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Reading: India-EU Relations: 6000 कंपनियां, 60 लाख नौकरियां और व्यापार दोगुना करने की तैयारी, भारत-EU रिश्तों में क्यों आया बड़ा मोड़?
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India-EU Relations: 6000 कंपनियां, 60 लाख नौकरियां और व्यापार दोगुना करने की तैयारी, भारत-EU रिश्तों में क्यों आया बड़ा मोड़?

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/27 at 7:56 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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11 Min Read
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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्ते अब सिर्फ कूटनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं रह गए हैं। दोनों पक्ष अब व्यापार, तकनीक, सुरक्षा, निवेश और सप्लाई चेन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अपने संबंधों को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

Contents
भारत-EU शिखर सम्मेलन क्यों माना जा रहा अहम?प्रधानमंत्री मोदी के किस संदेश का हुआ जिक्र?अगले 5 साल का क्या है बड़ा प्लान?क्यों अहम माना जा रहा FTA?व्यापार दोगुना होने की उम्मीद क्यों?6000 यूरोपीय कंपनियों का भारत में कितना बड़ा असर?भारत के लिए क्यों अहम है यूरोप?चीन फैक्टर से कैसे बदल रहे रिश्ते?रोजगार और निवेश पर क्या असर पड़ सकता है?रक्षा और सुरक्षा सहयोग क्यों बढ़ रहा?हरित ऊर्जा और तकनीक में क्यों बढ़ सकता है सहयोग?वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह साझेदारी?आगे क्या हो सकता है?भारतीय निर्यातकों के लिए क्यों बड़ा मौका?‘चाइना प्लस वन’ रणनीति से भारत को कैसे फायदा?किन क्षेत्रों में बढ़ सकते हैं रोजगार?वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका क्यों बढ़ रही?हरित ऊर्जा सहयोग क्यों बन सकता है गेमचेंजर?भारतीय उद्योगों को कैसे मिल सकता है फायदा?तकनीकी सहयोग क्यों अहम माना जा रहा?भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यूरोपीय निवेश?वैश्विक राजनीति में क्यों बढ़ सकती है भारत की भूमिका?आगे क्या हो सकता है?

यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी अब “असीमित, महत्वाकांक्षी और प्रगतिशील” दिशा में आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश और नई सप्लाई चेन रणनीति ने भारत-EU साझेदारी को पहले से ज्यादा अहम बना दिया है।


भारत-EU शिखर सम्मेलन क्यों माना जा रहा अहम?

करीब साढ़े तीन महीने पहले आयोजित भारत-EU शिखर सम्मेलन को दोनों पक्षों के रिश्तों में बड़ा रणनीतिक मोड़ माना जा रहा है। राजदूत डेल्फिन के अनुसार इस बैठक में केवल प्रतीकात्मक घोषणाएं नहीं हुईं, बल्कि कई बड़े दीर्घकालिक एजेंडे तय किए गए।

विशेषज्ञों के अनुसार यह संकेत है कि भारत और यूरोप आने वाले वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को तेजी से विस्तार देना चाहते हैं।


प्रधानमंत्री मोदी के किस संदेश का हुआ जिक्र?

राजदूत हर्वे डेल्फिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “यह युद्ध का युग नहीं है” वाले बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संदेश यूरोप के मूल्यों और सोच से गहराई से मेल खाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के दौर में भारत की संतुलित कूटनीतिक स्थिति यूरोप के लिए महत्वपूर्ण बन गई है।


अगले 5 साल का क्या है बड़ा प्लान?

भारत और यूरोपीय संघ ने अगले पांच वर्षों के लिए संयुक्त रणनीतिक एजेंडा तैयार किया है।

इसके तहत मुख्य फोकस इन क्षेत्रों पर रहने वाला है:

  • मुक्त व्यापार समझौता (FTA)
  • सुरक्षा और रक्षा सहयोग
  • निवेश और सप्लाई चेन
  • तकनीक और नवाचार
  • लोगों की आवाजाही और वीजा ढांचा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक रणनीतिक गठजोड़ का रूप ले सकती है।


क्यों अहम माना जा रहा FTA?

भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा आर्थिक समझौता माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर यह समझौता पूरा होता है, तो भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजारों तक ज्यादा आसान पहुंच मिल सकती है। इसके अलावा यूरोपीय निवेश और मैन्युफैक्चरिंग सहयोग भी तेजी से बढ़ सकता है।


व्यापार दोगुना होने की उम्मीद क्यों?

राजदूत डेल्फिन के अनुसार FTA लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना हो सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों पक्षों के बीच कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शुल्क बाधाएं कम होती हैं, तो निर्यात और निवेश दोनों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।


6000 यूरोपीय कंपनियों का भारत में कितना बड़ा असर?

राजदूत के अनुसार लगभग 6000 यूरोपीय कंपनियां भारत में सक्रिय हैं और करीब 60 लाख लोगों को रोजगार दे रही हैं।

इन कंपनियों की मौजूदगी:

  • ऑटोमोबाइल
  • फार्मा
  • इंजीनियरिंग
  • ग्रीन एनर्जी
  • टेक्नोलॉजी
  • लॉजिस्टिक्स

जैसे क्षेत्रों में काफी मजबूत मानी जाती है।


भारत के लिए क्यों अहम है यूरोप?

