US Tariff Refunds: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन के कुछ टैरिफ को गैर-कानूनी करार दिए जाने के बाद भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने टैरिफ के तहत वसूली गई ड्यूटी लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक भारतीय कारोबारियों से जुड़े मामलों में 1 अरब डॉलर (करीब ₹9,567 करोड़) से अधिक की राशि वापस की जा चुकी है। इसका सबसे बड़ा फायदा टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी और सीफूड सेक्टर को मिल रहा है।
भारतीय एक्सपोर्टर्स को मिलने लगा टैरिफ रिफंड
रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय एक्सपोर्टरों ने पुष्टि की है कि अमेरिकी आयातकों के जरिए उन्हें टैरिफ रिफंड का लाभ मिलना शुरू हो गया है। यह रिफंड अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) द्वारा जारी किया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि जिन भारतीय कंपनियों ने अमेरिका को सामान निर्यात किया था और जिनके उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था, वे अब अपने अमेरिकी पार्टनर्स के माध्यम से इस राशि का लाभ प्राप्त कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को बताया था गैर-कानूनी
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एकतरफा वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं था।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टैक्स लगाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने की संवैधानिक शक्ति अमेरिकी कांग्रेस के पास है। इसी फैसले के बाद उन टैरिफ के तहत वसूली गई ड्यूटी वापस करने का रास्ता साफ हुआ।
किन सेक्टरों को मिला सबसे ज्यादा फायदा?
भारत के जिन उद्योगों पर अतिरिक्त टैरिफ का सबसे अधिक असर पड़ा था, उन्हें अब राहत मिलने लगी है।
मुख्य प्रभावित सेक्टरों में शामिल हैं:
- टेक्सटाइल उद्योग
- जेम्स एंड ज्वेलरी
- फ्रोजन सीफूड
- अन्य मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक टैरिफ लागू रहने के दौरान भारत ने अमेरिका को करीब 72 अरब डॉलर का निर्यात किया था। इनमें अकेले फ्रोजन सीफूड का निर्यात लगभग 2 अरब डॉलर और टेक्सटाइल का निर्यात 1 अरब डॉलर से अधिक था।
ट्रंप प्रशासन ने कब लगाए थे टैरिफ?
अप्रैल 2025 में ट्रंप प्रशासन ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था।
- शुरुआती अतिरिक्त टैरिफ: 26%
- बाद में कुछ भारतीय उत्पादों पर बढ़ाकर: 50% तक
इन शुल्कों की वजह से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हुई और कई निर्यातकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ गया।
क्या भारतीय कंपनियां सीधे रिफंड ले सकती हैं?
इसका जवाब नहीं है।
अमेरिकी नियमों के अनुसार रिफंड केवल उस पक्ष को मिलता है जिसे “Importer of Record” कहा जाता है। यानी अमेरिका में वह आयातक जिसने वास्तव में कस्टम ड्यूटी जमा की थी।
इसका मतलब है कि:
- भारतीय एक्सपोर्टर सीधे CBP से रिफंड नहीं मांग सकते।
- उन्हें अपने अमेरिकी आयातक या बिजनेस पार्टनर पर निर्भर रहना होगा।
- यदि दोनों पक्षों के बीच व्यावसायिक समझौता है, तभी भारतीय कंपनी तक रिफंड की राशि पहुंचती है।
दुनिया भर में कितना रिफंड जारी हुआ?
CBP के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 29 जून तक दुनिया भर में लगभग 71 अरब डॉलर के टैरिफ रिफंड की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी। हालांकि एजेंसी देशवार आंकड़े सार्वजनिक नहीं करती।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे कई देशों के निर्यातकों को राहत मिली है।
रिफंड पाने के लिए क्या करना होगा?
रिफंड का दावा करने के लिए अमेरिकी आयातक को:
- पात्र आयात लेनदेन (Import Transactions) की पहचान करनी होगी।
- आवश्यक कस्टम दस्तावेज जमा करने होंगे।
- शुल्क भुगतान का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा।
- अधिकृत कस्टम ब्रोकर या Importer of Record के माध्यम से आवेदन करना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार स्वीकार किए गए अधिकांश दावों का निपटारा लगभग 90 दिनों के भीतर किया जा सकता है।
सभी भारतीय एक्सपोर्टर्स को बराबर फायदा नहीं
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि हर भारतीय कंपनी को समान मात्रा में रिफंड नहीं मिल रहा है।
इसके पीछे कई कारण हैं:
- टैरिफ का बोझ किसने उठाया था।
- अमेरिकी आयातक और भारतीय निर्यातक के बीच हुआ व्यावसायिक समझौता।
- पुराने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें।
- दोनों पक्षों के बीच लागत साझा करने का तरीका।
कई मामलों में अमेरिकी आयातकों ने पूरी राशि भारतीय कंपनियों को लौटानी शुरू कर दी है, जबकि कुछ मामलों में केवल आंशिक भुगतान किया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि रिफंड क्लेम करते समय पूरी दस्तावेजी प्रक्रिया का पालन करना बेहद जरूरी है। गलत जानकारी या अधूरे रिकॉर्ड की स्थिति में दावा खारिज भी हो सकता है।
व्यवसायों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि:
- सभी कस्टम घोषणाएं सही हों।
- आयात दस्तावेज पूरे हों।
- केवल अधिकृत Importer of Record या कस्टम ब्रोकर के माध्यम से दावा किया जाए।
भारतीय निर्यातकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
अमेरिकी बाजार भारत के सबसे बड़े निर्यात गंतव्यों में से एक है। ऐसे में अतिरिक्त टैरिफ हटने और पुरानी ड्यूटी वापस मिलने से भारतीय निर्यातकों की लागत कम होगी, नकदी प्रवाह (Cash Flow) बेहतर होगा और अमेरिका में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत हो सकती है।


