IndiGo CCI Probe: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो (IndiGo) ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के सामने पांच बड़े प्रस्ताव पेश किए हैं। अगर आयोग इन प्रस्तावों को स्वीकार कर लेता है, तो दिसंबर 2025 में हजारों उड़ानों के रद्द होने के मामले में चल रही जांच बंद हो सकती है। इस मामले में अब CCI ने आम लोगों और संबंधित पक्षों से भी सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
दिसंबर 2025 की फ्लाइट कैंसिलेशन से शुरू हुआ विवाद
दिसंबर 2025 में इंडिगो की हजारों उड़ानें अचानक रद्द हो गई थीं। इस वजह से देशभर में लाखों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं, जबकि उन्हें समय पर वैकल्पिक फ्लाइट, रिफंड और अन्य सुविधाएं नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
इन्हीं शिकायतों के आधार पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने फरवरी 2026 में इंडिगो के खिलाफ विस्तृत जांच के आदेश दिए। आयोग यह जांच कर रहा है कि क्या कंपनी ने घरेलू विमानन बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का अनुचित फायदा उठाया और प्रतिस्पर्धा कानूनों का उल्लंघन किया।
घरेलू बाजार में इंडिगो की मजबूत पकड़
भारत के घरेलू विमानन बाजार में इंडिगो की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत से अधिक है। इतनी बड़ी बाजार हिस्सेदारी होने के कारण कंपनी पर यात्रियों के हितों की रक्षा और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी मानी जाती है।
CCI यह भी जांच कर रहा है कि संकट के दौरान कंपनी का व्यवहार प्रतिस्पर्धा कानून के अनुरूप था या नहीं।
जांच रोकने के लिए इंडिगो ने दिए 5 बड़े प्रस्ताव
जांच से बचने के लिए इंडिगो ने CCI के सामने कई सुधारात्मक कदमों का प्रस्ताव रखा है। इनमें प्रमुख प्रस्ताव शामिल हैं—
- संकट की स्थिति से निपटने के लिए क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप का गठन।
- यात्रियों की शिकायतों के समाधान के लिए 24×7 कस्टमर एक्सपीरियंस वॉर रूम की स्थापना।
- फ्लाइट रद्द होने पर यात्रियों को भोजन, पानी, बस और टैक्सी जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना।
- फ्लाइट कैंसिल होने की स्थिति में वैकल्पिक टिकट बुकिंग या ऑटोमैटिक रिफंड के लिए तय समय सीमा लागू करना।
- भविष्य में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने जैसी स्थिति से निपटने के लिए बेहतर संचालन और निगरानी व्यवस्था विकसित करना।
CCI ने आम लोगों से मांगी राय
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने इंडिगो के इन प्रस्तावों को सार्वजनिक किया है और यात्रियों, उद्योग विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
यदि आयोग को लगता है कि कंपनी के प्रस्ताव यात्रियों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा करते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोक सकते हैं, तो मौजूदा जांच को समाप्त किया जा सकता है। हालांकि अंतिम फैसला CCI द्वारा सभी प्रतिक्रियाओं और जांच के आधार पर लिया जाएगा।
पहली तिमाही में इंडिगो को हुआ 238 करोड़ रुपये का घाटा
इस बीच इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के वित्तीय नतीजे भी जारी किए हैं।
कंपनी को इस अवधि में 238 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध घाटा हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 2,176.3 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था।
हालांकि, कंपनी की कुल आय बढ़कर 25,614.1 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 21,542.6 करोड़ रुपये थी।
घाटे की वजह क्या रही?
कंपनी के अनुसार पहली तिमाही में लाभप्रदता पर कई कारणों का असर पड़ा, जिनमें शामिल हैं—
- विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतें
- विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में प्रतिकूल उतार-चढ़ाव
- पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव
- परिचालन लागत में बढ़ोतरी
इन सभी कारणों के संयुक्त प्रभाव से कंपनी को पहली तिमाही में शुद्ध घाटा दर्ज करना पड़ा।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
यदि CCI इंडिगो के प्रस्तावों को मंजूरी देता है, तो भविष्य में फ्लाइट रद्द होने जैसी परिस्थितियों में यात्रियों को अधिक पारदर्शी और तेज सेवाएं मिल सकती हैं। समयबद्ध रिफंड, वैकल्पिक उड़ान की व्यवस्था और संकट के दौरान बेहतर ग्राहक सहायता जैसी सुविधाएं यात्रियों की परेशानी कम करने में मदद कर सकती हैं।


