राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते प्रदूषण और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने ऐप आधारित कैब सेवाओं, डिलीवरी कंपनियों और ई-कॉमर्स वाहनों के लिए नए एग्रीगेटर लाइसेंस नियमों को मंजूरी दे दी है। इन नियमों के तहत अब दिल्ली-एनसीआर में संचालित होने वाले नए कमर्शियल वाहनों को स्वच्छ ईंधन आधारित होना अनिवार्य किया जाएगा।
इस फैसले के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में NCR में डीजल और पेट्रोल वाहनों पर पूरी तरह रोक लग सकती है? हालांकि सरकार ने अभी निजी पेट्रोल-डीजल वाहनों पर किसी पूर्ण प्रतिबंध का ऐलान नहीं किया है, लेकिन नए नियम साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी।
किन वाहनों पर लागू होंगे नए नियम?
हरियाणा सरकार द्वारा मंजूर किए गए नियम मुख्य रूप से इन श्रेणियों पर लागू होंगे ऐप आधारित कैब सेवाएं, ई-कॉमर्स डिलीवरी वाहन, ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों के वाहन, एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म से जुड़े कमर्शियल वाहन, ऑटो-रिक्शा और तिपहिया वाहन.
नए प्रावधानों के अनुसार NCR क्षेत्र में अब केवल इलेक्ट्रिक वाहन (EV), CNG वाहन, बैटरी चालित वाहन, अन्य स्वच्छ ईंधन आधारित वाहन ही नए तौर पर शामिल किए जा सकेंगे।
यानी 1 जनवरी 2026 के बाद नए पेट्रोल और डीजल वाहनों को कैब एग्रीगेटर और डिलीवरी प्लेटफॉर्म में जोड़ने की अनुमति नहीं मिलेगी।
CAQM के निर्देश के बाद लिया गया फैसला
हरियाणा सरकार का यह निर्णय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। आयोग ने जून 2025 में निर्देश जारी करते हुए कहा था कि NCR में प्रदूषण कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से स्वच्छ परिवहन प्रणाली अपनानी होगी।
इसी दिशा में दिल्ली, हरियाणा, यूपी और राजस्थान के NCR जिलों में इलेक्ट्रिक और CNG आधारित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि NCR में प्रदूषण का बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं है। खासकर डीजल कमर्शियल वाहनों से पार्टिकुलेट मैटर और नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
क्या निजी डीजल-पेट्रोल वाहनों पर भी लगेगी रोक?
फिलहाल सरकार ने निजी कारों और बाइक पर किसी तत्काल प्रतिबंध की घोषणा नहीं की है। लेकिन नीति विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में बड़े शहरों में पुराने डीजल वाहनों पर और सख्ती बढ़ सकती है।
दिल्ली में पहले से 10 साल पुराने डीजल वाहन, 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन पर प्रतिबंध लागू है। अब हरियाणा समेत NCR राज्यों में भी स्वच्छ ईंधन आधारित परिवहन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।
यानी आने वाले वर्षों में पुराने डीजल वाहनों पर दबाव बढ़ सकता है, EV खरीद पर सरकारी प्रोत्साहन बढ़ सकते हैं, कमर्शियल सेक्टर में इलेक्ट्रिक ट्रांजिशन तेज हो सकता है
इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100% टैक्स छूट का प्रस्ताव
मंत्रिमंडल बैठक से पहले हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि राज्य सरकार को EV पर 100 प्रतिशत टैक्स छूट का प्रस्ताव भेजा गया है।
यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना सस्ता हो सकता है, रोड टैक्स में राहत मिल सकती है, रजिस्ट्रेशन लागत घट सकती है, EV की डिमांड तेजी से बढ़ सकती है वर्तमान में हरियाणा सरकार EV रजिस्ट्रेशन फीस में लगभग 20 प्रतिशत तक की छूट देती है। लेकिन अब सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को और आक्रामक तरीके से बढ़ावा देना चाहती है।
500 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की तैयारी
राज्य सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को भी इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। परिवहन मंत्री के अनुसार हरियाणा जल्द ही 500 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने जा रहा है।
इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना, डीजल खर्च घटाना, सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाना, ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देना बताया जा रहा है कि NCR रूट्स पर इलेक्ट्रिक बसों की संख्या तेजी से बढ़ाई जाएगी।
यात्रियों और ड्राइवरों की सुरक्षा पर भी जोर
नए एग्रीगेटर नियमों में सिर्फ ईंधन परिवर्तन ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी फोकस किया गया है। सरकार ने कई नए सुरक्षा प्रावधान अनिवार्य किए हैं:
यात्रियों के लिए:
- न्यूनतम ₹5 लाख का बीमा कवर
- 24×7 हेल्पलाइन
- शिकायत निवारण प्रणाली
- साइबर सुरक्षा अनुपालन
ड्राइवरों के लिए:
- ₹5 लाख स्वास्थ्य बीमा
- ₹10 लाख टर्म इंश्योरेंस
- प्रशिक्षण कार्यक्रम
वाहनों में अनिवार्य सुविधाएं:
GPS ट्रैकिंग डिवाइस, पैनिक बटन, फर्स्ट एड किट, अग्निशामक यंत्र इसके अलावा वाहन और ड्राइवर का डिजिटल सत्यापन ‘वाहन’ और ‘सारथी’ पोर्टल के जरिए किया जाएगा।
क्यों तेजी से बढ़ रहा है EV की ओर रुझान?
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के पीछे कई बड़े कारण हैं:
1. बढ़ता प्रदूषण
दिल्ली-NCR दुनिया के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल है।
2. महंगा पेट्रोल-डीजल
ईंधन की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं।
3. सरकार की EV नीति
केंद्र और राज्य सरकारें टैक्स छूट और सब्सिडी दे रही हैं।
4. कम रनिंग कॉस्ट
EV की प्रति किलोमीटर लागत पेट्रोल-डीजल की तुलना में काफी कम होती है।
5. ऊर्जा आयात कम करने की रणनीति
भारत कच्चे तेल के आयात पर भारी खर्च करता है। EV अपनाने से विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है।
ऑटो सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले का सबसे बड़ा असर कैब कंपनियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, डिलीवरी नेटवर्क, ऑटो कंपनियों पर देखने को मिल सकता है। अब कंपनियों को धीरे-धीरे अपने फ्लीट को EV और CNG में बदलना पड़ सकता है। इससे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की मांग बढ़ सकती है, EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से फैल सकता है, बैटरी और ग्रीन टेक सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 5 वर्षों में NCR भारत का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ज़ोन बन सकता है।
क्या आम लोगों को अभी चिंता करने की जरूरत है?
फिलहाल निजी पेट्रोल और डीजल वाहनों पर कोई तत्काल बैन लागू नहीं किया गया है। लेकिन सरकार के फैसले साफ संकेत देते हैं कि भविष्य में स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी।
ऐसे में नई कार खरीदने वाले लोग EV विकल्प पर विचार कर सकते हैं, कमर्शियल वाहन मालिकों को नियमों के अनुसार तैयारी करनी होगी, कैब और डिलीवरी कंपनियों को अपने फ्लीट मॉडल बदलने पड़ सकते हैं कुल मिलाकर हरियाणा सरकार का यह फैसला सिर्फ एक परिवहन नीति नहीं, बल्कि NCR को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ले जाने वाला बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
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