भारत में पिछले दो महीनों के दौरान महंगाई ने आम लोगों की जेब पर जबरदस्त असर डाला है। पेट्रोल-डीजल, LPG, CNG, दूध, खाने का तेल, मसाले और यहां तक कि सोना-चांदी तक की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है। इसकी सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में जारी संघर्ष, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होना और वैश्विक ऊर्जा संकट माना जा रहा है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 40 फीसदी कच्चा तेल और 80 से 90 फीसदी गैस खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर पड़ता है। पिछले दो महीनों में यही देखने को मिला है।
पेट्रोल-डीजल से शुरू हुई महंगाई की मार
15 मई 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल करीब 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया।
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और सप्लाई संकट के कारण यह फैसला लेना पड़ा। पिछले कुछ महीनों से ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जिससे भारत का इंपोर्ट बिल तेजी से बढ़ा है।
ईंधन की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जी, फल, दूध, किराना और FMCG प्रोडक्ट्स की लागत भी बढ़ जाती है। यही वजह है कि अब महंगाई धीरे-धीरे हर सेक्टर में दिखाई देने लगी है।
2 महीने में क्या-क्या हुआ महंगा?
नीचे उन प्रमुख चीजों की पूरी लिस्ट दी गई है जिनकी कीमतों में मार्च से मई 2026 के बीच बड़ा उछाल आया है।
| वस्तु | कितना महंगा हुआ | पुरानी कीमत | नई कीमत |
|---|---|---|---|
| पेट्रोल | ₹3.14 प्रति लीटर | ₹94.63 | ₹97.77 |
| डीजल | ₹3.11 प्रति लीटर | ₹87.56 | ₹90.67 |
| अमूल दूध | ₹2 प्रति लीटर | ₹55 | ₹57 |
| मदर डेरी दूध | ₹2 प्रति लीटर | ₹56 | ₹58 |
| CNG | ₹2 प्रति किलो | ₹77 | ₹79 |
| घरेलू LPG सिलेंडर | ₹60 | ₹853 | ₹913 |
| कमर्शियल LPG | ₹993+ की बढ़ोतरी | ₹2078 | ₹3071.50 |
| PNG गैस | ₹1.70 प्रति SCM | ₹47.90 | ₹49.59 |
| इंडस्ट्रियल डीजल | ₹22-28 | ₹90-95 | ₹109 |
| प्रीमियम पेट्रोल | ₹5 तक | ₹95-100 | ₹101-105 |
दूध से लेकर खाने के तेल तक सब महंगा
ईंधन महंगा होने के बाद अब खाद्य सामग्री की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। अमूल और मदर डेरी ने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसके अलावा मसाले, तेल और चायपत्ती जैसी रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो चुकी हैं।
खाद्य सामग्री के बढ़े दाम
| सामान | पुराने दाम | नए दाम |
|---|---|---|
| मूंगफली | ₹160/kg | ₹200/kg |
| सूखा धनिया | ₹180/kg | ₹220/kg |
| लाल मिर्च | ₹300/kg | ₹350/kg |
| हल्दी पाउडर | ₹210/kg | ₹250/kg |
| जीरा | ₹300/kg | ₹360/kg |
| चायपत्ती | ₹500/kg | ₹545/kg |
| रिफाइंड ऑयल | ₹135/L | ₹148/L |
| सरसों तेल | ₹170/L | ₹190/L |
| चावल | ₹60-120/kg | ₹70-130/kg |
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है क्योंकि ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत लगातार ऊपर जा रही है।
LPG और गैस ने बढ़ाई घरेलू बजट की टेंशन
घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत मार्च से अब तक 60 रुपये बढ़ चुकी है। वहीं कमर्शियल सिलेंडर में लगभग 1000 रुपये तक का उछाल आया है। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों पर भी दिखाई देने लगा है।
5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमतों में भी लगातार तीन बार बढ़ोतरी हुई है। कई शहरों में यह सिलेंडर 600 से 800 रुपये तक पहुंच चुका है।
PNG और CNG की कीमतें बढ़ने से अब घरों के साथ-साथ ऑटो, टैक्सी और कैब सेवाओं की लागत भी बढ़ने लगी है। आने वाले दिनों में Ola-Uber और लोकल ट्रांसपोर्ट किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
FMCG कंपनियां भी बढ़ा सकती हैं कीमतें
ऊर्जा संकट का असर अब FMCG सेक्टर पर भी पड़ने लगा है। कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ रही है। ऐसे में कई कंपनियां या तो कीमतें बढ़ा सकती हैं या फिर प्रोडक्ट्स का वजन कम कर सकती हैं।
उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक पैकेजिंग लागत बढ़ रही है, माल ढुलाई महंगी हो गई है, बिजली और ईंधन खर्च बढ़ा है, कच्चे माल की कीमतें ऊपर जा रही हैं इन कारणों से आने वाले महीनों में बिस्कुट, स्नैक्स, साबुन, शैंपू और अन्य FMCG प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं।
तांबा और एल्युमीनियम भी रिकॉर्ड स्तर पर
महंगाई सिर्फ ईंधन और खाने-पीने तक सीमित नहीं है। इंडस्ट्रियल मेटल्स में भी बड़ी तेजी आई है। तांबा और एल्युमीनियम कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुके हैं।
मई 2026 में लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तांबे की कीमत 14,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से ऊपर पहुंच गई। भारत में तांबा 1300-1400 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बिक रहा है।
वहीं एल्युमीनियम की कीमतें 3600 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच गई हैं। भारत में इसका रेट 370-385 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है।
इन धातुओं के महंगे होने का असर इलेक्ट्रॉनिक्स, वायरिंग, ऑटोमोबाइल, निर्माण क्षेत्र, बिजली उपकरण जैसे सेक्टरों पर दिखाई दे सकता है।
सोना-चांदी पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी
सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। प्लैटिनम पर भी ड्यूटी बढ़ाई गई है। इस फैसले का मकसद विदेशी मुद्रा बचाना और बढ़ते इंपोर्ट बिल को नियंत्रित करना माना जा रहा है। हालांकि इससे ज्वेलरी और कीमती धातुओं की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।
इस साल जनवरी में MCX पर सोना 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 4,07,456 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। हालांकि बाद में दोनों धातुओं में करेक्शन देखने को मिला।
आम जनता पर क्या होगा असर?
महंगाई का यह दौर सिर्फ कुछ समय की परेशानी नहीं माना जा रहा। अगर मध्य पूर्व संकट जल्द खत्म नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में:
- ट्रांसपोर्ट महंगा हो सकता है
- फ्लाइट टिकट महंगे हो सकते हैं
- खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं
- FMCG कंपनियां MRP बढ़ा सकती हैं
- होटल और रेस्टोरेंट खर्च बढ़ सकते हैं
सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और कम आय वाले परिवारों पर पड़ सकता है क्योंकि उनकी मासिक आय का बड़ा हिस्सा ईंधन और खाद्य खर्च में जाता है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव जारी रहा और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, तो भारत में महंगाई और बढ़ सकती है। सरकार फिलहाल सप्लाई बनाए रखने और विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य हुए बिना राहत मिलना मुश्किल माना जा रहा है।
ऐसे में आने वाले महीनों में आम लोगों को अपने घरेलू बजट में और ज्यादा दबाव महसूस हो सकता है।
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