पिछले एक साल में अगर किसी धातु ने निवेशकों को सबसे ज्यादा चौंकाया है, तो वह चांदी रही है। आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) माना जाता है और अनिश्चितता के दौर में निवेशकों की पहली पसंद भी यही होता है। लेकिन इस बार तस्वीर अलग दिखी। सोना जहां लगभग 40 प्रतिशत तक मजबूत हुआ, वहीं चांदी ने करीब 140 प्रतिशत तक की तूफानी तेजी दिखाकर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
यह तेजी सिर्फ ट्रेडिंग या सट्टेबाजी की वजह से नहीं आई। इसके पीछे ग्लोबल इंडस्ट्रियल डिमांड, क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की बढ़ती जरूरत, सप्लाई संकट और गोल्ड-सिल्वर रेशियो जैसे कई बड़े फैक्टर काम कर रहे हैं। यही वजह है कि अब बाजार में चांदी को सिर्फ “गरीब आदमी का सोना” नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भविष्य की टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल ग्रोथ से जुड़ी रणनीतिक धातु के रूप में देखा जा रहा है।
लंबी अवधि में भी चांदी ने दिखाया दम
सिर्फ पिछले एक साल ही नहीं, बल्कि 5 और 10 साल के आंकड़े भी बताते हैं कि कई चरणों में चांदी ने सोने से ज्यादा तेज रिटर्न दिया है। हालांकि चांदी का सफर ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला रहा है, लेकिन जब भी इंडस्ट्रियल ग्रोथ और वैश्विक लिक्विडिटी बढ़ती है, तब इसमें तेजी सोने से कहीं ज्यादा आक्रामक दिखती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी दुनिया “नई इंडस्ट्रियल मेटल सुपर-साइकिल” के शुरुआती चरण में हो सकती है। ऐसे में चांदी को दोहरा फायदा मिल रहा है — एक तरफ यह कीमती धातु है और दूसरी तरफ तेजी से बढ़ती तकनीकी अर्थव्यवस्था की जरूरत भी।
1. चांदी सिर्फ Precious Metal नहीं, Future Technology Metal बन चुकी है
सोने की मांग मुख्य रूप से ज्वेलरी, केंद्रीय बैंकों की खरीद और सुरक्षित निवेश से जुड़ी होती है। लेकिन चांदी की कहानी अलग है। चांदी का इस्तेमाल अब तेजी से बढ़ती टेक्नोलॉजी आधारित अर्थव्यवस्था में हो रहा है।
सोलर पैनल निर्माण में चांदी बेहद जरूरी धातु है। इसके अलावा:
- इलेक्ट्रिक व्हीकल
- सेमीकंडक्टर
- माइक्रोचिप
- AI सर्वर
- 5G नेटवर्क
- हाई-एंड बैटरी सिस्टम
- पावर ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर
जैसे सेक्टर्स में इसकी भारी मांग बढ़ी है।
दुनिया भर में ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन की रफ्तार तेज हुई है। अमेरिका, चीन और यूरोप लगातार क्लीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ा रहे हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट्स के अनुसार सोलर इंस्टॉलेशन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। इसका सीधा फायदा चांदी की मांग को मिला।
यही कारण है कि निवेशकों ने चांदी को सिर्फ एक “सेफ हेवन” नहीं बल्कि “ग्रोथ मेटल” के रूप में देखना शुरू किया।
2. Gold-Silver Ratio ने दिया बड़ा संकेत
गोल्ड-सिल्वर रेशियो बाजार का बेहद अहम संकेतक माना जाता है। यह बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितनी चांदी चाहिए। जब यह रेशियो बहुत ऊपर चला जाता है, तो इसका मतलब होता है कि सोने के मुकाबले चांदी सस्ती है। मई 2025 में यह रेशियो 102 तक पहुंच गया था। बाजार के कई बड़े निवेशकों और फंड्स ने इसे “Silver Undervaluation Signal” माना।
इसके बाद चांदी में तेजी से खरीदारी बढ़ी। जैसे-जैसे निवेशकों का पैसा चांदी की तरफ शिफ्ट हुआ, कीमतों में विस्फोटक तेजी आने लगी। अब यह रेशियो गिरकर करीब 58 के आसपास आ गया है।
मार्केट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जब यह रेशियो 50-55 के दायरे में पहुंचता है, तब बाजार में चांदी का मोमेंटम बेहद आक्रामक हो जाता है। हालांकि इसी चरण में गिरावट का जोखिम भी तेजी से बढ़ता है।
3. छोटा बाजार होने से तेजी और ज्यादा दिखाई दी
सोने का बाजार बहुत बड़ा और स्थिर माना जाता है। इसके मुकाबले चांदी का बाजार छोटा है। यही वजह है कि इसमें थोड़ी अतिरिक्त मांग भी कीमतों को तेजी से ऊपर धकेल देती है। विशेषज्ञों के अनुसार चांदी में liquidity कम होती है, volatility ज्यादा रहती है, speculative buying तेजी से असर दिखाती है
