Jharkhand Protest: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र पिछले 16 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार को छात्रों ने विधानसभा मार्च का आह्वान किया। मार्च से पहले विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने और कंटीले तारों से बैरिकेडिंग किए जाने को लेकर छात्र नेता देवेंद्र महतो ने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
देवेंद्र महतो ने विधानसभा के आसपास की गई बैरिकेडिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ प्रशासन दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें विधानसभा तक जाने से रोकने के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
विधानसभा के आसपास कंटीले तारों से बैरिकेडिंग
रांची में सोमवार को प्रस्तावित विधानसभा मार्च से पहले पुरानी झारखंड विधानसभा के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर बढ़ने से रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। कंटीले तार लगाए जाने को लेकर छात्र नेता देवेंद्र महतो ने नाराजगी जताई।
महतो ने कहा, “विधानसभा के चारों ओर कंटीले तार लगाकर बैरिकेडिंग की गई है। हम इससे बहुत नाराज हैं। यह पाकिस्तान, बांग्लादेश या चीन नहीं है, यह झारखंड है और हम यहां के छात्र नेता हैं।”
उनका कहना है कि छात्रों का आंदोलन लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। ऐसे में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
’16 दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं छात्र’
छात्र नेता ने कहा कि आंदोलन को 16 दिन हो चुके हैं और इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने शांति बनाए रखने की कोशिश की है। इसके बावजूद विधानसभा मार्च से पहले प्रशासन की ओर से जिस तरह की तैयारी की गई, उससे छात्र संगठनों में नाराजगी है।
देवेंद्र महतो ने आरोप लगाया कि प्रशासन छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे वे किसी बाहरी खतरे का हिस्सा हों। उन्होंने कहा कि छात्र सिर्फ अपनी भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, “हम पिछले 16 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। विधानसभा तक हमारे मार्च को रोकने के लिए हमारे साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।”
महतो ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के आंदोलन से डर रही है और इसी वजह से विधानसभा के आसपास कड़ी पाबंदियां लगाई गई हैं।
छात्र नेता ने सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
विधानसभा की सुरक्षा को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए देवेंद्र महतो ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
महतो ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को विधानसभा तक पहुंचने से रोकने के लिए जिस तरह की व्यवस्था की गई है, वह लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने सरकार के रवैये की तुलना ब्रिटिश शासन के दौर से करते हुए कहा कि छात्रों के साथ “अंग्रेजों से भी बुरा बर्ताव” किया जा रहा है।
हालांकि, अपने बयान में महतो ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की कार्रवाई या रोक के बावजूद छात्र आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने की कोशिश करेंगे।
उन्होंने कहा, “चाहे प्रशासन कंटीले तार लगाए, गोलियां चलाए या लाठियां बरसाए, हमारा विरोध शांतिपूर्ण ही रहेगा। हम संविधान का सम्मान करते हैं। हालात हमें राज्य विधानसभा तक पहुंचने से नहीं रोक सकते।”
‘क्रांति और बदलाव का दिन’ बताया विधानसभा मार्च
देवेंद्र महतो ने सोमवार को होने वाले विधानसभा मार्च को छात्रों के आंदोलन के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने छात्रों और समर्थकों से बड़ी संख्या में मार्च में शामिल होने की अपील की।
महतो ने आरोप लगाया कि प्रशासन प्रदर्शनकारियों को विधानसभा मार्च में शामिल होने से रोकने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर रास्ते में छात्रों को किसी तरह की परेशानी या प्रशासनिक रोक का सामना करना पड़े तो उन्हें संयम बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी स्थिति में हिंसा या टकराव का रास्ता नहीं अपनाया जाए और आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
‘प्रशासन से न टकराएं, दूसरा रास्ता अपनाएं’
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ देवेंद्र महतो ने बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने प्रदर्शनकारियों से प्रशासन के साथ टकराव से बचने की अपील भी की।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन किसी रास्ते पर प्रदर्शनकारियों को रोकता है तो वे किसी दूसरे रास्ते से शांतिपूर्वक आगे बढ़ने की कोशिश करें। उनका जोर इस बात पर रहा कि आंदोलन के दौरान किसी तरह की हिंसा या कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।
महतो ने कहा, “अगर प्रशासन आपको रोकने की कोशिश करता है तो कोई दूसरा रास्ता अपनाएं और शांतिपूर्वक विधानसभा तक पहुंचें।”
इस अपील से साफ है कि छात्र नेता आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखते हुए अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
राजनीतिक और धार्मिक रंग न देने की अपील
छात्र आंदोलन को लेकर देवेंद्र महतो ने राजनीतिक दलों और अन्य संगठनों को भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य छात्रों की मांगों को सरकार के सामने रखना है और किसी भी राजनीतिक या धार्मिक मुद्दे को इसमें शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने राजनीतिक समूहों से अपील की कि वे छात्रों के आंदोलन का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए न करें। महतो ने कहा कि आंदोलन का फोकस सिर्फ भर्ती परीक्षाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, “किसी को भी इस विरोध प्रदर्शन का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए या इसे धार्मिक रंग नहीं देना चाहिए। कृपया केवल छात्रों की मांगों पर ध्यान दें।”
JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर क्या है छात्रों की मांग?
झारखंड में चल रहा यह छात्र आंदोलन मुख्य रूप से JPSC और JSSC की ओर से आयोजित भर्ती परीक्षाओं को लेकर है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों की ओर से परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में संबंधित परीक्षाओं को रद्द करना और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराना शामिल है। छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, क्योंकि हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य इन परीक्षाओं से जुड़ा होता है।
छात्रों का आरोप है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते हैं तो सरकार और संबंधित भर्ती आयोगों को उनकी शिकायतों की गंभीरता से जांच करनी चाहिए। इसी मांग को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
विधानसभा मार्च से बढ़ा सियासी दबाव
छात्रों के विधानसभा मार्च के ऐलान के बाद झारखंड सरकार और प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ गई है। विधानसभा जैसे संवेदनशील क्षेत्र के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करना प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था के लिहाज से जरूरी माना जा सकता है, लेकिन छात्रों का कहना है कि उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए अत्यधिक सख्ती नहीं होनी चाहिए।
यही मुद्दा अब छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच तनाव का प्रमुख कारण बनता दिखाई दे रहा है। एक तरफ छात्र अपनी मांगों को सीधे सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं, वहीं प्रशासन विधानसभा परिसर और आसपास सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
देवेंद्र महतो के बयानों से यह भी स्पष्ट है कि छात्र नेतृत्व फिलहाल आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने पर जोर दे रहा है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से प्रशासन के साथ टकराव से बचने और किसी भी उकसावे की स्थिति में संयम बनाए रखने की अपील की है।
आगे क्या?
JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन अब दो सप्ताह से ज्यादा समय से जारी है। विधानसभा मार्च के बाद सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत या आंदोलन के अगले चरण को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल छात्रों की मुख्य मांग परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और संबंधित परीक्षाओं को लेकर ठोस कार्रवाई की है। दूसरी ओर, विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग को लेकर छात्र नेता देवेंद्र महतो के बयान ने आंदोलन को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और आंदोलन को समाप्त करने के लिए प्रशासन तथा छात्र प्रतिनिधियों के बीच कोई बातचीत होती है या नहीं।


