बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। Gold Silver Price Today: दशहरे के मौके पर सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए कमोडिटी बाजार से मिली-जुली खबर सामने आई। एक ओर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने आर्थिक अनिश्चितता बढ़ाई, तो दूसरी ओर घरेलू और वैश्विक बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार शुरू होने के बाद सोना करीब 1,485 रुपये तक टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में भी 1,000 रुपये से अधिक की गिरावट देखने को मिली।
फेस्टिव सीजन में सोने-चांदी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों पर लोग गहने खरीदने के साथ-साथ कीमती धातुओं में निवेश भी करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है और कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, तो सोने और चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं? क्या यह खरीदारी का अच्छा मौका है या निवेशकों को अभी इंतजार करना चाहिए? आइए, बाजार के आंकड़ों और विशेषज्ञों के विश्लेषण से समझते हैं।
दशहरे पर कितना सस्ता हुआ सोना?
MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र की क्लोजिंग के मुकाबले 1,485 रुपये तक सस्ता हुआ। कारोबार के दौरान इसकी कीमत गिरकर 1,45,781 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गई। वहीं, इसका उच्चतम स्तर 1,46,715 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।
उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के मुताबिक, खबर लिखे जाने तक सोना 1,46,609 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। ऊंचे स्तरों से आई इस गिरावट ने उन खरीदारों का ध्यान खींचा है, जो त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी के लिए बेहतर भाव का इंतजार कर रहे हैं।
हालांकि, MCX पर कारोबार होने वाले सोने का भाव और ज्वेलरी दुकानों पर मिलने वाला सोने का खुदरा भाव अलग हो सकता है। गहने खरीदते समय स्थानीय बाजार के भाव, सोने की शुद्धता, मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
चांदी की कीमत भी 2.09 लाख रुपये के करीब
सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। MCX पर चांदी पिछले कारोबारी सत्र की क्लोजिंग के मुकाबले 1,008 रुपये तक सस्ती हो गई। कारोबार के दौरान चांदी का भाव 2,08,820 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंचा, जबकि इसका उच्चतम स्तर 2,09,999 रुपये रहा।
खबर लिखे जाने तक चांदी करीब 2,08,957 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। इससे पहले इसकी पिछली क्लोजिंग 2,09,828 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
चांदी की कीमतों में होने वाले बदलाव का असर केवल आभूषणों तक सीमित नहीं रहता। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भी चांदी का इस्तेमाल होता है। इसलिए इसकी कीमत पर निवेश की मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और डॉलर की चाल का भी प्रभाव पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी फिसले सोना-चांदी
घरेलू बाजार में गिरावट के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी दिखाई दी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, शाम करीब 5 बजे तक COMEX पर सोना लगभग 4,135 डॉलर प्रति औंस और चांदी करीब 57 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। सोना इसी श्रेणी में आता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर बार तनाव बढ़ने पर सोने की कीमतों में तेजी ही आएगी।
सोने का भाव अमेरिकी डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों की उम्मीदों, निवेशकों की मुनाफावसूली और बाजार में पहले से बनी पोजीशन से भी प्रभावित होता है। इन कारकों के बीच संतुलन बदलने पर सुरक्षित निवेश की मांग के बावजूद कीमतों में गिरावट संभव है।
सोने-चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं?
1. ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली
सोने की कीमतों में तेजी आने के बाद निवेशक अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली कर सकते हैं। इसे प्रॉफिट बुकिंग कहा जाता है। जब बड़ी संख्या में निवेशक ऊंचे भाव पर बिकवाली करते हैं, तो कीमतों पर दबाव बन सकता है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एंड करेंसी विभाग के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के अनुसार, COMEX पर लगभग 4,190 डॉलर के ऊंचे स्तर के आसपास हुई मुनाफावसूली के कारण सोने की कीमत में कमजोरी आई। उनके विश्लेषण के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,140 डॉलर और घरेलू बाजार में लगभग 1,46,000 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया।
2. डॉलर इंडेक्स की मजबूती
अमेरिकी डॉलर की चाल सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का कारोबार मुख्य रूप से डॉलर में होता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी मुद्राओं का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा पड़ सकता है। इससे मांग और कीमतों पर दबाव बनने की संभावना रहती है।
जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, डॉलर इंडेक्स का लगभग 101.95 के स्तर के आसपास मजबूत बने रहना सोने की तेजी को सीमित करने वाले कारकों में शामिल रहा।
3. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति भी सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। ब्याज दरों में बदलाव और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिलने से डॉलर, बॉन्ड यील्ड और सोने की मांग प्रभावित हो सकती है।
जब बाजार में यह उम्मीद मजबूत होती है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, तो बिना ब्याज देने वाली संपत्ति के रूप में सोने पर दबाव पड़ सकता है। इसके विपरीत, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद सोने को समर्थन दे सकती है।
विशेषज्ञ के अनुसार, निवेशकों की नजर अक्टूबर के अंत में आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले और उसकी नीतिगत गाइडलाइन्स पर रहेगी। इस घोषणा से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
4. मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल का असर
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है। तेल महंगा होने से परिवहन, उत्पादन और अन्य लागतों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे महंगाई की चिंताएं भी बढ़ सकती हैं।
ऐसी परिस्थितियों में सोने की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, लेकिन यदि डॉलर मजबूत हो, निवेशक मुनाफावसूली करें या ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी रहे, तो सोने की कीमतों में गिरावट भी आ सकती है। मौजूदा बाजार में अलग-अलग कारकों का यही मिला-जुला असर दिखाई दे रहा है।
सोने के लिए 4,200 डॉलर का स्तर क्यों अहम?
