हरिद्वार के कांवड़ मेले में एक यूट्यूबर और उसके दोस्त ने अनोखा सोशल एक्सपेरिमेंट किया। दोस्त ने करीब 8 घंटे तक भिखारी का रूप बनाकर श्रद्धालुओं से पैसे मांगे। गले में UPI QR कोड भी लगाया गया। दोनों के मुताबिक, इस दौरान करीब ₹4,000 जमा हुए। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई यूजर्स ने इस प्रयोग के आधार पर भीख मांगने वालों की कमाई को लेकर बड़े निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह दी।
हरिद्वार के कांवड़ मेले में किए गए एक सोशल एक्सपेरिमेंट ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है। यूट्यूबर पुरुषोत्तम वशिष्ठ और उनके दोस्त सचिन ने यह जानने की कोशिश की कि धार्मिक मेले में अगर कोई व्यक्ति भिखारी बनकर लोगों से पैसे मांगे, तो कुछ घंटों में कितनी रकम जुटाई जा सकती है।
इस प्रयोग के लिए सचिन ने करीब 8 घंटे तक भिखारी का रूप धारण किया और कांवड़ मेले में श्रद्धालुओं के बीच पैसे मांगे। दोनों के मुताबिक, पूरे एक्सपेरिमेंट के दौरान करीब ₹4,000 जमा हुए। हालांकि, इस आंकड़े को वास्तविक जीवन में भीख मांगने वालों की नियमित कमाई का पैमाना नहीं माना जा सकता।
फटे कपड़े, कटोरा और गले में UPI QR कोड
A YouTuber, Puroshottam Vashisht, became a beggar for 8 hours at Haridwar’s kawad Mela 2026.
He dressed like a beggar, hung a UPI QR code around his neck and walked around asking devotees for money.
He was abused and treated badly by some.
Others treated him with kindness.… pic.twitter.com/HK9Rds7IKQ
— Pratham (@CapitalLens_) August 19, 2026 एक्सपेरिमेंट को वास्तविक रूप देने के लिए सचिन ने फटे-पुराने कपड़े पहने और हाथ में एक छोटा कटोरा लेकर लोगों से मदद मांगना शुरू किया। इस प्रयोग में डिजिटल पेमेंट को भी शामिल किया गया।
सचिन के गले में UPI QR कोड लटका हुआ था, ताकि श्रद्धालु चाहें तो नकद के बजाय ऑनलाइन भुगतान भी कर सकें। शुरुआत में दोनों का अनुमान था कि पूरे दिन में शायद ₹1,000 से ₹2,000 तक ही जमा हो पाएंगे।
शुरुआती घंटों में मिले सिर्फ ₹130
प्रयोग की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक आसान नहीं रही। शुरुआती घंटों में काफी कोशिश के बाद सचिन के पास करीब ₹130 ही जमा हुए। कुछ लोगों ने पैसे देने से इनकार कर दिया, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने उनकी मदद की।
कई लोग बिना कुछ दिए आगे निकल गए तो कुछ लोगों ने रुककर पैसे दिए और बातचीत भी की। इस दौरान उन्हें यह भी अनुभव हुआ कि किसी अजनबी के सामने बार-बार मदद मांगना मानसिक तौर पर आसान नहीं है।
दुकानदार ने दे दी चश्मे की जोड़ी
मेले में एक्सपेरिमेंट के दौरान सचिन कई दुकानदारों से भी बातचीत करते रहे। इसी दौरान एक सनग्लास विक्रेता ने उन्हें चश्मे की एक जोड़ी दे दी।
इस घटना को लेकर सचिन ने मजाकिया अंदाज में खुद को ‘प्रोफेशनल भिखारी’ तक कहा। वहीं, उनके गले में लगे UPI QR कोड के जरिए भी करीब ₹40 का डिजिटल भुगतान मिलने की बात सामने आई।
असली भिखारी से भी हुई बातचीत
एक्सपेरिमेंट के दौरान एक ऐसा पल भी आया, जब सचिन एक वास्तविक भिखारी के पास जाकर बैठ गए। दोनों के बीच बातचीत हुई और भिक्षावृत्ति से जुड़ी व्यक्तिगत परिस्थितियों पर चर्चा हुई।
