नई दिल्ली: आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन शुरू हो चुका है और करोड़ों टैक्सपेयर्स अपने टैक्स की सही गणना करने में जुटे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए ITR भरने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि पिछले साल केंद्र सरकार ने इनकम टैक्स सिस्टम में कौन-कौन से बदलाव किए थे और उनका आपकी टैक्स देनदारी पर क्या असर पड़ेगा।
यूनियन बजट 2025 में सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए। सरकार का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल बनाना, टैक्स दरों को तर्कसंगत बनाना और मध्यम वर्ग को राहत देना था। यही वजह है कि अब अधिकांश वेतनभोगी और छोटे कारोबारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुराना टैक्स रिजीम चुनें या नया?
बजट 2025 का सबसे बड़ा बदलाव
बजट 2025 में सबसे चर्चित घोषणा यह रही कि नए टैक्स रिजीम में प्रभावी रूप से ₹12 लाख तक की वार्षिक आय पर टैक्स नहीं देना पड़ेगा, बशर्ते करदाता निर्धारित शर्तों के तहत मिलने वाली Section 87A की रिबेट का लाभ लेने के पात्र हों।
वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा जारी रहने से यह प्रभावी सीमा लगभग ₹12.75 लाख तक पहुंच सकती है। इससे लाखों सैलरीड कर्मचारियों की टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है।
FY 2025-26 के लिए नए टैक्स रिजीम के स्लैब
सरकार ने नए टैक्स रिजीम को सात स्लैब में विभाजित किया है ताकि अलग-अलग आय वर्ग के लोगों को कम टैक्स दरों का लाभ मिल सके।
| वार्षिक आय | टैक्स दर |
|---|---|
| ₹0 – ₹4 लाख | 0% |
| ₹4 – ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 – ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 – ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 – ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 – ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से अधिक | 30% |
इस व्यवस्था का उद्देश्य टैक्स प्रणाली को अधिक सरल और पारदर्शी बनाना है ताकि करदाताओं को कम जटिलता का सामना करना पड़े।
पुराने टैक्स रिजीम में क्या मिलता है?
पुराना टैक्स सिस्टम आज भी लागू है और इसमें कई तरह की टैक्स छूट एवं कटौतियों (Deductions) का लाभ मिलता है। यदि कोई करदाता नियमित रूप से टैक्स सेविंग निवेश करता है, तो यह विकल्प कई मामलों में बेहतर साबित हो सकता है।
पुराने टैक्स स्लैब इस प्रकार हैं—
| वार्षिक आय | टैक्स दर |
|---|---|
| ₹0 – ₹2.5 लाख | 0% |
| ₹2.5 – ₹5 लाख | 5% |
| ₹5 – ₹10 लाख | 20% |
| ₹10 लाख से अधिक | 30% |
हालांकि इसमें टैक्स दरें अपेक्षाकृत अधिक हैं, लेकिन इसके बदले कई महत्वपूर्ण छूट उपलब्ध रहती हैं।
पुराने टैक्स रिजीम में मिलने वाली प्रमुख छूट
यदि आप पुराना टैक्स सिस्टम चुनते हैं, तो आपको कई लोकप्रिय टैक्स बेनिफिट्स मिल सकते हैं, जैसे—
- धारा 80C के तहत निवेश पर छूट
- NPS में निवेश पर अतिरिक्त लाभ
- HRA (हाउस रेंट अलाउंस)
- होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट
- मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम (Section 80D)
- शिक्षा ऋण के ब्याज पर राहत
- अन्य निर्धारित टैक्स डिडक्शन
इन्हीं सुविधाओं के कारण अधिक निवेश करने वाले करदाताओं के लिए पुराना सिस्टम अब भी उपयोगी माना जाता है।
नया टैक्स रिजीम क्यों हो रहा है लोकप्रिय?
