Gift Nifty Indicator: भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार, 17 अगस्त की शुरुआत कमजोर रह सकती है। ग्लोबल मार्केट से मिले मिले-जुले संकेतों और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच GIFT निफ्टी में कमजोरी देखने को मिली। सुबह 7:45 बजे GIFT निफ्टी 33 अंक या 0.14 फीसदी की गिरावट के साथ 24,398 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इससे संकेत मिल रहा है कि निफ्टी 50 की शुरुआत सपाट से लेकर हल्की कमजोरी के साथ हो सकती है।
पिछले कारोबारी सत्र में भी घरेलू बाजार दबाव में रहा था। शुक्रवार को निफ्टी 50 लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। मेटल, ऑटो और IT शेयरों में बिकवाली ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया। अब नए सप्ताह की शुरुआत में निवेशकों की नजर ग्लोबल संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी।
GIFT निफ्टी से क्या संकेत मिल रहे हैं?
GIFT निफ्टी भारतीय शेयर बाजार के शुरुआती रुझान का एक अहम संकेतक माना जाता है। सोमवार सुबह इसमें 33 अंकों की कमजोरी दिखाई दी और यह 24,398 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। यह संकेत देता है कि बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान बियर्स यानी मंदड़ियों का दबाव रह सकता है।
हालांकि, GIFT निफ्टी में मामूली गिरावट को देखकर पूरे दिन बाजार की दिशा तय नहीं की जा सकती। घरेलू बाजार खुलने के बाद बैंकिंग, IT, ऑटो, मेटल और अन्य प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी या बिकवाली के आधार पर बाजार की चाल बदल सकती है।
शुक्रवार को कैसा रहा था भारतीय बाजार?
पिछले सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी रही। सेंसेक्स 70.71 अंक या 0.09 फीसदी गिरकर 78,009.25 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 29.85 अंक या 0.12 फीसदी की गिरावट रही और इंडेक्स 24,366 के स्तर पर बंद हुआ।
निफ्टी की गिरावट का सिलसिला लगातार चौथे कारोबारी सत्र तक जारी रहा। बाजार में खासतौर पर मेटल, ऑटो और IT शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। ऐसे में सोमवार को निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निफ्टी 24,400 के आसपास मजबूती दिखाता है या फिर 24,200 के सपोर्ट की तरफ बढ़ता है।
एशियाई बाजारों में भी सुस्ती
सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों में भी कोई मजबूत सकारात्मक संकेत नहीं दिखा। निवेशक मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में किसी ठोस प्रगति की कमी ने बाजार की चिंता बढ़ाई है।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य नहीं होने के कारण सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई की चिंता पर पड़ सकता है।
जापान के बाहर एशिया-प्रशांत शेयरों का MSCI इंडेक्स लगभग सपाट रहा। जापान का निक्केई 225 करीब 0.4 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा था, जबकि ऑस्ट्रेलिया का बेंचमार्क इंडेक्स करीब 0.3 फीसदी कमजोर था। दक्षिण कोरियाई बाजार सार्वजनिक अवकाश के कारण बंद रहे।
दूसरी ओर, अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में हल्की बढ़त देखी गई। S&P 500 फ्यूचर्स करीब 0.1 फीसदी और Nasdaq फ्यूचर्स लगभग 0.2 फीसदी ऊपर रहे। EURO STOXX 50 फ्यूचर्स में भी करीब 0.2 फीसदी की बढ़त थी।
कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए अहम संकेत
भारतीय शेयर बाजार के लिए इस समय कच्चे तेल की कीमतें एक महत्वपूर्ण जोखिम बनी हुई हैं। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 88.55 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहा। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड मामूली गिरावट के साथ करीब 82.26 डॉलर प्रति बैरल पर था।
पिछले सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमत में लगभग 6 फीसदी की तेजी आई थी, जबकि WTI क्रूड करीब 5.4 फीसदी चढ़ा था। तेल की कीमतों में यह तेजी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता से जुड़ी है।
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। इसलिए अगर क्रूड की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो इसका असर देश के आयात बिल, रुपये, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि शेयर बाजार के निवेशक फिलहाल तेल की चाल को काफी करीब से देख रहे हैं।
