Gold Price Today: MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को गिरावट देखने को मिली। हाल ही में दो हफ्ते के ऊपरी स्तर पर पहुंचने के बाद बुलियन मार्केट में मुनाफावसूली हावी रही। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
सोने और चांदी में बुधवार को आई तेज तेजी के बाद गुरुवार को दबाव देखने को मिला। घरेलू वायदा बाजार MCX (Multi Commodity Exchange) पर गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स दोनों कमजोर रहे। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग अभी भी बनी हुई है।
MCX पर सोने-चांदी के भाव में गिरावट
MCX पर 5 अगस्त 2026 एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स 0.44 फीसदी गिरकर करीब ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं 4 सितंबर 2026 एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट 0.50 फीसदी की गिरावट के साथ करीब ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता दिखा।
इससे पहले बुधवार को घरेलू सराफा बाजार में सोने और चांदी में जोरदार तेजी आई थी। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन (AISA) के अनुसार, 22 जुलाई को घरेलू स्पॉट मार्केट में सोने की कीमत करीब ₹1,900 बढ़कर ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के दो हफ्ते के हाई पर पहुंच गई थी। वहीं चांदी में भी करीब ₹8,500 की तेजी आई और भाव ₹2.30 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गए थे।
क्यों टूटा सोना और चांदी?
सोने और चांदी की कीमतों में आज की गिरावट की सबसे बड़ी वजह बुधवार की तेज तेजी के बाद हुई मुनाफावसूली (Profit Booking) रही। निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफा निकालना शुरू किया, जिससे कीमतों पर दबाव आया।
इसके अलावा कई वैश्विक कारणों ने भी बुलियन मार्केट के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है।
1. फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले सतर्क निवेशक
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी पॉलिसी मीटिंग से पहले ट्रेडर्स सतर्क हो गए हैं। बाजार इस बात पर नजर बनाए हुए है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर आगे क्या संकेत देता है।
आमतौर पर ब्याज दरें ऊंची रहने से सोने पर दबाव बढ़ता है क्योंकि गोल्ड से निवेशकों को कोई नियमित ब्याज आय नहीं मिलती। ऐसे में निवेशक बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले एसेट्स की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति प्रभावित हो सकती है।
3. डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर नजर
सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड का सीधा असर पड़ता है। अगर डॉलर मजबूत होता है तो आमतौर पर सोने की कीमतों पर दबाव आता है क्योंकि अन्य करेंसी में गोल्ड महंगा हो जाता है।
गिरावट के बावजूद गोल्ड को सपोर्ट क्यों?
हालांकि सोने में गिरावट आई है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण इसकी सुरक्षित निवेश वाली मांग बनी हुई है।
जियो-पॉलिटिकल तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक गोल्ड को सेफ हेवन एसेट के तौर पर पसंद करते हैं।
चांदी को भी इसका फायदा मिला है, लेकिन इसमें औद्योगिक मांग की भूमिका ज्यादा होने के कारण उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में अधिक देखने को मिलता है।
अब सोने के लिए अगला बड़ा ट्रिगर क्या है?
अब निवेशकों की नजर अगले हफ्ते होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। बाजार की उम्मीद है कि फेड ब्याज दरों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा, लेकिन भविष्य की नीति को लेकर दिए जाने वाले संकेत काफी अहम होंगे।
अगर फेड ब्याज दरों में कटौती के संकेत देता है तो इससे सोने को मजबूती मिल सकती है। वहीं, लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों का संकेत मिलने पर गोल्ड पर दबाव बढ़ सकता है।
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट और कमोडिटी-करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, गिरावट के दौरान सोने में फिर से खरीदारी देखने को मिल रही है। रुपये की कमजोरी, जियो-पॉलिटिकल तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग सोने को सपोर्ट दे रही है।
उनका कहना है कि आने वाले समय में 29 जुलाई को होने वाला अमेरिकी फेड का नीतिगत फैसला गोल्ड और सिल्वर मार्केट के लिए सबसे अहम ट्रिगर रहेगा।
जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, निकट अवधि में MCX गोल्ड ₹1.42 लाख से ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में रह सकता है।
वहीं चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर मकड़ा का कहना है कि COMEX गोल्ड हाल ही में करीब $4,166 प्रति औंस के स्तर पर पहुंचा था, लेकिन तेल की कीमतों में तेजी और फेड मीटिंग को लेकर सतर्कता के कारण इसमें गिरावट आई है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
सोने में हालिया गिरावट को बाजार विशेषज्ञ सामान्य करेक्शन मान रहे हैं। हालांकि, निवेशकों को फेड की नीति, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव पर नजर रखनी होगी।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गोल्ड अभी भी पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन का अहम हिस्सा बना हुआ है, लेकिन ऊंचे स्तरों पर खरीदारी करते समय जोखिम प्रबंधन जरूरी है।
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