सरकार लगातार नए टैक्स रिजीम को डिफॉल्ट विकल्प के रूप में बढ़ावा दे रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इसमें टैक्स की गणना काफी आसान है और अधिकांश लोगों को अलग-अलग निवेश या दस्तावेजों की चिंता नहीं करनी पड़ती।
इसके प्रमुख फायदे हैं—
- कम टैक्स दरें
- सरल टैक्स कैलकुलेशन
- कम कागजी प्रक्रिया
- स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ
- मध्यम आय वर्ग के लिए अधिक राहत
हालांकि इसमें अधिकांश टैक्स छूट और डिडक्शन उपलब्ध नहीं होते।
नया बनाम पुराना टैक्स रिजीम: किसे चुनें?
दोनों टैक्स सिस्टम की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। सही विकल्प पूरी तरह आपकी आय, निवेश और टैक्स प्लानिंग पर निर्भर करता है।
नया टैक्स रिजीम बेहतर हो सकता है यदि—
- आपकी आय लगभग ₹12 लाख तक है।
- आप 80C या अन्य टैक्स सेविंग योजनाओं में ज्यादा निवेश नहीं करते।
- आप सरल और कम जटिल टैक्स व्यवस्था चाहते हैं।
पुराना टैक्स रिजीम बेहतर हो सकता है यदि—
- आप EPF, PPF, ELSS या जीवन बीमा में नियमित निवेश करते हैं।
- आपको HRA, होम लोन और अन्य डिडक्शन का लाभ मिलता है।
- आपकी टैक्स बचत योग्य कटौतियां काफी अधिक हैं।
ITR फाइल करने से पहले क्या करें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ITR दाखिल करने से पहले दोनों टैक्स रिजीम में अपनी टैक्स देनदारी की अलग-अलग गणना जरूर करें। कई ऑनलाइन टैक्स कैलकुलेटर भी उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से आप आसानी से तुलना कर सकते हैं कि किस विकल्प में आपकी टैक्स बचत अधिक होगी।
यदि आपकी कुल कटौतियां सीमित हैं और टैक्स सेविंग निवेश कम है, तो नया टैक्स रिजीम अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है। वहीं जिन लोगों के पास पर्याप्त डिडक्शन और टैक्स बचाने वाले निवेश हैं, उनके लिए पुराना टैक्स सिस्टम अभी भी बेहतर विकल्प बन सकता है।
निष्कर्ष
बजट 2025 के बाद इनकम टैक्स सिस्टम में हुए बदलावों ने नए टैक्स रिजीम को पहले से कहीं अधिक आकर्षक बना दिया है। ₹12 लाख तक की प्रभावी आय पर टैक्स राहत, आसान टैक्स स्लैब और सरल प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में करदाता नए सिस्टम की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय लेने से पहले अपनी आय, निवेश और उपलब्ध टैक्स छूट का विस्तृत विश्लेषण करना जरूरी है। सही टैक्स रिजीम का चुनाव न केवल आपकी टैक्स देनदारी कम करेगा बल्कि भविष्य की वित्तीय योजना को भी मजबूत बनाएगा।
FAQs
प्रश्न: क्या ₹12 लाख तक की आय पर पूरी तरह टैक्स नहीं देना होगा?
उत्तर: नए टैक्स रिजीम में निर्धारित शर्तों के तहत Section 87A की रिबेट मिलने पर प्रभावी रूप से ₹12 लाख तक की आय पर टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है।
प्रश्न: सैलरीड कर्मचारियों को क्या अतिरिक्त फायदा मिलता है?
उत्तर: ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के कारण वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए प्रभावी टैक्स-फ्री आय लगभग ₹12.75 लाख तक पहुंच सकती है।
प्रश्न: कौन-सा टैक्स रिजीम चुनना चाहिए?
उत्तर: यदि आपके पास अधिक टैक्स सेविंग निवेश और डिडक्शन हैं तो पुराना टैक्स रिजीम बेहतर हो सकता है। यदि निवेश कम है और आसान टैक्स व्यवस्था चाहते हैं तो नया टैक्स रिजीम अधिक उपयुक्त हो सकता है।


