भारत का पावर ट्रांसमिशन सेक्टर लंबे समय से धीमी ग्रोथ और प्रोजेक्ट अड़चनों से जूझ रहा है, लेकिन अब एक बड़ा बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं। SBI Caps की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 (FY27) से इस सेक्टर में मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है और अगले 6 सालों में करीब ₹7.6 लाख करोड़ का निवेश अवसर तैयार हो सकता है।
यह अनुमान ऐसे समय आया है जब भारत तेजी से renewable energy और power infrastructure को expand कर रहा है, लेकिन transmission नेटवर्क अभी भी इस ग्रोथ के मुकाबले पीछे चल रहा है।
पांच साल की सुस्ती के बाद बदलाव की उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक FY22 से FY26 तक पावर ट्रांसमिशन सेक्टर लगातार कमजोर प्रदर्शन करता रहा। इस दौरान कई परियोजनाएं अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाईं।
इसके पीछे प्रमुख कारण रहे:
- Right of Way (RoW) की लंबी प्रक्रिया और जमीन अधिग्रहण में देरी
- भूमि मूल्यांकन को लेकर कानूनी और प्रशासनिक जटिलताएं
- Great Indian Bustard (GIB) मामले के कारण लाइन प्रोजेक्ट्स पर रोक
- ट्रांसफॉर्मर और उपकरणों की सप्लाई चेन बाधाएं
- चीन से सीमित आयात के कारण equipment shortage
इन सभी कारणों ने पूरे सेक्टर की गति को धीमा कर दिया।
FY26 में सुधार के शुरुआती संकेत
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कमजोरी रही, लेकिन FY26 में स्थिति में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं।
SBI Caps रिपोर्ट के अनुसार:
- Transmission line additions में 37% YoY growth दर्ज की गई
- Substation capacity लगभग अपने लक्ष्य के करीब पहुंच गई
यह संकेत देता है कि प्रोजेक्ट execution अब धीरे-धीरे सुधर रहा है और bottlenecks कम हो रहे हैं।
फिर भी 2027 का National Energy Plan लक्ष्य मुश्किल
भारत का National Electricity Plan (NEP) मार्च 2027 तक एक बड़ा लक्ष्य तय करता है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल होना मुश्किल लग रहा है।
इसका मतलब है:
- अभी भी बड़ी मात्रा में capex pipeline में है
- Transmission network को और तेजी से expand करने की जरूरत है
- Renewable energy demand तेजी से बढ़ रही है लेकिन grid infrastructure पीछे है
यह gap ही आने वाले वर्षों में बड़े निवेश अवसर पैदा करेगा।
₹7.6 लाख करोड़ का बड़ा निवेश अवसर
SBI Caps ने अनुमान लगाया है कि अगले 6 वर्षों में transmission sector में लगभग ₹7.6 trillion (₹7.6 लाख करोड़) का निवेश अवसर बन सकता है।
यह निवेश मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में होगा:
- नए transmission lines का निर्माण
- Substation expansion और modernization
- Renewable energy integration infrastructure
- Inter-state transmission upgrades
- Smart grid और digital monitoring systems
यह आंकड़ा भारत के energy transition में इस सेक्टर की अहम भूमिका को दिखाता है।
Regulatory बदलाव: गेम चेंजर साबित हो सकता है
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आने वाले समय में कुछ regulatory changes इस सेक्टर को प्रभावित करेंगे।
सबसे बड़ा बदलाव: ISTS शुल्क में बदलाव
Inter-State Transmission System (ISTS) की fee concessions धीरे-धीरे खत्म की जा रही हैं, खासकर renewable energy projects के लिए।
पहले:
- लंबी दूरी पर बिजली ट्रांसमिशन सस्ता था
- renewable projects को भारी सब्सिडी मिलती थी
अब:
- यह structure बदल रहा है
- राज्यों को local generation पर ज्यादा ध्यान देना होगा
इस बदलाव से power economics पूरी तरह बदल सकती है।
राज्य-स्तरीय ट्रांसमिशन को मिलेगा बढ़ावा
ISTS शुल्क में बदलाव का एक बड़ा असर यह होगा कि:
- राज्यों में स्थानीय renewable projects बढ़ेंगे