वॉल स्ट्रीट से भी नहीं मिले मजबूत संकेत
शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। S&P 500 अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से नीचे आ गया। निवेशकों ने उम्मीद से कमजोर रिटेल बिक्री के आंकड़ों का आकलन किया।
शुक्रवार के कारोबार में S&P 500 में 0.17 फीसदी की गिरावट रही। Nasdaq Composite 0.28 फीसदी और Dow Jones Industrial Average 0.20 फीसदी नीचे बंद हुए।
अमेरिकी बाजारों में यह कमजोरी ऐसे समय आई है जब पिछले कुछ समय में अमेरिकी इक्विटी में मजबूत तेजी देखने को मिली थी। इसलिए सोमवार को भारतीय बाजार के लिए ग्लोबल इक्विटी संकेत पूरी तरह सकारात्मक नहीं माने जा रहे हैं।
निफ्टी के लिए 24,200 का स्तर अहम
तकनीकी स्तरों की बात करें तो बजाज ब्रोकिंग के मुताबिक निफ्टी के 24,200 से 24,700 के दायरे में कंसोलिडेट करने की संभावना है। निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24,200 पर है। इसके नीचे 24,000 और फिर 23,800 के स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन हो सकते हैं।
वहीं, ऊपर की तरफ 24,700 के आसपास रेजिस्टेंस देखा जा सकता है। अगर निफ्टी इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल होता है तो बाजार में तेजी की धारणा मजबूत हो सकती है।
दूसरी ओर, 24,200 के नीचे कमजोरी बढ़ने पर 24,000 और 23,800 के स्तरों की तरफ दबाव देखने को मिल सकता है।
हाल के कारोबार में निफ्टी में Lower Highs और Lower Lows का पैटर्न दिखाई दे रहा है। इसलिए बाजार में मजबूत तेजी की वापसी के लिए इस पैटर्न का टूटना महत्वपूर्ण होगा।
FII और DII की खरीदारी से बाजार को मिला सपोर्ट
घरेलू बाजार में संस्थागत निवेशकों की गतिविधि भी सोमवार के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। 14 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII नेट बायर रहे। उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में करीब 508.12 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII भी खरीदार रहे और उन्होंने करीब 356.40 करोड़ रुपये का निवेश किया।
हाल की FII बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों की खरीदारी की वापसी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है। हालांकि, यह खरीदारी कितनी टिकाऊ रहती है, इस पर भी बाजार की नजर रहेगी।
बुल्स या बीयर्स, किसका रहेगा दबदबा?
सोमवार की शुरुआत के संकेतों को देखें तो फिलहाल बीयर्स यानी मंदड़ियों को शुरुआती बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। GIFT निफ्टी में कमजोरी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव बाजार पर दबाव डाल सकते हैं।
हालांकि, निफ्टी के 24,200 के आसपास सपोर्ट मिलने और FII-DII की खरीदारी जारी रहने पर बाजार में रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। इसलिए शुरुआती गिरावट को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि पूरे दिन बाजार कमजोर ही रहेगा।
निवेशकों को सोमवार को 24,200 के सपोर्ट और 24,700 के रेजिस्टेंस के बीच निफ्टी की चाल पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा बैंकिंग और IT जैसे प्रमुख सेक्टरों की दिशा भी बाजार के लिए अहम रहेगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
कुल मिलाकर सोमवार के लिए बाजार का मूड सावधानी वाला नजर आ रहा है। GIFT निफ्टी का संकेत हल्की कमजोरी की ओर है, जबकि ग्लोबल बाजारों से भी कोई बहुत मजबूत तेजी का संकेत नहीं मिला है। दूसरी तरफ, संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और घरेलू सपोर्ट बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में मदद कर सकता है।
ऐसे में निवेशकों को बाजार में किसी एक दिशा में तेजी या गिरावट का अनुमान लगाने के बजाय महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रखनी चाहिए। कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ी खबरें भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में बाजार से जुड़ी जानकारी और विश्लेषण उपलब्ध आंकड़ों एवं विशेषज्ञों के विचारों पर आधारित हैं। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


