अमेरिका की बदलती व्यापार नीतियों के बीच कनाडा अपने व्यापारिक रिश्तों का दायरा बढ़ाने में जुटा है। इसी रणनीति के तहत कनाडा भारत के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को इस साल के अंत तक पूरा करने की कोशिश की जा रही है। यदि यह समझौता तय समय पर आगे बढ़ता है, तो भारत और कनाडा के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक सालाना 70 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 30.4 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था। ऐसे में प्रस्तावित समझौता व्यापार को बढ़ावा देने, कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करने और दोनों देशों के कारोबारियों की बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
कनाडा क्यों बढ़ा रहा है भारत के साथ कारोबार?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और टैरिफ नीतियों ने वैश्विक कारोबार के समीकरणों को प्रभावित किया है। कनाडा लंबे समय से अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार अमेरिका पर काफी निर्भर रहा है। ऐसे में व्यापारिक जोखिम कम करने के लिए कनाडा अब दूसरे बड़े बाजारों के साथ अपने आर्थिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
भारत इस रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत में उपभोक्ता बाजार का विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण और तकनीक जैसे क्षेत्रों में कारोबार के अवसर मौजूद हैं।
कनाडा के लिए भारत के साथ व्यापार बढ़ाने का मतलब केवल अधिक सामान बेचना नहीं है, बल्कि अपने निर्यात के लिए नए बाजार तैयार करना भी है। वहीं, भारतीय कंपनियों को कनाडा में कारोबार बढ़ाने और वहां के निवेशकों के साथ साझेदारी करने के अवसर मिल सकते हैं।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित समझौता सीधे तौर पर अमेरिका को व्यापार से बाहर करने की योजना नहीं है। इसका प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के व्यापारिक विकल्प बढ़ाना और किसी एक बाजार पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को कम करना है।
CEPA समझौते को साल के अंत तक पूरा करने की तैयारी
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के मुताबिक, भारत के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। कनाडा इस समझौते को वर्ष के अंत तक पूरा करना चाहता है।
रॉयटर्स को दिए गए इंटरव्यू में आनंद ने भारत के साथ व्यापार समझौते को कनाडा की व्यापार विविधीकरण रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इस रणनीति के तहत कनाडा भारत के अलावा यूरोपीय संघ, चीन और अन्य देशों के साथ भी अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है।
दोनों देशों के बीच बातचीत को गति देने के लिए व्यापारिक स्तर पर भी संपर्क बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय व्यापार वार्ताकारों ने पिछले सप्ताह कनाडा का दौरा किया था। वहीं, कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत में हैं।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच भी इस समझौते को लेकर चर्चा हो चुकी है। रिपोर्ट में दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी के कनाडा दौरे की संभावना का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, समझौते को अंतिम रूप देने के लिए दोनों पक्षों को विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर सहमति बनानी होगी। इसमें बाजार तक पहुंच, आयात शुल्क, सेवाओं का व्यापार और कारोबार से संबंधित अन्य शर्तें महत्वपूर्ण होंगी।
2030 तक 70 अरब डॉलर का व्यापार कैसे संभव होगा?
भारत और कनाडा के बीच कारोबार को 2030 तक 70 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य मौजूदा व्यापार के मुकाबले उल्लेखनीय विस्तार की ओर संकेत करता है। वर्ष 2025 में दोनों देशों का कुल व्यापार लगभग 30.4 अरब डॉलर था। इस आधार पर लक्ष्य हासिल करने के लिए अगले कुछ वर्षों में व्यापार में पर्याप्त वृद्धि करनी होगी।
प्रस्तावित CEPA से कारोबार बढ़ाने में कई तरह से मदद मिल सकती है।
पहला, यदि समझौते के तहत कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क कम किए जाते हैं, तो संबंधित वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है। इससे निर्यातकों को दूसरे देश के बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
दूसरा, सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा मिलने से आईटी, पेशेवर सेवाओं, वित्तीय सेवाओं और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में कंपनियों के लिए नए अवसर बन सकते हैं। भारत की सेवा क्षेत्र में मजबूत मौजूदगी और कनाडा की विकसित अर्थव्यवस्था इस दिशा में सहयोग का आधार बन सकती है।
तीसरा, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ने से दोनों देशों की कंपनियां नई परियोजनाओं, आपूर्ति श्रृंखलाओं और कारोबारी साझेदारियों पर काम कर सकती हैं।
फिर भी, 70 अरब डॉलर का आंकड़ा एक लक्ष्य है, सुनिश्चित परिणाम नहीं। इसे हासिल करना समझौते की अंतिम शर्तों, कंपनियों की भागीदारी, मांग, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और दोनों देशों के बीच व्यापारिक विश्वास पर निर्भर करेगा।
2025 में भारत और कनाडा के व्यापार में क्या बदलाव आया?
