मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती सब्सिडी लागत के बीच भारत सरकार अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत लगभग 2.5 अरब डॉलर (करीब ₹23,632 करोड़) का कर्ज लेने के लिए वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के साथ बातचीत कर रहा है। इस फंड का उपयोग मुख्य रूप से शहरी बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन कार्यक्रमों को गति देने के लिए किया जाएगा।
Highlights
- भारत 2.5 अरब डॉलर (₹23,632 करोड़) का लोन जुटाने की तैयारी में।
- वर्ल्ड बैंक से 1.5 अरब डॉलर और ADB से 1 अरब डॉलर की फंडिंग पर चर्चा।
- बढ़ती तेल कीमतों के कारण सब्सिडी खर्च में इजाफा।
- शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार परियोजनाओं पर होगा फोकस।
- अगले दो महीनों में फंडिंग पैकेज की घोषणा संभव।
वर्ल्ड बैंक और ADB से जारी है बातचीत
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार मौजूदा क्रेडिट लाइनों के माध्यम से लगभग 2.5 अरब डॉलर जुटाने की योजना पर काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार, वर्ल्ड बैंक 1.5 अरब डॉलर और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) 1 अरब डॉलर के ऋण पैकेज पर विचार कर रहे हैं।
यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो आने वाले दो महीनों में इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। इस फंडिंग का उद्देश्य शहरी विकास परियोजनाओं को गति देना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करना होगा।
पहले से मौजूद है बड़ी फंडिंग रूपरेखा
भारत और वर्ल्ड बैंक ग्रुप के बीच पहले ही एक दीर्घकालिक सहयोग ढांचा तैयार किया जा चुका है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में हर साल 8 से 10 अरब डॉलर तक की फंडिंग उपलब्ध कराने की रूपरेखा बनाई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में प्रस्तावित ऋण पैकेज इसी व्यापक सहयोग कार्यक्रम का हिस्सा हो सकता है। वर्ल्ड बैंक ने भी संकेत दिया है कि वह भारत सरकार के साथ निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने और आर्थिक सुधारों को समर्थन देने के लिए बातचीत कर रहा है।
सब्सिडी खर्च बढ़ने से बढ़ा दबाव
सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ने का एक बड़ा कारण ऊर्जा सब्सिडी है। ईरान संकट और मध्य पूर्व में तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर सरकार को ईंधन और उर्वरक सब्सिडी पर अधिक खर्च करना पड़ता है। इससे राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ता है और नई परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की जरूरत महसूस होती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार योजनाओं को मिलेगा सहारा
प्रस्तावित फंडिंग का उपयोग उन सरकारी कार्यक्रमों में किया जा सकता है जो शहरीकरण, परिवहन, स्मार्ट सिटी और रोजगार सृजन से जुड़े हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इसके लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और शहरी नवीनीकरण योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। अतिरिक्त वित्तीय सहायता इन परियोजनाओं को गति देने में मदद कर सकती है।
भारत के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं ADB और वर्ल्ड बैंक?
एशियन डेवलपमेंट बैंक ने दिसंबर 2025 तक भारत के लिए 63.8 अरब डॉलर मूल्य के 683 सार्वजनिक क्षेत्र ऋण, अनुदान और तकनीकी सहायता कार्यक्रमों का समर्थन करने की प्रतिबद्धता जताई है।
वहीं, वर्ल्ड बैंक ग्रुप की वेबसाइट के अनुसार भारत उसका सबसे बड़ा ग्राहक देशों में से एक है। भारत को इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (IBRD) और इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (IFC) के माध्यम से लगभग 37 अरब डॉलर की वित्तीय प्रतिबद्धता प्राप्त है।
आगे क्या?
यदि प्रस्तावित ऋण पैकेज को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो यह भारत को बढ़ते सब्सिडी बोझ और राजकोषीय दबाव के बीच विकास परियोजनाओं को जारी रखने में मदद करेगा। साथ ही रोजगार सृजन और शहरी बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसे क्षेत्रों को भी नई गति मिल सकती है।


