आने वाले वर्षों में भी मुकेश अंबानी की संपत्ति और प्रभाव दोनों बढ़ते रहने की संभावना है।
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