नई दिल्ली: भारत में सोने की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन अब इसकी अगली बड़ी क्रांति ज्वेलरी शोरूम से नहीं बल्कि स्मार्टफोन की स्क्रीन से शुरू होती दिख रही है। युवा पीढ़ी यानी Gen Z सोने को सिर्फ आभूषण या पारिवारिक विरासत के रूप में नहीं, बल्कि एक स्मार्ट निवेश (Smart Investment) के तौर पर देखने लगी है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council – WGC) की नई रिपोर्ट ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ के अनुसार, भारत के घरों में मौजूद करीब 31,000 टन सोना, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹315 लाख करोड़ है, आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा वित्तीय संसाधन बन सकता है। रिपोर्ट का मानना है कि यदि इस सोने का एक छोटा हिस्सा भी औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ जाए तो भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है।
Gen Z के लिए सोना सिर्फ गहना नहीं, निवेश भी
1997 से 2012 के बीच जन्मी Gen Z की सोच पिछली पीढ़ियों से अलग है। यह पीढ़ी डिजिटल दुनिया में पली-बढ़ी है और निवेश के नए विकल्पों को तेजी से अपनाती है।
युवाओं के लिए सोना खरीदने के मायने बदल चुके हैं। वे चाहते हैं कि निवेश की प्रक्रिया आसान हो, जरूरत पड़ने पर सोना तुरंत नकदी में बदला जा सके, खरीदारी उनकी पसंद के अनुसार हो और पूरी प्रक्रिया डिजिटल व पारदर्शी हो।
इसी कारण डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF, गोल्ड सेविंग प्लेटफॉर्म और अन्य ऑनलाइन निवेश विकल्पों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। युवा पहले इंटरनेट पर जानकारी जुटाते हैं और फिर अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन खरीदारी का फैसला करते हैं।
2035 तक Gen Z बनेगी सबसे बड़ी उपभोक्ता शक्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2035 तक भारत की Gen Z की कुल उपभोक्ता खर्च क्षमता लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।
यही वजह है कि आने वाले वर्षों में भारत के गोल्ड मार्केट की दिशा और गति तय करने में यही पीढ़ी सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी। यदि यह वर्ग डिजिटल माध्यमों से सोने में निवेश बढ़ाता है तो पूरे गोल्ड इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
घरों में रखा सोना बन सकता है देश की आर्थिक ताकत
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां परिवारों के पास सबसे ज्यादा निजी सोना मौजूद है। अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास करीब 31,000 टन सोना सुरक्षित रखा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार यदि इस विशाल गोल्ड स्टॉक का थोड़ा हिस्सा भी औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में शामिल किया जाए तो देश को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं।
इससे मिल सकते हैं तीन बड़े लाभ
- वित्तीय बाजार में नकदी (Liquidity) बढ़ेगी।
- उद्योगों और निवेश परियोजनाओं के लिए अधिक पूंजी उपलब्ध होगी।
- विदेशों से सोने के आयात पर भारत की निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकेगी।
डिजिटल गोल्ड और फिजिकल गोल्ड को जोड़ने की जरूरत
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि भारत में गोल्ड सेक्टर को आधुनिक बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं और प्लेटफॉर्म्स को एक-दूसरे से जोड़ना जरूरी है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि निम्न व्यवस्थाओं को एकीकृत किया जाए—
- गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम
- गोल्ड रीसाइक्लिंग
- इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR)
- डिजिटल गोल्ड
- बुलियन बैंकिंग
- गोल्ड-बैक्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स
ऐसा होने पर घरों में रखा सोना केवल तिजोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत के अनुसार निवेश, लोन, ट्रेडिंग और आर्थिक गतिविधियों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
भारत का गोल्ड मार्केट कितना बड़ा है?
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| घरों में मौजूद सोना | लगभग 31,000 टन |
| अनुमानित मूल्य | करीब ₹315 लाख करोड़ |
| भारत का ज्वेलरी मार्केट (2025) | लगभग ₹4.5 लाख करोड़ |
| भविष्य की रणनीति | डिजिटल गोल्ड, गोल्ड मोनेटाइजेशन और रीसाइक्लिंग का एकीकरण |
गोल्ड सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए 5 बड़े सुझाव
रिपोर्ट में भारत के गोल्ड इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए पांच प्रमुख कदम सुझाए गए हैं।
- घरों में रखे सोने को निवेश और वित्तीय प्रणाली से जोड़ना।
- भारत की कुल जरूरत का 10-15% सोना घरेलू खदानों से निकालना।
- भारत को दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड ज्वेलरी निर्यातक बनाना।
- युवाओं की पसंद के अनुरूप आधुनिक और हल्के डिजाइन वाले आभूषण विकसित करना।
- सोने को केवल निजी बचत नहीं बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक संपत्ति के रूप में देखना।
नेशनल गोल्ड बोर्ड बनाने की सिफारिश
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के इंडिया रीजनल CEO सचिन जैन ने कहा कि रिपोर्ट में नेशनल गोल्ड बोर्ड बनाने की सिफारिश की गई है।
यह बोर्ड देश के गोल्ड सेक्टर से जुड़ी नीतियों, उद्योग, निवेश और सरकारी योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा।
इसके अलावा गोल्ड इनोवेशन सेंटर स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया है, जहां रिसर्च, नई तकनीक, डिजिटल समाधान, पर्यावरण संरक्षण और स्किल डेवलपमेंट पर काम किया जाएगा।
भविष्य में कैसा होगा भारत का गोल्ड इकोसिस्टम?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म, सरकारी योजनाएं और निजी क्षेत्र मिलकर काम करें तो आने वाले वर्षों में भारत का गोल्ड मार्केट पूरी तरह बदल सकता है। मोबाइल ऐप के जरिए निवेश, डिजिटल गोल्ड, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट और गोल्ड-बैक्ड वित्तीय उत्पादों के बढ़ते इस्तेमाल से घरों में रखा विशाल सोना देश की आर्थिक विकास यात्रा का मजबूत आधार बन सकता है।
Gen Z की डिजिटल सोच और तकनीक के प्रति भरोसा भारत के पारंपरिक गोल्ड सेक्टर को आधुनिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। यदि यह परिवर्तन सफल रहा तो ₹315 लाख करोड़ मूल्य का घरेलू गोल्ड स्टॉक केवल परिवारों की संपत्ति नहीं रहेगा, बल्कि भारत की आर्थिक वृद्धि, निवेश और वित्तीय मजबूती का महत्वपूर्ण इंजन बन सकता है।


