भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) की बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच अधिकांश महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और समझौता जल्द अंतिम रूप ले सकता है। यदि यह डील तय समय पर पूरी होती है, तो भारतीय निर्यातकों, उद्योगों और निवेशकों के लिए यह आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी आर्थिक उपलब्धियों में से एक साबित हो सकती है।
Highlights
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंचा।
- अधिकांश अहम मुद्दों पर दोनों देशों में सहमति बनी।
- भारत ने प्रतिस्पर्धी देशों से बेहतर बाजार पहुंच की मांग दोहराई।
- अमेरिका ने भारत की चिंताओं को समझने का भरोसा दिया।
- अप्रैल-जून तिमाही में भारत के निर्यात में करीब 15% वृद्धि का अनुमान।
- भारत-ब्रिटेन FTA 15 जुलाई से लागू होने की उम्मीद।
- भारत-यूरोपीय संघ FTA भी वर्ष के अंत तक लागू हो सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत अब अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि अधिकांश संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान कर लिया गया है और दोनों देश ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं जिससे भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बढ़त मिल सके।
गोयल ने भरोसा जताया कि वाशिंगटन में हाल के नीतिगत बदलावों के बावजूद इस समझौते को पूरा करने में कोई बड़ा व्यवधान आने की संभावना नहीं है।
भारत ने बेहतर बाजार पहुंच की मांग रखी
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत का रुख हमेशा यह रहा है कि उसे उन देशों की तुलना में बेहतर बाजार पहुंच (Market Access) मिले जो अमेरिका के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उनका कहना था कि भारतीय उद्योगों को समान या बेहतर अवसर मिलना आवश्यक है ताकि निर्यात में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कायम रह सके।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने भारत की इस मांग को समझा है और बातचीत के दौरान इसे सकारात्मक रूप से स्वीकार किया गया है।
टैरिफ विवाद के बावजूद निर्यात मजबूत
हाल के वर्षों में अमेरिका द्वारा लगाए गए कुछ अतिरिक्त टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों के बावजूद भारतीय निर्यात में मजबूती बनी हुई है।
गोयल ने कहा कि:
- भारत का अमेरिका को निर्यात लगातार बढ़ रहा है।
- द्विपक्षीय व्यापार मजबूत गति से आगे बढ़ रहा है।
- अप्रैल-जून तिमाही में वस्तु निर्यात में लगभग 15 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का अनुमान है।
यह संकेत देता है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध पहले से अधिक मजबूत हो रहे हैं।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र
गोयल ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA), 1977 के तहत लगाए गए टैरिफ से जुड़े अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले के बाद अमेरिका अब ऐसे वैकल्पिक तंत्र पर काम कर रहा है जिससे भारत को मिलने वाली प्रतिस्पर्धी बढ़त बनी रहे। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में सकारात्मक माहौल बना है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने भारत के रुख को माना
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर के साथ हुई बैठकों में भारत की चिंताओं और मांगों को गंभीरता से सुना गया।
उन्होंने कहा कि बातचीत बेहद सकारात्मक माहौल में हुई और दोनों पक्षों ने कई जटिल मुद्दों पर व्यावहारिक समाधान खोज लिए हैं।
भारत-ब्रिटेन FTA भी जल्द लागू होगा
पीयूष गोयल ने भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (India-UK FTA) पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि:
- भारत-ब्रिटेन FTA 15 जुलाई से लागू होने की उम्मीद है।
- इससे भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में बड़ा लाभ मिलेगा।
- टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग, फार्मा और कृषि उत्पादों के निर्यात में तेजी आने की संभावना है।
भारत-यूरोपीय संघ FTA पर भी तेजी
गोयल ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर भी अपडेट दिया।
उन्होंने बताया कि:
- कानूनी दस्तावेजों की समीक्षा अगले 10 से 12 दिनों में पूरी हो सकती है।
- इसके बाद समझौता मंजूरी की औपचारिक प्रक्रिया में जाएगा।
- सरकार को उम्मीद है कि साल 2026 के अंत से पहले भारत-EU FTA लागू हो सकता है।
यदि ऐसा होता है तो भारतीय कंपनियों को यूरोप के विशाल बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी।
देर रात तक चली बातचीत
मीडिया से बातचीत में पीयूष गोयल ने हल्के अंदाज में कहा कि बातचीत अक्सर देर रात तक चलती थी, लेकिन उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं हुई।
उन्होंने कहा,
“मैं वैसे भी देर से सोता हूं, इसलिए मेरे लिए यह मुश्किल नहीं था। मेरी टीम को जरूर थोड़ा अधिक काम करना पड़ा। दोनों देशों की टीमों के बीच बातचीत बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और किसी तरह का तनाव नहीं था।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में अपने समकक्षों के साथ उनके संबंध काफी अच्छे रहे, जिससे बातचीत आगे बढ़ाने में आसानी हुई।
भारत को क्या होगा फायदा?
यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो इसके कई बड़े लाभ मिल सकते हैं।
1. निर्यात में बढ़ोतरी
भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी अवसर मिलेंगे।
2. नए निवेश
अमेरिकी कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ सकता है, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
3. मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
‘मेक इन इंडिया’ और ‘चीन प्लस वन’ रणनीति को मजबूती मिलेगी।
4. MSME सेक्टर को लाभ
छोटे और मध्यम उद्योगों को नए निर्यात बाजार मिल सकते हैं।
5. वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त
भारत एशिया के अन्य निर्यातक देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति हासिल कर सकता है।
किन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है?
समझौते के बाद निम्न क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है:
- टेक्सटाइल एवं गारमेंट्स
- फार्मास्युटिकल्स
- इंजीनियरिंग सामान
- ऑटो कंपोनेंट्स
- आईटी एवं डिजिटल सेवाएं
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग
- कृषि एवं खाद्य उत्पाद
- रत्न एवं आभूषण
आगे क्या?
अब दोनों देशों के बीच बचे हुए तकनीकी और कानूनी मसलों को अंतिम रूप दिया जाएगा। यदि बातचीत तय समयसीमा में पूरी होती है तो आने वाले हफ्तों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की आधिकारिक घोषणा हो सकती है।
यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निवेश, सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को भी नई दिशा देगा।
निष्कर्ष
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अधिकांश महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना इस बात का संकेत है कि दोनों देश आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं। यदि यह समझौता जल्द लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों, उद्योगों और निवेशकों के लिए नए अवसर खुलेंगे और भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत होगी।