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का व्यापार लगभग 10.9 अरब डॉलर रहा। इस दौरान भारत से कनाडा को होने वाले आयात में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि कनाडा के भारत को निर्यात में गिरावट आई।
आंकड़ों के मुताबिक, 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में कनाडा का भारत को निर्यात 26.5 प्रतिशत घटा, जबकि कनाडा का भारत से आयात 18.9 प्रतिशत बढ़ा।
ये आंकड़े दोनों देशों के व्यापार में मौजूद असंतुलन और विकास की संभावनाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। कनाडा के लिए भारत में अपने उत्पादों की मांग बढ़ाना एक अहम लक्ष्य हो सकता है। वहीं, भारतीय निर्यातकों के लिए कनाडा का बाजार विस्तार के नए अवसर उपलब्ध करा सकता है।
CEPA के माध्यम से दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और बाजार तक पहुंच में आने वाली बाधाओं को कम करने पर सहमति बनती है, तो इससे कारोबार को गति मिल सकती है। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव समझौते में शामिल प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
यूरेनियम सप्लाई से लेकर बैंकिंग तक बढ़ रहा सहयोग
भारत और कनाडा के आर्थिक रिश्ते केवल वस्तुओं के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग के उदाहरण सामने आए हैं।
कनाडाई कंपनी Cameco और भारत के बीच इस वर्ष यूरेनियम आपूर्ति को लेकर 2.6 अरब कनाडाई डॉलर का समझौता हुआ है। इसकी अमेरिकी डॉलर में बताई गई अनुमानित कीमत लगभग 1.8 अरब डॉलर है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए यूरेनियम की आपूर्ति भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, कनाडा की Fairfax Financial Holdings ने भारत के IDBI Bank में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने के लिए सहमति जताई है। यह प्रस्तावित लेनदेन बैंकिंग क्षेत्र में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, IDBI Bank से संबंधित सौदे का पूरा होना नियामकीय मंजूरियों और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा। इसलिए इसे अंतिम रूप से पूरा हो चुका अधिग्रहण मानना उचित नहीं होगा।
ऊर्जा और बैंकिंग क्षेत्र में ये गतिविधियां दिखाती हैं कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए कई संभावित रास्ते मौजूद हैं। CEPA इन संबंधों को व्यापक व्यापारिक ढांचे के भीतर आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान कर सकता है।
अमेरिका के अलावा दूसरे बाजारों पर भी कनाडा का फोकस
कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था के व्यापारिक आधार को व्यापक बनाने के लिए कई देशों के साथ आर्थिक संबंध बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा अगले 10 वर्षों में अमेरिका के अलावा अन्य देशों के साथ अपने व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखता है।
इस रणनीति में भारत के साथ-साथ यूरोपीय संघ और एशियाई अर्थव्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण हैं। कनाडा इंडोनेशिया के साथ मुक्त व्यापार समझौता कर चुका है और वर्ष 2026 में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन ASEAN के साथ भी समझौते की दिशा में काम कर रहा है।
किसी एक प्रमुख बाजार पर अत्यधिक निर्भरता होने से टैरिफ में बदलाव, राजनीतिक तनाव या मांग में गिरावट का असर निर्यातकों पर तेजी से पड़ सकता है। नए बाजारों में कारोबार बढ़ाने से कंपनियों को अपने उत्पादों के लिए अधिक विकल्प मिलते हैं और व्यापारिक जोखिमों को अलग-अलग बाजारों में बांटने में मदद मिलती है।
भारत के साथ प्रस्तावित समझौता इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। दूसरी ओर, भारत के लिए भी कनाडा के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करना ऊर्जा, निवेश, सेवाओं और निर्यात के क्षेत्र में अवसर पैदा कर सकता है।
भारतीय कारोबारियों और आम लोगों को क्या फायदा हो सकता है?
यदि CEPA समझौते को अंतिम रूप दिया जाता है और इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो भारतीय कारोबारियों को कनाडा के बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। खास तौर पर वे कंपनियां लाभ उठा सकती हैं जिनके उत्पादों और सेवाओं के लिए कनाडा में मांग मौजूद है।
व्यापारिक बाधाएं कम होने और नियम स्पष्ट होने से कंपनियों को लंबे समय की कारोबारी योजना बनाने में मदद मिल सकती है। निवेश बढ़ने पर कुछ क्षेत्रों में रोजगार और औद्योगिक सहयोग के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
हालांकि, आम उपभोक्ताओं को किसी वस्तु के सस्ता होने का लाभ तभी मिलेगा, जब समझौते के प्रावधानों के तहत उस वस्तु पर शुल्क या अन्य लागत में वास्तविक कमी आए और उसका लाभ बाजार तक पहुंचे। इसलिए केवल समझौते की घोषणा से सभी आयातित वस्तुओं की कीमतों में गिरावट मान लेना सही नहीं होगा।
इसी तरह, भारतीय निर्यातकों को होने वाला लाभ भी उत्पाद की गुणवत्ता, कीमत, प्रतिस्पर्धा, नियामकीय मानकों और कनाडा में मांग पर निर्भर करेगा।
आगे क्या होगा?
भारत और कनाडा के बीच CEPA को लेकर बातचीत तेज होने से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने की संभावना है। कनाडा के लिए यह अमेरिका पर व्यापारिक निर्भरता कम करने और नए बाजारों में विस्तार करने का अवसर है। भारत के लिए यह निर्यात, निवेश और सेवाओं के कारोबार को आगे बढ़ाने का संभावित रास्ता है।
अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि दोनों देश समझौते की अंतिम शर्तों पर कब तक सहमत होते हैं और उसे लागू करने के लिए क्या समयसीमा तय की जाती है। यदि बातचीत सफल रहती है, तो 2030 तक 70 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
फिलहाल, इसे संभावित आर्थिक विस्तार की योजना के रूप में देखना चाहिए। समझौते का वास्तविक लाभ उसकी अंतिम शर्तों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन से तय होगा।
Source: Reuters की रिपोर्ट पर आधारित।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई व्यापार संबंधी जानकारी उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।