विशेषज्ञों के अनुसार यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में शामिल है।

भारत के लिए यूरोप:

  • बड़ा निर्यात बाजार
  • तकनीकी साझेदार
  • निवेश स्रोत
  • हरित ऊर्जा सहयोगी

के रूप में महत्वपूर्ण माना जाता है।


चीन फैक्टर से कैसे बदल रहे रिश्ते?

वैश्विक कंपनियां अब सप्लाई चेन diversification पर जोर दे रही हैं ताकि चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस बदलाव का बड़ा लाभ उठा सकता है और यूरोपीय कंपनियों के लिए वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है।


रोजगार और निवेश पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर भारत-EU FTA सफलतापूर्वक लागू होता है, तो:

  • विदेशी निवेश बढ़ सकता है
  • मैन्युफैक्चरिंग विस्तार हो सकता है
  • निर्यात में तेजी आ सकती है
  • रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं

विशेषज्ञों के अनुसार इससे “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियानों को भी मजबूती मिल सकती है।


रक्षा और सुरक्षा सहयोग क्यों बढ़ रहा?

रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बाद यूरोप अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस रणनीति में प्रमुख साझेदार बनकर उभर रहा है।


हरित ऊर्जा और तकनीक में क्यों बढ़ सकता है सहयोग?

यूरोपीय संघ ग्रीन टेक्नोलॉजी और स्वच्छ ऊर्जा में दुनिया के अग्रणी क्षेत्रों में माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत और यूरोप:

  • हरित हाइड्रोजन
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी
  • स्वच्छ ऊर्जा
  • कार्बन कटौती

जैसे क्षेत्रों में बड़ा सहयोग बढ़ा सकते हैं।


वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह साझेदारी?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ दोनों लोकतांत्रिक और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करते हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही है, यह साझेदारी वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत-EU FTA वार्ता तेज हो सकती है। अगर समझौते को अंतिम रूप मिल जाता है, तो यह भारत के सबसे बड़े व्यापारिक और रणनीतिक समझौतों में से एक साबित हो सकता है। इसके अलावा यूरोपीय निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग में भी तेजी देखने को मिल सकती है।

भारतीय निर्यातकों के लिए क्यों बड़ा मौका?

विशेषज्ञों के अनुसार मुक्त व्यापार समझौता लागू होने से भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी पहुंच मिल सकती है।

इससे टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना है।


‘चाइना प्लस वन’ रणनीति से भारत को कैसे फायदा?

कई वैश्विक कंपनियां अब चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक उत्पादन केंद्र तलाश रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत मजबूत बाजार, बड़ी श्रम शक्ति और तेजी से विकसित हो रहे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वजह से इस बदलाव का बड़ा लाभ उठा सकता है।


किन क्षेत्रों में बढ़ सकते हैं रोजगार?

विशेषज्ञों के अनुसार तकनीक, ग्रीन एनर्जी, ऑटोमोबाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में नए रोजगार अवसर पैदा हो सकते हैं।

यूरोपीय निवेश बढ़ने से उच्च कौशल वाले रोजगारों की मांग में भी तेजी देखने को मिल सकती है।


वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका क्यों बढ़ रही?

दुनिया भर की कंपनियां अब सप्लाई चेन को ज्यादा सुरक्षित और विविध बनाने पर जोर दे रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत तेजी से वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।


हरित ऊर्जा सहयोग क्यों बन सकता है गेमचेंजर?

यूरोपीय संघ स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन कटौती को लेकर दुनिया के सबसे सक्रिय क्षेत्रों में माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत और यूरोप के बीच हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में बड़ा सहयोग विकसित हो सकता है।


भारतीय उद्योगों को कैसे मिल सकता है फायदा?

यदि व्यापार बाधाएं कम होती हैं, तो भारतीय उद्योगों को बड़े यूरोपीय बाजार तक आसान पहुंच मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निर्यात बढ़ने के साथ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को भी मजबूती मिल सकती है।


तकनीकी सहयोग क्यों अहम माना जा रहा?

यूरोप को एडवांस टेक्नोलॉजी और रिसर्च के क्षेत्र में मजबूत माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत और यूरोपीय संघ के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ने से नवाचार और औद्योगिक विकास को गति मिल सकती है।


भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यूरोपीय निवेश?

यूरोपीय निवेश को दीर्घकालिक और स्थिर निवेश माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत में बुनियादी ढांचा, विनिर्माण और हरित परियोजनाओं को फंडिंग मिल सकती है।


वैश्विक राजनीति में क्यों बढ़ सकती है भारत की भूमिका?

विशेषज्ञों के अनुसार भारत और यूरोपीय संघ का सहयोग वैश्विक शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

खासकर इंडो-पैसिफिक, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार नियमों के मुद्दों पर दोनों पक्षों का सहयोग और मजबूत हो सकता है।


आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत और तेज हो सकती है।

अगर यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो व्यापार, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

इसके साथ ही भारत-EU साझेदारी आने वाले दशक में वैश्विक व्यापार और रणनीतिक संतुलन को प्रभावित करने वाली बड़ी ताकत बन सकती है।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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