दुनिया में कई ऐसी परंपराएं हैं जो पहली नजर में अविश्वसनीय लगती हैं, लेकिन उनके पीछे सदियों पुराना इतिहास और गहरी मान्यताएं छिपी होती हैं। ऐसी ही एक अनोखी परंपरा ब्रिटेन के ‘मनी ट्री’ (Money Tree) या ‘विशिंग ट्री’ (Wishing Tree) से जुड़ी है। इन पेड़ों के तनों में हजारों सिक्के जड़े हुए दिखाई देते हैं। दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो पेड़ की छाल धातु से बनी हो, लेकिन पास जाकर पता चलता है कि लोगों ने वर्षों से अपनी इच्छाओं, आस्था और सौभाग्य की कामना के साथ इनमें सिक्के ठोके हैं।
आज भी इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के कई हिस्सों में ऐसे पेड़ मौजूद हैं, जिन्हें देखने हर साल हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। ये पेड़ सिर्फ पर्यटन का आकर्षण नहीं हैं, बल्कि लोककथाओं, धार्मिक मान्यताओं और इतिहास का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।
आखिर क्या होता है ‘मनी ट्री’?
‘मनी ट्री’ ऐसे पेड़ों को कहा जाता है जिनके तने में लोग सिक्के ठोक देते हैं। समय के साथ हजारों सिक्के एक-दूसरे के ऊपर जमा हो जाते हैं और पूरा तना चमकदार धातु से ढका हुआ नजर आता है।
ब्रिटेन के कई क्षेत्रों में इन पेड़ों को विशिंग ट्री भी कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इनमें सिक्का लगाने से व्यक्ति की मनोकामना पूरी होती है और जीवन में खुशहाली आती है।
300 साल पुरानी है यह परंपरा
इतिहासकारों के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत लगभग 18वीं सदी में हुई थी। उस समय लोगों का विश्वास था कि यदि किसी पेड़ में सिक्का ठोककर कोई इच्छा मांगी जाए तो वह पूरी हो सकती है।
कई जगहों पर यह भी माना जाता था कि यदि कोई व्यक्ति बीमार हो तो पेड़ उसकी बीमारी को अपने भीतर समाहित कर लेता है और उसे स्वस्थ होने का आशीर्वाद मिलता है। इसी विश्वास के चलते लोग पेड़ों में सिक्के ठोकने लगे और यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रही।
प्राचीन पैगन संस्कृति से जुड़ी है मान्यता
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परंपरा प्राचीन पैगन (Pagan) संस्कृति से जुड़ी हुई है। उस दौर में प्रकृति, पेड़-पौधों और नदियों को पवित्र माना जाता था।
जिस तरह आज भी दुनिया के कई देशों में लोग फव्वारों में सिक्के डालकर अपनी मनोकामना मांगते हैं, उसी तरह ब्रिटेन में लोग पेड़ों में सिक्के ठोककर सौभाग्य, अच्छी सेहत और समृद्धि की कामना करते थे।
सिक्का निकालना क्यों माना जाता था अशुभ?
लोककथाओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इन पेड़ों से सिक्का निकाल लेता था तो उसे दुर्भाग्य, बीमारी या किसी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता था।
इसी डर और आस्था के कारण सदियों से लोग इन सिक्कों को छूने या निकालने से बचते रहे हैं। यही वजह है कि आज भी कई पेड़ों में सैकड़ों साल पुराने सिक्के सुरक्षित दिखाई देते हैं।
ब्रिटेन का सबसे प्रसिद्ध मनी ट्री
ब्रिटेन के नॉर्थ वेल्स के खूबसूरत गांव पोर्टमेइरियन (Portmeirion) का मनी ट्री सबसे प्रसिद्ध माना जाता है। इस पेड़ का तना पूरी तरह सिक्कों से ढका हुआ है और यह पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय आकर्षण बन चुका है।
हर साल हजारों लोग यहां पहुंचते हैं और इस अनोखी परंपरा को अपनी आंखों से देखने का अनुभव लेते हैं।
स्कॉटलैंड का ऐतिहासिक मनी ट्री
स्कॉटलैंड के आइल मारी (Isle Maree) स्थित सेंट मेलरुबा के प्राचीन अवशेषों के पास मौजूद मनी ट्री भी काफी प्रसिद्ध है।
इतिहास में उल्लेख मिलता है कि 1877 में महारानी विक्टोरिया (Queen Victoria) ने भी यहां एक सिक्का लगाया था। आज भी इस पेड़ में लगभग 200 साल पुराने सिक्के देखे जा सकते हैं, जो इस परंपरा की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाते हैं।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
हालांकि यह परंपरा लोगों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि पेड़ों के तनों में धातु के सिक्के ठोकने से उन्हें नुकसान पहुंच सकता है।
सिक्कों के कारण पेड़ की बाहरी छाल क्षतिग्रस्त होती है, जिससे संक्रमण और सड़न का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए आज कई पर्यावरण विशेषज्ञ ऐसी परंपराओं को अपनाने के बजाय प्रकृति संरक्षण पर जोर देते हैं।
पर्यटन का बड़ा आकर्षण बन चुके हैं ये पेड़
इन मनी ट्री को देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक ब्रिटेन पहुंचते हैं। इतिहास, रहस्य और लोककथाओं का अनोखा मेल इन पेड़ों को बेहद खास बनाता है। कई पर्यटक इन्हें सिर्फ देखने ही नहीं, बल्कि इनके पीछे छिपी सदियों पुरानी कहानियों को जानने के लिए भी आते हैं।
निष्कर्ष
ब्रिटेन के ‘मनी ट्री’ केवल सिक्कों से ढके पेड़ नहीं हैं, बल्कि वे सदियों पुरानी आस्था, लोकविश्वास और सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक हैं। हालांकि आधुनिक विज्ञान पेड़ों में सिक्के ठोकने को उचित नहीं मानता, लेकिन इन पेड़ों का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व आज भी बरकरार है। यही कारण है कि ये रहस्यमयी पेड़ दुनिया के सबसे अनोखे पर्यटन आकर्षणों में शामिल हैं।


