भारत में सोना हमेशा से सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि परंपरा, सुरक्षा और निवेश का प्रतीक रहा है। लेकिन 2025 में इस धारणा में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। CareEdge Ratings की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, देश में गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड कुल खपत का करीब 40% तक पहुंच गई है—जो पिछले एक दशक में सबसे ऊंचा स्तर है।
यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता को दर्शाता है जिसमें भारतीय उपभोक्ता अब सोने को आभूषण से ज्यादा एक “फाइनेंशियल एसेट” के रूप में देखने लगे हैं। खास बात यह है कि ETF (Exchange Traded Funds) में अकेले 37.5 टन का निवेश हुआ, जो पिछले 10 वर्षों के कुल निवेश से भी ज्यादा है।
ज्वेलरी से निवेश की ओर क्यों बढ़ रहा है रुझान?
अगर पिछले वर्षों का ट्रेंड देखें, तो भारत में सोने की मांग का बड़ा हिस्सा ज्वेलरी के रूप में आता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।
CareEdge Ratings के मुताबिक, जहां पहले ज्वेलरी कुल मांग का करीब 70% हिस्सा होती थी, वहीं 2025 में यह घटकर 60% से नीचे आ गई है।
इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है सोने की बढ़ती कीमतें। जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती हैं, तो उपभोक्ता भारी गहने खरीदने से बचते हैं और हल्के या कम कैरेट वाले विकल्प चुनते हैं।
दूसरी तरफ, निवेश के रूप में सोना ज्यादा आकर्षक लगने लगता है—खासकर तब, जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ रही हो।
ETF में रिकॉर्ड निवेश: क्या संकेत मिलते हैं?
ETF में 37.5 टन का निवेश सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक बड़े ट्रेंड का संकेत है।
इसका मतलब है कि निवेशक अब फिजिकल गोल्ड की बजाय डिजिटल या पेपर गोल्ड की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण हैं:
- आसानी से खरीद-बिक्री
- सुरक्षित स्टोरेज की जरूरत नहीं
- और पारदर्शिता
यानी अब सोना सिर्फ लॉकर में रखने वाली चीज नहीं रहा, बल्कि यह एक सक्रिय निवेश साधन बनता जा रहा है।
कीमतें ऊंची रहेंगी, लेकिन उतार-चढ़ाव जारी रहेगा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2026 तक सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं, हालांकि बीच-बीच में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।
Akhil Goyal के अनुसार, जियोपॉलिटिकल तनाव, बढ़ती कीमतें और पोर्टफोलियो diversification की जरूरत आगे भी गोल्ड इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देती रहेंगी।
यह संकेत देता है कि निवेशकों के लिए सोना अब सिर्फ “सुरक्षित विकल्प” नहीं, बल्कि रणनीतिक निवेश का हिस्सा बनता जा रहा है।
ज्वेलरी सेक्टर पर क्या असर पड़ा?
दिलचस्प बात यह है कि ज्वेलरी सेक्टर पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है।
हालांकि वॉल्यूम के हिसाब से मांग में 15% की गिरावट आई है, लेकिन वैल्यू के हिसाब से यह 10% बढ़कर ₹4.8 लाख करोड़ तक पहुंच गई है।
इसका मतलब साफ है—लोग कम मात्रा में खरीद रहे हैं, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण कुल खर्च बढ़ रहा है।
इसके अलावा, बड़े संगठित ज्वेलर्स को इसका फायदा मिल रहा है। Raunak Modi के अनुसार, FY26 में बड़े ज्वेलरी रिटेलर्स की आय में 35% तक की वृद्धि हो सकती है, जिसका कारण नए स्टोर खुलना और मार्केट शेयर बढ़ना है।
संगठित बाजार की ओर झुकाव
इस पूरे बदलाव में एक और महत्वपूर्ण ट्रेंड सामने आ रहा है—formalisation।
यानी ग्राहक अब छोटे, अनऑर्गनाइज्ड ज्वेलर्स की बजाय बड़े ब्रांडेड स्टोर्स की ओर जा रहे हैं।
FY26 में बड़े ज्वेलर्स ने करीब 310 नए स्टोर जोड़े, जो लगातार दूसरे साल 300+ स्टोर जोड़ने का आंकड़ा है।
हालांकि विस्तार की गति थोड़ी धीमी हुई है, जो यह संकेत देती है कि कंपनियां अब सतर्क होकर विस्तार कर रही हैं।
क्या चांदी (Silver) गोल्ड को रिप्लेस कर सकती है?
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि युवा खरीदारों के बीच चांदी की लोकप्रियता बढ़ रही है।
लेकिन फिलहाल यह सोने का विकल्प नहीं बन रही है।
सोना अभी भी निवेश और परंपरा दोनों के रूप में मजबूत स्थिति में बना हुआ है।
भारत के लिए बड़ा आर्थिक संकेत
India अपनी ज्यादातर सोने की जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है। ऐसे में जब निवेश की मांग बढ़ती है, तो इसका असर देश के इम्पोर्ट बिल पर भी पड़ता है।
हालांकि वॉल्यूम में कमी आ सकती है, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण कुल इम्पोर्ट वैल्यू ऊंची बनी रह सकती है।
यह सिर्फ ट्रेंड नहीं, व्यवहार में बदलाव है
अगर इस पूरी तस्वीर को एक लाइन में समझें, तो यह साफ है कि भारत में सोने को लेकर सोच बदल रही है।
अब यह सिर्फ शादी-ब्याह या परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक structured investment tool बनता जा रहा है।
यह बदलाव आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सकता है, खासकर तब जब आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है।
निष्कर्ष: सोना अब “ज्वेलरी” नहीं, “स्ट्रेटेजिक एसेट” बन रहा
कुल मिलाकर, CareEdge Ratings की यह रिपोर्ट एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है।
भारत में सोने की मांग का पैटर्न बदल रहा है—जहां निवेश का हिस्सा तेजी से बढ़ रहा है और ज्वेलरी का वर्चस्व धीरे-धीरे कम हो रहा है।
अब सवाल यह है—क्या आने वाले समय में सोना भारतीय निवेश पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा बन जाएगा, या फिर कीमतों में उतार-चढ़ाव इस ट्रेंड को धीमा कर देगा?
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