पिछले एक साल में ETF निवेश, futures market buying और retail participation बढ़ने से चांदी की कीमतों में विस्फोटक तेजी देखने को मिली।
यही कारण है कि जब बाजार में risk appetite बढ़ती है, तब चांदी अक्सर सोने से कई गुना ज्यादा तेजी दिखाती है।
4. Supply Deficit ने बाजार की चिंता बढ़ाई
चांदी की तेजी के पीछे सबसे बड़ा fundamental factor सप्लाई संकट माना जा रहा है।
Supply Deficit=Demand−Production
Silver Institute की रिपोर्ट के अनुसार 2026 में ग्लोबल सिल्वर सप्लाई दबाव में रह सकती है। कई प्रमुख खनन क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि कमजोर है, जबकि इंडस्ट्रियल मांग लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। अनुमान है कि बाजार में 1,400 टन से ज्यादा का सप्लाई डेफिसिट रह सकता है। इसका मतलब है कि बाजार में जितनी चांदी की जरूरत है, उतना उत्पादन नहीं हो पा रहा।
जब किसी कमोडिटी में मांग मजबूत हो, सप्लाई सीमित हो, निवेशकों की खरीद बढ़े तो कीमतों में तेज उछाल आना लगभग तय माना जाता है।
5. Geopolitical Tension और डॉलर कमजोरी ने भी दिया सपोर्ट
पिछले एक साल में दुनिया का आर्थिक और राजनीतिक माहौल भी चांदी के पक्ष में रहा।
इन फैक्टर्स ने बाजार को प्रभावित किया:
- पश्चिम एशिया तनाव
- डॉलर इंडेक्स में कमजोरी
- ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता
- महंगाई का दबाव
- अमेरिका-चीन तनाव
- सप्लाई चेन जोखिम
अमेरिका ने हाल में चांदी को Critical Minerals List में शामिल किया। इससे बाजार को संकेत मिला कि आने वाले वर्षों में टेक्नोलॉजी और रक्षा सेक्टर के लिए चांदी रणनीतिक धातु बन सकती है। दूसरी तरफ चीन की तरफ से सिल्वर एक्सपोर्ट कंट्रोल से जुड़ी खबरों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इससे बाजार में “future shortage fear” और मजबूत हुआ।
एक्सपर्ट्स क्यों दे रहे हैं सावधानी की सलाह?
हालांकि चांदी ने शानदार रिटर्न दिया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे बेहद volatile asset भी मानते हैं। Bonanza के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के मुताबिक मौजूदा समय में गोल्ड-सिल्वर रेशियो का तेजी से गिरना यह संकेत देता है कि बाजार में speculative momentum काफी मजबूत है।
उनका मानना है कि इंडस्ट्रियल मांग मजबूत बनी हुई है, निवेशकों की aggressive buying जारी है लेकिन मौजूदा स्तरों पर profit booking का खतरा भी बढ़ रहा है
उन्होंने कहा कि जब गोल्ड-सिल्वर रेशियो 50-55 के पास पहुंचता है, तब बाजार में बड़ी तेजी और बड़ी गिरावट दोनों देखने को मिल सकती हैं। यानी आगे चांदी में उतार-चढ़ाव काफी ज्यादा रह सकता है।
MCX में हालिया गिरावट ने बढ़ाई चिंता
तेज रैली के बाद मुनाफावसूली का असर भी दिखने लगा है। हाल के कारोबारी सत्र में MCX पर सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली।
14 मई के इंट्राडे कारोबार में चांदी करीब ₹19,843 तक टूटी, सोना करीब ₹3,128 तक फिसला इस गिरावट ने यह साफ कर दिया कि चांदी में तेजी जितनी तेज होती है, correction भी उतना ही बड़ा हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
विशेषज्ञ एकमुश्त निवेश से बचने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि SIP या staggered buying बेहतर रणनीति हो सकती है, portfolio diversification जरूरी है, short-term volatility के लिए तैयार रहना चाहिए अगर वैश्विक इंडस्ट्रियल मांग मजबूत बनी रहती है और क्लीन एनर्जी निवेश बढ़ता है, तो लंबी अवधि में चांदी को सपोर्ट मिलता रह सकता है। लेकिन तेजी के बाद sharp correction की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Disclaimer
कमोडिटी बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। newsjagran.in पर दिए गए विचार और निवेश संबंधी राय एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज फर्मों के निजी विचार हैं। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
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