नई दिल्ली। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से जुड़ी एक कंपनी को करीब 19 साल बाद बंद करने का फैसला हुआ है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की बेंगलुरु बेंच ने इन्फोटेक HAL लिमिटेड को भंग करने का आदेश दिया है। यह कंपनी HAL और साइएंट लिमिटेड के बीच 50:50 हिस्सेदारी वाला जॉइंट वेंचर (JV) थी।
साइएंट लिमिटेड ने एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए इसकी जानकारी दी है। कंपनी के मुताबिक, इन्फोटेक HAL लंबे समय से निष्क्रिय थी और उसके पास कोई संपत्ति भी नहीं बची थी। ऐसे में कंपनी को बंद करने की प्रक्रिया का HAL पर कोई खास वित्तीय असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
2007 में हुई थी कंपनी की शुरुआत
इन्फोटेक HAL लिमिटेड की शुरुआत अगस्त 2007 में हुई थी। इसे HAL और साइएंट ने मिलकर बनाया था। दोनों कंपनियों की इसमें 50-50 फीसदी हिस्सेदारी थी।
इस जॉइंट वेंचर को मुख्य रूप से एयरो-इंजन के सर्विस वर्क से जुड़े काम के लिए शुरू किया गया था। उस समय एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में विशेषज्ञता रखने वाली सरकारी कंपनी HAL और इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी क्षेत्र की साइएंट के साथ आने को रणनीतिक कदम माना गया था।
हालांकि, समय के साथ कंपनी का कारोबार आगे नहीं बढ़ पाया और यह लंबे समय से निष्क्रिय हो गई।
तीन साल से ज्यादा समय से निष्क्रिय थी कंपनी
इन्फोटेक HAL पिछले तीन साल से अधिक समय से पूरी तरह निष्क्रिय थी। कंपनी के खिलाफ कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) की शुरुआत 22 अगस्त 2025 को हुई थी।
इसके बाद कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) के फैसले के आधार पर NCLT ने 2 फरवरी 2026 को कंपनी के लिक्विडेशन का आदेश दिया था।
लिक्विडेशन प्रक्रिया के दौरान यह सामने आया कि कंपनी के पास कोई संपत्ति नहीं बची थी। साथ ही, उससे जुड़े मामलों का निपटारा इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 के तहत कर दिया गया।
इसके बाद NCLT की बेंगलुरु बेंच ने कंपनी को पूरी तरह भंग करने का आदेश दिया।
HAL पर क्यों नहीं पड़ेगा बड़ा वित्तीय असर?
कंपनी के लंबे समय से निष्क्रिय रहने और उसके पास कोई संपत्ति नहीं होने के कारण इसके बंद होने का HAL पर कोई बड़ा वित्तीय प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है।
यह मामला मुख्य रूप से एक पुराने और निष्क्रिय जॉइंट वेंचर को कानूनी प्रक्रिया के तहत समाप्त करने से जुड़ा है। इसलिए इसे HAL के मौजूदा कारोबार या उसकी वित्तीय स्थिति पर किसी बड़े संकट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
डिफेंस सेक्टर में बढ़ रहा है स्वदेशीकरण पर जोर
दिलचस्प बात यह है कि इन्फोटेक HAL का यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत सरकार डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादन को लगातार बढ़ावा दे रही है।
18 अगस्त को रक्षा मंत्रालय के तहत रक्षा उत्पादन विभाग ने छठी ‘पॉजिटिव इंडिजनाइज़ेशन लिस्ट’ जारी की थी। इसमें कुल 405 रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रक्षा वस्तुओं को शामिल किया गया है।
इन वस्तुओं की अनुमानित कारोबारी क्षमता करीब ₹3,070 करोड़ बताई गई है। इस पहल का उद्देश्य रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करना और देश में इनके उत्पादन को बढ़ावा देना है।
इससे HAL समेत घरेलू रक्षा कंपनियों के लिए आने वाले समय में नए कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।
HAL के लिए इसका क्या मतलब है?
इन्फोटेक HAL का बंद होना HAL के मौजूदा रक्षा कारोबार से अलग एक पुराने जॉइंट वेंचर की समाप्ति है। कंपनी तीन साल से ज्यादा समय से सक्रिय नहीं थी और लिक्विडेशन प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी।
दूसरी ओर, HAL का मुख्य कारोबार लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर, एयरो-इंजन और अन्य एयरोस्पेस एवं डिफेंस प्लेटफॉर्म से जुड़ा है। सरकार के बढ़ते स्वदेशीकरण अभियान से ऐसे क्षेत्रों में घरेलू कंपनियों के लिए मांग और अवसर बढ़ने की संभावना है।
इसलिए इन्फोटेक HAL का बंद होना एक पुराने निष्क्रिय JV की प्रशासनिक और कानूनी समाप्ति है, न कि HAL के मौजूदा कारोबार के बंद होने का संकेत।