बताया गया कि उस व्यक्ति को अपना नाम और वह पहले कहां रहता था, इसकी जानकारी तक याद नहीं थी। यह मुलाकात इस बात की ओर भी ध्यान खींचती है कि सड़क पर भीख मांगने वाले हर व्यक्ति की परिस्थिति एक जैसी नहीं होती।
गरीबी, बेघरपन, बीमारी, दिव्यांगता, पारिवारिक परिस्थितियां और आर्थिक संकट जैसे कई कारण किसी व्यक्ति को भिक्षावृत्ति की ओर धकेल सकते हैं।
चार घंटे में ₹800, आठ घंटे में करीब ₹4 हजार
करीब चार घंटे बाद सचिन ने अपनी जमा रकम गिनी तो उनके पास लगभग ₹800 थे। इसके बाद भी उन्होंने कई घंटे तक एक्सपेरिमेंट जारी रखा।
इस दौरान कभी लोगों ने पैसे दिए तो कभी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। कुछ जगहों पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से हटने के लिए भी कहा। बारिश और लगातार पैदल चलने के कारण यह प्रयोग शारीरिक रूप से भी थकाऊ साबित हुआ।
करीब 8 घंटे बाद दोनों ने दावा किया कि कुल मिलाकर लगभग ₹4,000 जमा हुए। इस हिसाब से औसत रकम करीब ₹500 प्रति घंटे बैठती है।
₹4 हजार से लाखों की कमाई का अनुमान
₹4,000 के इस आंकड़े के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की गणनाएं भी सामने आईं। यदि कोई व्यक्ति लगातार इसी दर से रोजाना कमाई करे तो महीने में करीब ₹1.2 लाख की रकम का अनुमान लगाया जा सकता है।
कुछ वायरल पोस्ट में 12-13 घंटे रोजाना काम करने पर ₹8,000 से ₹10,000 प्रतिदिन तक की संभावित कमाई का अनुमान भी लगाया गया। हालांकि, ये गणनाएं केवल इस एक सोशल एक्सपेरिमेंट पर आधारित हैं।
इन्हें देशभर में भीख मांगने वाले लोगों की वास्तविक या औसत आय नहीं माना जा सकता। किसी एक मेले, एक दिन और एक व्यक्ति के अनुभव से पूरे वर्ग की आर्थिक स्थिति का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
‘भीख मांगना बिल्कुल आसान नहीं’
एक्सपेरिमेंट के अंत में दोनों ने माना कि बाहर से आसान नजर आने वाला भीख मांगने का काम वास्तव में बेहद थका देने वाला है।
घंटों तक अजनबियों के पास जाकर मदद मांगना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण लगा। सचिन को जहां कुछ लोगों ने पैसे देकर मदद की, वहीं कुछ लोगों के खराब व्यवहार का भी सामना करना पड़ा।
दोनों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि भीख मांगने को कमाई का आसान जरिया समझने के बजाय मेहनत और ईमानदारी से कमाने की कोशिश करनी चाहिए।
₹4 हजार की कमाई पर सोशल मीडिया में बहस
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर 8 घंटे में करीब ₹4,000 जमा होने को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने इसे देखकर सवाल उठाया कि क्या धार्मिक आयोजनों और पर्यटन स्थलों पर भीख मांगना कुछ लोगों के लिए कमाई का स्थायी जरिया बन गया है।
हालांकि, कई यूजर्स ने इस एक्सपेरिमेंट से बड़े निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह दी। उनका कहना था कि महज 8 घंटे का प्रयोग उन लोगों की वास्तविक जिंदगी को नहीं दर्शा सकता, जो मजबूरी में भीख मांगते हैं।
इसलिए इस एक्सपेरिमेंट से मिली ₹4,000 की रकम को केवल एक सोशल एक्सपेरिमेंट का परिणाम समझना चाहिए, न कि भिक्षावृत्ति करने वाले सभी लोगों की संभावित दैनिक आय का प्रमाण।


