Market View: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 21 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ ट्रेड करते नजर आए। हालांकि, बाजार के सामने क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में दोबारा आई तेजी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में बाजार में एकतरफा तेजी की संभावना फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड के करीब 94 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में फिर से तेजी आने से भारतीय बाजार पर दबाव बना रह सकता है। उनके मुताबिक कुछ लार्ज-कैप शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग निफ्टी की तेजी को सीमित कर सकती है।
सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली बढ़त
21 अगस्त को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बीच भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ नजर आए। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 44 अंक या 0.06% की बढ़त के साथ 77,582 के आसपास था। वहीं निफ्टी करीब 10 अंक या 0.04% चढ़कर 24,242 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
बाजार की ब्रेड्थ फिलहाल पॉजिटिव दिखाई दे रही है। निफ्टी में कोटक महिंद्रा बैंक, HDFC बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, हिंडाल्को और पावर ग्रिड कॉर्प जैसे शेयरों में मजबूती रही। दूसरी ओर ग्रासिम इंडस्ट्रीज, TCS, टाइटन कंपनी, अपोलो हॉस्पिटल्स और इंटरग्लोब एविएशन दबाव में नजर आए।
ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में मामूली कमजोरी रही, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 0.75% की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। इससे संकेत मिलता है कि चुनिंदा मिड और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी अभी बनी हुई है।
क्रूड ऑयल और बॉन्ड यील्ड बनी बाजार की बड़ी चिंता
वीके विजयकुमार का मानना है कि हाल की तेजी के बाद बाजार में आगे और मजबूती बने रहने की संभावना सीमित हो सकती है। इसकी प्रमुख वजह ब्रेंट क्रूड की कीमतों का करीब 94 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए क्रूड की कीमतों में लगातार तेजी से देश के इंपोर्ट बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि ऊंचे क्रूड प्राइस भारतीय इक्विटी बाजार के लिए एक अहम जोखिम बने हुए हैं।
इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी भी उभरते बाजारों के लिए चुनौती बन सकती है। अमेरिकी यील्ड बढ़ने पर विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी एसेट्स अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इसका असर भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेश के प्रवाह पर पड़ सकता है।
लार्ज-कैप शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग का दबाव
विजयकुमार के मुताबिक कुछ लार्ज-कैप शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिल सकती है। पिछले कुछ समय में कई बड़े शेयरों में तेजी के बाद निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं, जिससे निफ्टी पर दबाव बढ़ सकता है।
लार्ज-कैप बैंकिंग शेयरों में भी फिलहाल पूरी तरह मजबूत तेजी दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार के सभी हिस्सों में कमजोरी है। बेहतर फंडामेंटल्स और संस्थागत खरीदारी के कारण ब्रॉडर मार्केट में तेजी का रुझान कायम रह सकता है।
DIIs और FIIs की खरीदारी, कंपनियों के बेहतर होते फंडामेंटल्स और चुनिंदा सेक्टरों में मजबूत मांग बाजार को सपोर्ट देने वाले कारक हैं।
NBFC शेयरों में मजबूती के संकेत
बड़े बैंकिंग शेयरों पर दबाव के बावजूद NBFC सेक्टर को लेकर तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई दे रही है। विजयकुमार के मुताबिक मजबूत फंडामेंटल्स और तकनीकी संकेतों के कारण NBFCs की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
निवेशकों को इस सेक्टर में शेयर चुनते समय केवल शॉर्ट टर्म तेजी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। कंपनी की एसेट क्वालिटी, लोन ग्रोथ, नेट इंटरेस्ट मार्जिन और क्रेडिट कॉस्ट जैसे आंकड़ों पर भी नजर रखना जरूरी है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों में खरीदारी
डिजिटल प्लेटफॉर्म सेक्टर में भी मजबूती देखने को मिल रही है। डिलीवरी-बेस्ड खरीदारी और शेयरों में एक्युमुलेशन इस सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।
डिलीवरी-बेस्ड खरीदारी का मतलब है कि निवेशक केवल इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए शेयर नहीं खरीद रहे हैं, बल्कि उन्हें अपने पोर्टफोलियो में कुछ समय तक रखने की भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अगर यह ट्रेंड कायम रहता है तो चुनिंदा डिजिटल कंपनियों में आगे भी मजबूती देखने को मिल सकती है।
फार्मा और CDMO शेयरों पर भी नजर
ऊंचे वैल्यूएशन के बावजूद फार्मा और CDMO शेयरों में खरीदारी जारी है। ग्लोबल हेल्थकेयर डिमांड, एक्सपोर्ट संभावनाओं और भारतीय फार्मा कंपनियों की मजबूत मौजूदगी के कारण इस सेक्टर पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
हालांकि, ऊंचे वैल्यूएशन को देखते हुए निवेशकों को शेयरों का चयन सावधानी से करना चाहिए। मजबूत कमाई, ऑर्डर बुक और भविष्य की ग्रोथ वाले शेयर अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं।
क्रूड महंगा रहा तो बाजार रह सकता है रेंज-बाउंड
मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक जब तक क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तब तक भारतीय शेयर बाजार के रेंज-बाउंड रहने की संभावना है। यानी निफ्टी में किसी एक दिशा में तेज और टिकाऊ मूवमेंट के बजाय एक सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
ऐसे बाजार में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेड लेने के बजाय अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
निफ्टी पर क्या है रणनीति?
सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार के मुताबिक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 24,266-24,297/24,319 के जोन में है। इसके ऊपर अगला बड़ा रेजिस्टेंस 24,346-24,377 के स्तर पर देखा जा रहा है।
वहीं नीचे की तरफ निफ्टी के लिए पहला बेस 24,110-24,153 के बीच है। इसके टूटने पर अगला बड़ा बेस 23,981-24,061 के जोन में माना जा रहा है।
इसका मतलब है कि निफ्टी के लिए 24,300 के आसपास का जोन अहम रहेगा। इस स्तर के ऊपर टिकाऊ मजबूती बाजार में सकारात्मक सेंटीमेंट को बढ़ा सकती है, जबकि सपोर्ट जोन टूटने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
बैंक निफ्टी के अहम स्तर
बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 57,639-57,721 के स्तर पर बताया गया है। इसके ऊपर बड़ा रेजिस्टेंस 57,927-58,088 के जोन में है।
वहीं नीचे की तरफ पहला बेस 57,189-57,321 के बीच है। अगर यह सपोर्ट टूटता है तो बैंक निफ्टी के लिए अगला महत्वपूर्ण बेस 56,931-57,040 के जोन में रहेगा।
इसलिए बैंकिंग इंडेक्स में ट्रेड करने वाले निवेशकों के लिए इन स्तरों पर नजर रखना जरूरी है।
इन दो शेयरों पर भी रखें नजर
टेक्निकल चार्ट के आधार पर राजेश सातपुते ने कुछ शेयरों में ट्रेडिंग के अवसर बताए हैं। उनके मुताबिक प्रीमियर एनर्जीज के फ्यूचर्स में 1,020 रुपये के स्टॉप लॉस के साथ 1,080 रुपये के लक्ष्य के लिए खरीदारी की रणनीति बताई गई है।
इसके अलावा डिक्शन टेक के फ्यूचर्स में 14,500 रुपये के स्टॉप लॉस के साथ 15,250-15,500 रुपये के लक्ष्य के लिए खरीदारी की सलाह दी गई है।
इन स्तरों को ट्रेडिंग रणनीति के तौर पर देखा जाना चाहिए। फ्यूचर्स ट्रेडिंग में जोखिम अधिक होता है और बाजार की दिशा बदलने पर नुकसान भी तेजी से बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
मौजूदा बाजार परिस्थितियों को देखते हुए निवेशकों को एकतरफा तेजी या गिरावट की बजाय सेक्टर और स्टॉक सिलेक्शन पर अधिक ध्यान देना चाहिए। क्रूड ऑयल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और घरेलू संस्थागत खरीदारी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर रहेंगे।
लार्ज-कैप शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद NBFC, डिजिटल प्लेटफॉर्म, फार्मा और CDMO जैसे चुनिंदा सेक्टरों में मजबूती बनी हुई है। ऐसे में कमजोर शेयरों के बजाय मजबूत फंडामेंटल और बेहतर तकनीकी सेटअप वाले शेयरों पर नजर रखना ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
कुल मिलाकर, जब तक क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंचे स्तरों पर बनी रहती हैं, निफ्टी में सीमित दायरे में कारोबार और उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। ऐसे बाजार में सपोर्ट-रेजिस्टेंस के साथ-साथ ग्लोबल संकेतों पर नजर रखना निवेशकों के लिए अहम रहेगा।
Disclaimer
NewsJagran.in पर दिए गए विचार और ट्रेडिंग रणनीतियां संबंधित एक्सपर्ट के निजी विचार हैं। ये निवेश की सलाह नहीं हैं। किसी भी शेयर या फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में निवेश अथवा ट्रेडिंग करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है और पिछले प्रदर्शन से भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होती।