- intra-state transmission (InSTS) को फायदा मिलेगा
- renewable-rich states आगे निकलेंगे
लेकिन इसका उल्टा असर उन राज्यों पर होगा जहां renewable resources कम हैं।
Energy storage बन सकता है नया समाधान
रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण बात यह भी कही गई है कि energy storage भविष्य में transmission congestion को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
Energy storage के फायदे:
- दिन और रात की बिजली मांग को balance करना
- peak load पर transmission pressure कम करना
- renewable energy की variability को smooth करना
- costly transmission lines की जरूरत कम करना
अगर यह मॉडल तेजी से अपनाया गया, तो बिजली वितरण और भी efficient हो सकता है।
Asset monetisation: सेक्टर की फाइनेंसिंग का नया मॉडल
Transmission sector की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से capital requirement रही है। SBI Caps ने कहा है कि asset monetisation इस समस्या का बड़ा समाधान बन सकता है।
National Monetisation Pipeline 2.0 के तहत:
- ₹2.3 trillion का target रखा गया है (FY26–FY30)
- इसमें ₹2 trillion BOOT मॉडल के तहत आएगा
- बाकी assets securitisation के जरिए monetise होंगे
यह मॉडल सरकार और private investors दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
InvITs की भूमिका तेजी से बढ़ेगी
Infrastructure Investment Trusts (InvITs) आने वाले समय में transmission sector का बड़ा हिस्सा बन सकते हैं।
क्यों बढ़ रहा है InvIT का उपयोग:
- लंबे समय तक stable cash flow
- low operational cost assets
- predictable returns
- institutional investor interest
हालांकि कुछ चुनौतियाँ भी हैं:
- quality assets की limited availability
- leverage limits
- regulatory constraints
फिर भी इसका विस्तार तय माना जा रहा है।
State transmission assets: अगला बड़ा मौका
रिपोर्ट का सबसे interesting point यह है कि आने वाले समय में state transmission assets सबसे बड़ा monetisation opportunity बन सकते हैं।
आंकड़े:
- InSTS का लगभग 90% हिस्सा राज्यों के पास है
- यह करीब ₹2.9 trillion का opportunity बनाता है
- यह NEP 2032 तक के पूरे transmission cost को कवर कर सकता है
अगर यह प्रक्रिया सफल रही तो राज्य सरकारों की financial स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
लेकिन इसके लिए जरूरी शर्तें
SBI Caps ने कुछ जरूरी शर्तें भी बताई हैं:
- tariff changes में stability होनी चाहिए
- taxation clarity जरूरी है
- SPV unbundling तेजी से होना चाहिए
- AOMT framework (Acquire-Operate-Maintain-Transfer) लागू होना चाहिए
अगर ये सुधार नहीं हुए तो monetisation धीमा रह सकता है।
भारत के energy transition में transmission की भूमिका
भारत 2030 और 2047 तक clean energy transition की तरफ बढ़ रहा है। ऐसे में transmission sector की भूमिका critical हो जाती है।
- Renewable energy को grid से जोड़ना
- power demand और supply balance करना
- industrial growth को support करना
- rural electrification को मजबूत करना
निष्कर्ष: बड़ा बदलाव बस शुरू होने वाला है
SBI Caps की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारत का power transmission sector एक long slowdown phase के बाद अब recovery की तरफ बढ़ रहा है।
FY27 इस बदलाव का turning point हो सकता है, जहां:
- निवेश तेजी से बढ़ेगा
- नई policies लागू होंगी
- infrastructure modernization शुरू होगा
- और भारत का power grid future-ready बनेगा
₹7.6 लाख करोड़ का अवसर सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत के energy future का blueprint है।
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