नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता (India-US Trade Deal) लगभग 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है और अब केवल अंतिम चरण की बातचीत बाकी है। उन्होंने यह जानकारी IIT दिल्ली में आयोजित US-India TRUST Initiative कार्यक्रम के दौरान दी।
सर्जियो गोर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया की दो बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं अपने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। यदि यह समझौता अगले कुछ हफ्तों या महीनों में साइन हो जाता है तो इसका असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निवेश, रोजगार, तकनीक और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी दिखाई देगा।
IIT दिल्ली में क्या बोले अमेरिकी राजदूत?
IIT दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते का केवल एक प्रतिशत हिस्सा अंतिम रूप दिए जाने के लिए बचा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में भारत ने एक प्रतिनिधिमंडल वॉशिंगटन भेजा था ताकि समझौते के अंतिम बिंदुओं पर चर्चा पूरी की जा सके। गोर के अनुसार, अमेरिका का एक प्रतिनिधिमंडल भी 1 जून से 4 जून के बीच भारत आने वाला है। यह टीम दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं को अंतिम चरण तक पहुंचाने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य ऐसा व्यापार ढांचा तैयार करना है जिससे दोनों देशों के व्यवसायों और कामगारों को नए अवसर मिल सकें।
क्यों महत्वपूर्ण है यह व्यापार समझौता?
भारत और अमेरिका पहले से ही एक-दूसरे के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं। पिछले दो दशकों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। यह वृद्धि केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे तकनीकी सहयोग, निवेश, रक्षा साझेदारी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण कारक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नया व्यापार समझौता इन संबंधों को और मजबूत करेगा तथा कई क्षेत्रों में व्यापारिक बाधाओं को कम करेगा।
किन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है?
यदि यह समझौता साइन होता है तो भारत के कई महत्वपूर्ण उद्योगों को सीधा लाभ मिल सकता है। सबसे पहले आईटी और डिजिटल सेवाओं का क्षेत्र लाभान्वित हो सकता है। भारतीय कंपनियां पहले से ही अमेरिकी बाजार में मजबूत उपस्थिति रखती हैं। व्यापार नियम आसान होने से निर्यात बढ़ सकता है। दूसरा बड़ा लाभ फार्मास्यूटिकल उद्योग को मिल सकता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में शामिल है और अमेरिकी बाजार इसकी सबसे बड़ी निर्यात मंजिलों में से एक है। इसके अलावा ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, कृषि उत्पाद और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र भी इस समझौते से फायदा उठा सकते हैं।
भारतीय निर्यातकों के लिए क्यों है बड़ी खबर?
भारतीय निर्यातक लंबे समय से अमेरिका के साथ अधिक अनुकूल व्यापार व्यवस्था की मांग करते रहे हैं। कई उत्पादों पर शुल्क, तकनीकी मानक और नियामकीय प्रक्रियाएं व्यापार को प्रभावित करती हैं। यदि नया समझौता इन बाधाओं को कम करता है तो भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं। इससे निर्यात बढ़ने के साथ-साथ घरेलू विनिर्माण और रोजगार सृजन को भी बल मिलेगा। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहल को भी इससे नई गति मिल सकती है।
अमेरिका को क्या फायदा होगा?
यह समझौता केवल भारत के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। अमेरिका भी चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करने की कोशिश कर रहा है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक विशाल उपभोक्ता बाजार और विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। नई व्यापार व्यवस्था अमेरिकी निवेशकों और कंपनियों को भारत में कारोबार विस्तार के लिए अधिक अवसर प्रदान कर सकती है।
वैश्विक राजनीति और व्यापार के नजरिए से समझौते का महत्व
दुनिया इस समय भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन व्यवधान और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजर रही है। ऐसे माहौल में भारत और अमेरिका के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी का वैश्विक महत्व भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक सहयोग को नई दिशा दे सकता है। साथ ही यह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर जून के पहले सप्ताह में होने वाली वार्ताओं पर रहेगी। यदि दोनों पक्ष अंतिम मुद्दों पर सहमति बना लेते हैं तो आने वाले हफ्तों में समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। सर्जियो गोर के बयान ने यह संकेत जरूर दिया है कि बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। हालांकि अंतिम समझौते के प्रावधान सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों को कितना लाभ मिलेगा। फिलहाल इतना तय है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। यदि यह सफलतापूर्वक लागू होता है तो व्यापार, निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
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