जतीन त्रिवेदी के विश्लेषण के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,200 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस यानी प्रतिरोध स्तर बना हुआ है। इसका मतलब है कि कीमत इस स्तर के आसपास पहुंचने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
अगर सोना इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिकता है, तो बाजार की धारणा में बदलाव आ सकता है। वहीं, इस स्तर को पार करने में नाकाम रहने पर मुनाफावसूली और उतार-चढ़ाव जारी रह सकते हैं।
हालांकि, किसी तकनीकी स्तर को भविष्य की कीमत का निश्चित संकेत नहीं माना जाना चाहिए। वैश्विक आर्थिक आंकड़े, डॉलर की चाल, फेडरल रिजर्व का फैसला और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा को तेजी से बदल सकते हैं।
दशहरे पर सोना खरीदें या अभी इंतजार करें?
सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट के बाद खरीदारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अभी खरीदारी करना सही रहेगा। इसका जवाब खरीदारी के उद्देश्य, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।
अगर आप त्योहार के लिए गहने खरीद रहे हैं: यदि खरीदारी पहले से तय है, तो केवल कीमतों में और गिरावट की उम्मीद में निर्णय टालना जरूरी नहीं है। अलग-अलग ज्वेलर्स के भाव, मेकिंग चार्ज, बायबैक शर्तों और हॉलमार्क की जांच करें। कीमतों में गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में भाव उसी अनुपात में कम हों, यह जरूरी नहीं है।
अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं: एक ही दिन की गिरावट के आधार पर पूरी रकम निवेश करने के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति और निवेश अवधि का आकलन करें। कुछ निवेशक चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना पसंद करते हैं, जिससे एक ही भाव पर पूरी रकम लगाने का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, इससे मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती।
अगर आप शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करना चाहते हैं: सोने और चांदी में तेज उतार-चढ़ाव के दौरान बिना जोखिम प्रबंधन के ट्रेड करना नुकसानदेह हो सकता है। डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों और तकनीकी स्तरों पर नजर रखना उपयोगी हो सकता है। वायदा बाजार में लेवरेज के कारण नुकसान शुरुआती निवेश से भी अधिक जोखिम पैदा कर सकता है।
अगर आप चांदी खरीदना चाहते हैं: चांदी की कीमतों पर निवेश के साथ औद्योगिक मांग का भी असर होता है। इसलिए इसे केवल सोने के सस्ते होने के आधार पर खरीदने का फैसला नहीं करना चाहिए। अपनी जरूरत, निवेश अवधि और संभावित उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखें।
आगे सोने-चांदी की कीमतों में क्या होगा?
निकट भविष्य में सोने और चांदी की दिशा कई प्रमुख घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दर संबंधी फैसला, डॉलर इंडेक्स की चाल, मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल की कीमतें बाजार को प्रभावित कर सकती हैं।
यदि डॉलर मजबूत बना रहता है और ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली जारी रहती है, तो सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने या ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होने से कीमती धातुओं को समर्थन मिल सकता है। चांदी में औद्योगिक मांग से जुड़े कारक भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
इसलिए दशहरे पर आई गिरावट को सोने-चांदी में आगे बड़ी तेजी या बड़ी गिरावट का निश्चित संकेत मानना सही नहीं होगा। बाजार में तेजी और कमजोरी, दोनों की संभावना बनी हुई है।
निवेशकों और खरीदारों के लिए जरूरी बात
दशहरे पर MCX में सोना करीब 1,485 रुपये और चांदी लगभग 1,008 रुपये तक सस्ती हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतों में कमजोरी दिखाई दी। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊंचे स्तर पर प्रॉफिट बुकिंग, डॉलर इंडेक्स की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले की अनिश्चितता इस गिरावट के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
अगर आप गहने खरीदना चाहते हैं, तो स्थानीय खुदरा भाव और कुल लागत की तुलना करना बेहतर रहेगा। वहीं, निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को अपनी जोखिम क्षमता और समयावधि के अनुसार फैसला लेना चाहिए। केवल एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में निवेश करने से बचें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है, निवेश की सलाह नहीं। सोना और चांदी की कीमतें तेजी से बदल सकती हैं। निवेश या ट्रेडिंग से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।


