नई दिल्ली। Gold Silver Price Crash: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका में सितंबर 2026 के खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी होने के बाद घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं में तेज गिरावट दर्ज की गई। चांदी के वायदा भाव में एक ही सत्र में 8,257 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट आई, जबकि सोना भी 1.3 प्रतिशत तक सस्ता हो गया। वैश्विक बाजार में भी गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली।
सोने और चांदी में आई इस गिरावट के पीछे अमेरिकी महंगाई, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब आगामी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों पर रहेगी।
अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से क्यों टूटा सोना-चांदी?

अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (BLS) के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में अमेरिका की हेडलाइन कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई में महीने-दर-महीने 0.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, कोर CPI में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हेडलाइन महंगाई का आंकड़ा बाजार के अनुमान के अनुरूप रहा, जबकि कोर महंगाई में बढ़ोतरी अनुमान से अधिक रही।
महंगाई के आंकड़े बाजार की ब्याज दर संबंधी उम्मीदों को प्रभावित करते हैं। यदि महंगाई लगातार ऊंची बनी रहती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। ऊंची ब्याज दरों की संभावना बढ़ने पर निवेशक बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले विकल्पों को अधिक आकर्षक मान सकते हैं। इससे सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि ये नियमित ब्याज नहीं देती हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुलियन की कीमतों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, सोने-चांदी की चाल पर भू-राजनीतिक परिस्थितियों, निवेश मांग और औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है।
MCX पर कितनी गिर गई सोने और चांदी की कीमत?
महंगाई के आंकड़ों के बाद घरेलू वायदा बाजार में दोनों धातुओं के दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, कीमतों में यह बदलाव रहा।
MCX पर सोने-चांदी का ताजा वायदा भाव
| धातु | कॉन्ट्रैक्ट | गिरावट | भाव |
|---|---|---|---|
| सोना | 4 दिसंबर 2026 | ₹2,051 यानी 1.3% | ₹1,48,450 प्रति 10 ग्राम |
| चांदी | 4 दिसंबर 2026 | ₹8,257 यानी 3.77% | ₹2,19,217 प्रति किलोग्राम |
इन आंकड़ों के मुताबिक, सोने के वायदा भाव में 2,051 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी आई, जबकि चांदी 8,257 रुपये प्रति किलोग्राम टूट गई। प्रतिशत के लिहाज से चांदी में गिरावट सोने के मुकाबले ज्यादा रही।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि MCX पर दिखने वाले भाव वायदा कॉन्ट्रैक्ट के होते हैं। स्थानीय सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतें शहर, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्कों के आधार पर अलग हो सकती हैं। इसलिए वायदा बाजार में आई गिरावट का मतलब यह नहीं है कि हर शहर में खुदरा कीमतें उतनी ही कम हो गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गोल्ड-सिल्वर की चमक पड़ी फीकी
अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी देखने को मिला। कॉमेक्स पर सोने का भाव 1.63 प्रतिशत गिरकर 4,184 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, चांदी की कीमत में 5.47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव 59.415 डॉलर प्रति औंस रह गया।
अंतरराष्ट्रीय कीमतों को भारतीय मुद्रा में बदलने पर सोने का अनुमानित मूल्य करीब 1,42,154 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का करीब 2,01,812 रुपये प्रति किलोग्राम बैठता है। हालांकि, ये केवल मुद्रा रूपांतरण पर आधारित अनुमान हैं। भारत में वास्तविक कीमतों पर डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स, स्थानीय प्रीमियम और अन्य लागतों का भी प्रभाव पड़ता है।
वैश्विक बाजार में चांदी की ज्यादा गिरावट यह दिखाती है कि कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव केवल सोने तक सीमित नहीं रहा। चांदी निवेश की धातु होने के साथ-साथ औद्योगिक उपयोग में भी आती है। इसलिए इसकी कीमत पर आर्थिक विकास, विनिर्माण गतिविधियों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता का भी असर पड़ सकता है।
आगे कितनी गिर सकती हैं सोने और चांदी की कीमतें?
मार्केट एवं कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, अमेरिका में CPI के आंकड़ों के बाद बॉन्ड यील्ड में उछाल आया और ब्याज दरों के ऊंचा बने रहने की आशंका बढ़ी। इससे बुलियन सहित दूसरे एसेट क्लास पर नकारात्मक असर पड़ा।
एक्सपर्ट ने सोने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3,900 से 3,800 डॉलर प्रति औंस और चांदी के लिए 54 से 50 डॉलर प्रति औंस के संभावित स्तरों का अनुमान जताया। उनके मुताबिक, घरेलू बाजार में भी सोने और चांदी पर दबाव बना रह सकता है।
हालांकि, ये संभावित स्तर हैं, निश्चित लक्ष्य नहीं। कीमतों में आगे की दिशा अमेरिकी महंगाई के अगले आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के रुख, डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक निवेश मांग पर निर्भर करेगी। यदि महंगाई के दबाव में कमी आती है या ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होती है, तो सोने-चांदी को समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत, महंगाई के ऊंचे बने रहने और डॉलर में मजबूती से कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।
क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?
सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट के बाद कई निवेशक खरीदारी के अवसर तलाश सकते हैं। लेकिन केवल एक दिन की गिरावट देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। वायदा बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव तेज रहता है और इसमें लेवरेज के कारण नुकसान भी बढ़ सकता है।
लंबी अवधि के निवेशक अपनी वित्तीय जरूरतों, निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर फैसला कर सकते हैं। एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध खरीदारी पर विचार करना भी एक विकल्प हो सकता है। वहीं, आभूषण खरीदने वालों को स्थानीय बाजार में सोने की शुद्धता, चांदी की गुणवत्ता, मेकिंग चार्ज और अंतिम बिल की कीमत की तुलना करनी चाहिए।
निष्कर्ष: अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों के बाद सोने और चांदी में तेज गिरावट ने कमोडिटी बाजार का ध्यान खींचा है। MCX पर चांदी 8,257 रुपये और सोना 2,051 रुपये तक टूटा। आगे कीमतों की दिशा अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों और वैश्विक आर्थिक संकेतों से तय हो सकती है। निवेशकों को किसी भी फैसले से पहले ताजा भाव और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है। इसमें दिए गए भाव और एक्सपर्ट के अनुमान संबंधित बाजार आंकड़ों पर आधारित हैं और बदल सकते हैं। इसे निवेश की सलाह न मानें। कमोडिटी बाजार में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
Source: उपलब्ध बाजार आंकड़ों और कमोडिटी एक्सपर्ट के बयान पर आधारित।


