Fake Cigarette Factory: नकली दूध, मावा, पनीर और दवाओं के बाद अब नकली सिगरेट बनाने का मामला सामने आया है। मेरठ में पुलिस ने एक ऐसी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जहां कथित तौर पर एक बड़े ब्रांड की नकली सिगरेट तैयार की जा रही थी। पुलिस के मुताबिक, यह कारोबार करीब छह महीने से चल रहा था और हर दिन लाखों रुपये का नकली माल बाजार में भेजा जा रहा था।
नई दिल्ली: देश में नकली और मिलावटी उत्पादों को लेकर अक्सर कार्रवाई की खबरें सामने आती हैं। नकली दूध और मावा से लेकर पनीर और दवाओं तक कई तरह के फर्जीवाड़े पकड़े जा चुके हैं। अब इस सूची में सिगरेट का नाम भी जुड़ गया है। मेरठ में पुलिस ने नकली सिगरेट बनाने वाली एक फैक्ट्री का खुलासा किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेरठ के हस्तिनापुर इलाके के दूधली खादर गांव में एक पुरानी स्कूल बिल्डिंग के अंदर कथित तौर पर नकली सिगरेट तैयार की जा रही थी। यहां एक बड़े सिगरेट ब्रांड के नाम और पैकेजिंग जैसी दिखने वाली नकली सिगरेट बनाई जा रही थी।
पुरानी स्कूल बिल्डिंग में चल रहा था कारोबार
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने संबंधित कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलकर फैक्ट्री पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकली सिगरेट और उसे तैयार करने वाली मशीनें बरामद की गईं।
बताया जा रहा है कि बरामद नकली सिगरेट की कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये थी, जबकि लगभग 50 लाख रुपये की मशीनें भी मौके से मिलीं। मामले में दिल्ली के कारोबारी रवि किशोर को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी ने कुछ स्थानीय युवकों के साथ मिलकर स्कूल की पुरानी बिल्डिंग किराए पर ली थी। इसके बाद वहां कथित तौर पर नकली सिगरेट बनाने का काम शुरू किया गया। पुलिस के मुताबिक, यह गतिविधि करीब छह महीने से चल रही थी।
कंबोडिया से आता था कच्चा माल, राजस्थान से तंबाकू
पुलिस के अनुसार, नकली सिगरेट तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाला कुछ कच्चा माल कंबोडिया से मंगाया जाता था, जबकि तंबाकू राजस्थान से लाया जा रहा था।
तैयार नकली सिगरेट को केवल मेरठ तक सीमित नहीं रखा जाता था। पुलिस के मुताबिक, इसकी सप्लाई उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों में की जा रही थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए रोजाना करीब 50 लाख रुपये का नकली माल बाजार में भेजे जाने का अनुमान है।
बड़े ब्रांड के नाम का कथित तौर पर इस्तेमाल
जिस कंपनी के ब्रांड की नकली सिगरेट बनाए जाने की बात सामने आई है, उसके पोर्टफोलियो में Gold Flake, Classic, Navy Cut, India Kings और Insignia जैसे ब्रांड शामिल हैं।
ऐसे मामलों में नकली उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग को इस तरह तैयार किया जाता है कि आम ग्राहक के लिए असली और नकली उत्पाद के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि नकली सामान का कारोबार न केवल कंपनियों के लिए चुनौती बनता है, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी चिंता का विषय है।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लिए मजे
मेरठ में नकली सिगरेट की फैक्ट्री पकड़े जाने की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ यूजर्स ने इस मामले को लेकर व्यंग्य किया।
एक यूजर ने लिखा, ‘जहर तो शुद्ध लेने दो।’
वहीं, एक अन्य यूजर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में शायद ही ऐसा कोई लोकप्रिय ब्रांड या प्रोडक्ट बचा हो, जिसकी नकल बाजार में न मिलती हो। यूजर ने यह भी कहा कि कई बार नकली उत्पादों की कॉपी इतनी बारीकी से की जाती है कि आम ग्राहक के लिए असली और नकली की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
नकली सिगरेट से बढ़ती चिंता
नकली सिगरेट का कारोबार सिर्फ ब्रांड की नकल और टैक्स चोरी का मामला नहीं है। उपभोक्ता के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि ऐसी सिगरेट में इस्तेमाल होने वाले तंबाकू, कागज, फिल्टर और अन्य सामग्री की गुणवत्ता की कोई भरोसेमंद गारंटी नहीं होती।
मेरठ में हुई कार्रवाई ने एक बार फिर दिखाया है कि नकली उत्पादों का नेटवर्क कितना व्यापक हो सकता है। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस कथित नेटवर्क से जुड़े और कितने लोग हैं और नकली सिगरेट की सप्लाई का नेटवर्क किन-किन इलाकों तक फैला हुआ था।


